विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) की सालाना बैठक के उद्घाटन सत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भाषण शुरू हो गया है। जानिए क्या बोले पीएम मोदी-
LIVE Updates:
– मोदी ने अपना भाषण यह कहकर समाप्त किया कि आप भारत आइए हम आपके स्वागत के लिए तैयार हैं।
– जब विश्व दो युद्धों की चुनौतियों से गुजरा तब भारत अपना निजी स्वार्थ न होते हुए भी शांति के लिए आगे आया।
– भारत ने हमेशा चुनौतियों की सहायता के लिए हाथ बढ़ाया है।
– साझा चुनौतियों का सामना करने के लिए हमें एक साथ मिलकर काम करना ही होगा।
– भारत के लोगों ने सरकार के द्वारा किए गए बदलावों का स्वेच्छा से स्वागत कर विश्वास जताया है।
– जीएसटी जैसा बड़ा सुधार हमारी सरकार ने किया, हमारे काम की दुनियाभर मे सराहना हो रही है
-अब भारत के लोग जॉब तलाशने वाले नहीं बल्कि जॉब देने वाले बनेंगे।
– भारत में 1400 कानूनों को खत्म कर दिया गया है।
– राज्य सरकारों ने सैकड़ों रिफॉर्म किए हैं जिनसे यहां बिजनेस करना सरल हो गया है।
– आज भारत में निवेश करना और भारत की यात्रा करना सभी कुछ पहले की तुलना में बहुत आसान हो गया है।
– विकास तभी सही अर्थों में विकास है जब हम सबको साथ लेकर चलें और सबके लिए करें।
– भारत के इतिहास में पहली बार मतदाताओं ने किसी एक पार्टी पर इतना विश्वास जताकर पूर्ण बहुमत दिया।
-हमारी सरकार ने करोड़ों लोगों के लिए पहली बार बैंक अकाउंट खोलने का काम किया।
-भारत के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने प्राकृतिक संसाधनों के शोषण का विरोध किया था।
– हमें वातावरण को बचाने और क्लाइमेट चेंज के लिए आगे आना होगा।
– हम विकास की दौड़ में प्रकृति का शोषण कर रहे हैं। हमें चिंतन करना चाहिए कि हम विकास नहीं विनाश कर रहे हैं।
– किसी दूसरे की संपत्ति का लालच न करो।
-मुझे आशा है इस फोरम में आतंकवाद जैसी गंभीर चुनौती पर सभी वक्ता बोलेंगे।
– मानव सभ्यता के लिए तीन बड़ी चुनौतियां हैं- मौसम में बड़ा बदलाव, अच्छे और बुरे आतंकी के लिए बनाया गया भेद, ज्यादा से ज्यादा देश आत्मसंकुचित होते जा रहे हैं।
– मौसम में बड़ा बदलाव (क्लाइमेट चेंज) दुनिया के लिए खतरनाक है। आर्कटिक की बर्फ पिघल रही है, बहुत से द्वीप पिघल रहे हैं।
– ग्लोबलाइजेशन की चमक धीरे धीरे कम होती जा रही है।
– तेजी से बदलती हुई टेक्नोलॉजी के सामने पहले से चली आ रही चुनौतियां अब और गंभीर होती जा रही हैं।
– मैं पूरी जिम्मेदारी से कहना चाहता हूं कि, जोड़ने, मोड़ने और तोड़ने का काम आज सोशल मीडिया कर रहा है।
– 20 साल पहले अगर गूगल में अमेजन के बारे में सर्च करते नदियों के बारे में पता चलता था।
– आज भी दावोस अपने समय से आगे है।
– उस जमाने में ट्वीट करना चिड़ियों का काम था मनुष्यों का नहीं।
– वह समय था जब साइबर स्पेस में गूगल का अविष्कार नहीं हुआ था।
-तब से अब तक भारत की जीडीपी अब लगभग 6 गुना बढ़ चुकी है।
-पीएम मोदी ने कहा दावोस में पहली बार भारत के प्रधानमंत्री की पहली यात्रा 1997 में हुई थी।
-दावोस में प्रधानमंत्री मोदी मंच पर पहुंचे, उनका भाषण शुरू हुआ।
– पीएम मोदी का भाषण सुनने फिल्म अभिनेता शाहरुख खान कार्यक्रम स्थल पहुंचे हैं।
-पीएम मोदी ने स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति एलन बर्सेट से मुलाकात की है।
दावोस पर एक नजर
विश्व आर्थिक मंच की बैठक में दुनिया भर के बड़े नेताओं, कारोबारियों, उद्योगपतियों और अर्थशास्त्रियों का जमावड़ा होता है, लेकिन इस बार का सम्मेलन खास है। भारत वैश्विक निवेश के लिए दुनिया से सीधी बात करने जा रहा है।
