मोहन राव भागवत ने कहा शिक्षा व स्वास्थ्य जैसी बुनियादी आवश्यकताएं होनी चाहिए…

वे बुधवार को स्वामी विवेकानंद कैंसर अस्पताल के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे। कहा कि अन्न, वस्त्र, निवास, स्वास्थ्य, शिक्षा और अतिथि सत्कार भारतीय जीवन दर्शन है। मैं भी भूखा ना रहूं साधु भी ना भूखा जाए की हमारी गौरवमयी परंपरा रही है। सबको गुणवत्तापूर्ण चीजें मिलनी चाहिए।मोहन राव भागवत ने कहा शिक्षा व स्वास्थ्य जैसी बुनियादी आवश्यकताएं होनी चाहिए...

भागवत ने कहा कि चिकित्सा की कई पैथियां हैं। इनमें एलोपैथ तत्काल राहत देनेवाला है। लेकिन, आयुर्वेद समेत अन्य पैथियां भी कारगर व प्रभावी हैं। गोमूत्र चिकित्सा में कैंसर प्रतिरोधक क्षमता है। आयुर्वेद रोगी को देखकर इलाज करता है। लेकिन, चीन की परंपरागत चिकित्सा पद्धति में वातावरण को ध्यान में रखकर चिकित्सा की जाती है। चीन की पद्धति में उपचार से ज्यादा सजगता पर ध्यान दिया जाता है। अपने यहां भी किसी ऐसी मिश्रित चिकित्सा पद्धति की तलाश करनी चाहिए जिससे कम कीमत में सामान्य लोगों के लिए चिकित्सा सुलभ हो सके।

लगन से पूरा होता काम

बड़े-बड़े भाषण व मोटे ग्रंथ कोई संदेश नहीं देते। इन्हें आचरण में उतारना जरूरी होता है। कोई भी काम लगन के भरोसे पूरा होता है। यह कैंसर अस्पताल भी लगन से ही पूरा हुआ है। साधनवानों व धनवानों की इस देश में कोई कमी नहीं है। लेकिन, इन सबसे बड़ा है सत्य बल। इसी बल पर राम ने समुद्र पर पैदल चलकर बंदर-भालुओं की सेना के साथ अभेद्य समझी जानेवाली लंका को जीत लिया। दृढ़संकल्प के साथ किया गया काम अवश्य पूरा होता है। 

अपने धर्म का पालन करें

मनुष्य व पशु में सबसे बड़ा अंतर यह है कि मनुष्य दूसरों के लिए जीता है और पशु केवल अपने लिए। सबको अपने धर्म का पालन करना चाहिए। धर्म सबको जोडऩा, उन्नत करना व बिखरने नहीं देना सिखाता है। धर्म ही सुखदायक व धनदायक है। त्याग व परोपकार मानव जीवन का आधार है। त्याग का मतलब अहंकार का त्याग। रामकृष्ण परमहंस का जीवन परोपकारी था। इसलिए उनको समाज आज भी याद करता है। सामान्य लोग अपनी आठ पीढिय़ों को भी याद नहीं रख पाते। मन पर असंवेदना की परत आ जाने से हम दूसरों का दुख नहीं समझते।

समाज सेवा में लगें

उन्होंने कैंसर अस्पताल की स्थापना के लिए डा. अशोक कुमार और उनकी टीम का अभिनंदन किया। कहा कि अब समाज का कर्तव्य है कि यह अस्पताल संसाधनों की वृद्धि के साथ मरीजों की सेवा में कैसे आगे बढ़ता रहे। हम जहां जितने में हैं, उतने से ही समाज की सेवा में लगें तो देश में परिवर्तन दिखने लगेगा। समारोह को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री अश्विनी चौबे, बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय, सांसद डा. सीपी ठाकुर, आरके सिंह आदि ने भी संबोधित किया।

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