पत्नी का आरोप-चार साल में हुए छह ट्रांसफर, दबाव में थे जितेंद्र

नई दिल्ली.तीन दिन से लापता आईसीएएस अधिकारी जितेंद्र झा की पत्नी भावना झा ने आरोप लगाया कि सरकार ने एचआरडी मिनिस्ट्री में तैनाती से पहले उनके चार साल में छह बार ट्रांसफर किया था। इस कारण वह काफी दबाव में थे। इससे पहले वह मिनिस्ट्री ऑफ इंन्फॉर्मेशन एंड ब्रॉडकास्टिंग, मिनिस्ट्री ऑफ अर्थ साइंस, मिनिस्ट्री ऑफ लेबर, हेल्थ और सीपीडब्ल्यूडी में रहे चुके थे। ट्रांसफर होने से पहले वह लगातार तीन साल होम मिनिस्ट्री में रहे। डिस्ट्रिक्ट पुलिस डिप्टी कमिश्नर ने छह टीमों का गठन कर झा की तलाश शुरू कर दी है।

टीमों ने तीन दर्जन से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जब्त

– टीमों ने तीन दर्जन से ज्यादा सीसीटीवी कैमरों की फुटेज जब्त की है। इसकी जांच में एक रेस्टोरेंट की फुटेज में जितेन्द्र जाते दिखाई दे रहे हैं। लेकिन जिस रास्ते पर वह जा रहे हैं वह मेट्रो की ओर नहीं जा रहा।

– ऐसे में पुलिस मान कर चल रही है कि वह मेट्रो से कहीं नहीं गए। जबकि मंगलवार को आईटीएल स्कूल की फुटेज के बाद माना जा रहा था कि उन्होंने मेट्रो पकड़ी है। इसके बाद पुलिस ने मेट्रो प्रशासन से आसपास के स्टेशनों की फुटेज मांगी थी।

पटना में हो सकते हैं जितेंद्र

– दिल्ली पुलिस के इनपुट के बाद बिहार पुलिस ने जितेन्द्र की तलाश में जुट गई है। ऐसे में पटना के गांधी संग्रहालय के पास उन्हें देखे जाने का इनपुट मिला है। लेकिन पुलिस मौके पर पहुंची तो कोई नहीं मिला।

– ऐसे में पुलिस ने गांधी संग्रहालय के पास लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच शुरू कर दी है। इतना ही नहीं बिहार पुलिस जितेन्द्र के रिश्तेदारों के घर पहुंच कर उनके बारे में जानकारी जुटा रही है।

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झा का अच्छा सर्विस रिकॉर्ड, 10 लाख खर्च कर दिलवा रहे आईआईपीए में सालभर की ट्रेनिंग: एमएचआरडी

– द्वारका से लापता हुए इंडियन सिविल एकाउंट सर्विसेज (आईसीएएस) 1998 बैच के अधिकारी जितेंद्र कुमार झा का दो दिन बाद भी पता नहीं चला है। वह सोमवार सुबह घर से लापता हैं। एचआरडी मिनिस्ट्री में तैनात झा के गायब होने की चर्चा बुधवार को उनके डिपार्टमेंट में पूरे दिन रही।

– वह यहां ट्रेनिंग पर हैं। अधिकारियों को दिल्ली पुलिस की ओर से वह फुटेज भी दिखाई गई। इस वीडियो फुटेज में घर से एक किलोमीटर तक की दूरी में जितेंद्र को पैदल चलते हुए आइडेंटिफाई किया गया।

– डिपार्टमेंटल अधिकारियों के बीच यह चर्चा रही कि ट्रेनिंग शुरू होने से कुछ दिन पहले वह छुट्टी पर चले गए थे। लेकिन ट्रेनिंग शुरू होने से पहले वह एक बार जरूर शास्त्री भवन आए थे और सबसे मुस्कुराकर हंस बोलकर गए। वह काफी खुश थे।

– जितेंद्र एक एक्टीविस्ट की भूमिका में भी पहले चर्चित रहे हैं। जो उनकी पर्सनल और सोशल लाइफ है। इसलिए इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता कि इसी के चलते वह कहीं चले गए हों।

– जितेंद्र एमएचआरडी से पहले मिनिस्ट्री ऑफ इंन्फॉर्मेशन एंड ब्रॉडकास्टिंग (एमआईबी) में कार्यरत थे। वह एमआईबी से 20 फरवरी 2017 को स्थानांतरित होकर एचआरडी मिनिस्ट्री में कंट्रोलर ऑफ अकांउट्स के पोस्ट पर तैनात हुए।

– यहां 11 जुलाई 2017 तक वह कार्यरत रहे। इसके बाद इन्हें ट्रेनिंग के लिए इंडियन इंस्टिट्यूशन ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन (आईआईपीए) भेजा गया, जहां इन्हें एक साल की ट्रेनिंग करनी है।

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विभाग के सीनियर अधिकारी बताते हैं कि ऐसा मौका उन्हीं अधिकारियों को दिया जाता है, जिनका सर्विस रिकॉर्ड अच्छा हो। सरकार की ओर से इनकी ट्रेनिंग के लिए 10 लाख रुपए भी खर्च किए जा रहे हैं। ट्रेनिंग के दौरान जितेंद्र को वेतन एचआरडी मिनिस्ट्री से ही मिल रहा है। ट्रेनिंग के बाद पोस्टिंग कहां होगी, यह डिपार्टमेंट ऑफ पर्सलन एंड ट्रेनिंग के निर्देशानुसार तय होगा।

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