स्विट्जरलैंड का बर्फ से ढका कस्बा दावोस, जिसे कभी स्वास्थ्य पर्यटन, स्किइंग, शीत कालीन अन्य खेलों और शून्य से नीचे के तापमान के लिए जाना जाता था, आज वहां हर ओर भारत की झलक मिल रही है।
इमारतों की छत से लेकर बसों पर लगे बड़े-बड़े होर्डिंग (बिलबोर्ड) भारत और भारतीय कंपनियों का प्रचार कर रहे हैं। भारी बर्फबारी से सड़कें बेहद संकरी हो गई हैं, लेकिन निजी और सरकारी कर्मियों की आवाजाही में कोई कमी नहीं आई है।
भारत सरकार के आधिकारिक लाउंज में चाय, पकौड़ा, वड़ा पाव से लेकर डोसा की काफी मांग है। यहां आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र सरकार ने भी अपने लाउंज बना रखे हैं। इसके अलावा कई भारतीय कंपनियों के भी काउंटर बने हुए हैं। पांच दिवसीय यह बैठक इस बार काफी बड़ी लग रही है और बर्फबारी भी खूब हो रही है, जिससे सोमवार सुबह से ही सारे रास्ते बंद हो गए थे।
स्विस रिजॉर्ट में सामान्य से तीन गुना भीड़ है, लेकिन लोगों के उत्साह में कोई कमी नहीं नजर आई। कमी हो भी कैसे 70 देशों के राष्ट्राध्यक्ष सम्मेलन में हिस्सा लेने वाले हैं और बिजनेस क्षेत्र की भी 3000 से ज्यादा हस्तियां पहुंचने वाली हैं। सम्मेलन को कवर करने के लिए करीब दो हजार पत्रकार भी पहुंचेंगे।
दुनिया को बताएंगे मोदी, भारत मतलब बिजनेस
पीएम खुद कह चुके हैं कि दुनिया भारत की नीतियों और विकास की क्षमताओं की कहानी उसके मुखिया से सुनना चाहती है। दावोस में 125 करोड़ भारतीयों की सफलता की कहानी सुनाने में उन्हें बहुत गर्व होगा। हाल ही में मोदी ने कहा था कि भारत ने दुनिया भर में अपनी छाप छोड़ी है इसलिए अब उसका लाभ उठाने की जरूरत है। भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़ रही है। सभी वैश्विक रेटिंग एजेंसियों ने इसे मान्यता दी है। बड़े बाजार के तौर पर ताकत बढ़ाने के लिए दावोस एक बेहतरीन अवसर है।
पीएम मोदी 21 साल बाद दावोस जाने वाले भारत के पहले प्रधानमंत्री हैं। 1997 में तत्कालीन प्रधानमंत्री एच डी देवगौड़ा दावोस बैठक में शामिल हुए थे। इसमें करीब 2500 लोग हिस्सा लेते हैं। इसे खास वर्ग के सम्मेलन के रूप में देखा जाता है। दावोस में सरकारी और गैर-सरकारी लोग और संगठन एक साथ मिलकर वैश्विक विकास के लिए फैसले लेते हैं। पांच दिन तक चलने वाली इस 48वीं बैठक में व्यापार, राजनीति, कला, शिक्षा और अन्य क्षेत्रों से कई नामी हस्तियां शिरकत करेंगी। भारत की ओर से पीएम मोदी समेत 130 लोग इसमें शामिल होंगे।
क्या है विश्व आर्थिक मंच
विश्व आर्थिक मंच का मुख्यालय जिनेवा में है। यह एक गैर-लाभकारी संस्था है। इसका उद्देश्य विश्व में बिजनेस राजनीति, शिक्षा और अन्य क्षेत्रों में कार्य करने वाले प्रभावी लोगों को एक मंच पर लाकर वैश्विक, औद्योगिक दिशा तय करना है।
इसकी स्थापना 1971 में जिनेवा विश्वविद्यालय में कार्यरत प्रोफेसर एम श्वाब ने की थी। तब इसका नाम यूरोपियन प्रबंधन था। 1971 में ही यूरोपीय आयोग और यूरोपीय प्रौद्योगिकी संगठन के सहयोग से इस संगठन की पहली बैठक हुई।
1976 में इस मंच ने दुनिया की 1000 प्रमुख कंपनियों को सदस्यता देना शुरू किया। वर्ष 1987 में इसका नाम विश्व आर्थिक मंच कर दिया गया। तब से अब तक, हर साल जनवरी में इसकी बैठक आयोजित होती है। साल 2015 में इस मंच को आर्थिक संस्थान के रूप में मान्यता मिली।
सिर्फ एक बार दावोस से बाहर हुई बैठक
विश्व आर्थिक मंच की बैठक हमेशा दावोस में होती है। लेकिन एक बार ऐसा मौका आया जब यह न्यूयॉर्क में आयोजित की गई। अमेरिका पर 9/11 के आतंकी हमले के बाद 2002 में इसका आयोजन न्यूयॉर्क में हुआ। यह फैसला अमेरिका और उसे लोगों के साथ एकजुटता प्रदर्शित करने को लिया गया।