ताज मानसिंह होटल की 30 जनवरी को होगी नीलामी, NDMC ने शुरू की प्रक्रिया

राजधानी दिल्ली के लुटियन जोन में स्थित ताजमान सिंह होटल अगले साल 30 जनवरी तक नीलाम हो जाएगा। नई दिल्ली महानगर पालिका (एनडीएमसी) ने इसके अलावा दो अन्य होटलों की निलामी का आदेश दे दिया है। दो अन्य होटल है होटल कनॉट और होटल एशियन। 

ताज मानसिंह के लिए रखा 32.2 करोड़
एनडीएमसी ने ताज मानसिंह के लिए 32.2 करोड़ का रिजर्व प्राइस रखा है। वहीं कनॉट होटल के लिए 49 लाख और एशियन होटल के लिए 9.9 लाख रुपये का रिजर्व प्राइस रखा है। नीलामी के बाद जो भी खरीददार इनको खरीदेगा, उसको 33 साल का लाइसेंस दिया जाएगा इससे पहले एनडीएमसी ने अशोका रोड पर बने ली मेरिडियन होटल का लाइसेंस भी कैंसिल कर दिया है।
एनडीएमसी ने ताज मानसिंह के लिए 32.2 करोड़ का रिजर्व प्राइस रखा है। वहीं कनॉट होटल के लिए 49 लाख और एशियन होटल के लिए 9.9 लाख रुपये का रिजर्व प्राइस रखा है। नीलामी के बाद जो भी खरीददार इनको खरीदेगा, उसको 33 साल का लाइसेंस दिया जाएगा इससे पहले एनडीएमसी ने अशोका रोड पर बने ली मेरिडियन होटल का लाइसेंस भी कैंसिल कर दिया है।
नीलामी से बचाने के लिए खटखटाया था कोर्ट का दरवाजा
टाटा ग्रुप के स्वामित्व वाली इंडियन होटल कंपनी लिमिटेड ने ताज मानसिंह को नीलामी से बचाने के लिए पहले हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। हाईकोर्ट ने नवंबर 2016 में ताज मानसिंह को नीलाम करने का आदेश दिया था।
टाटा ग्रुप ने इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी कि ऐसा करना जरूरी नहीं है, क्योंकि वो एनडीएमसी के लिए अच्छी खासी रकम जुटाता है। हालांकि ग्रुप को सुप्रीम कोर्ट से भी किसी प्रकार की कोई राहत नहीं मिली थी।
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ली मेरिडियन की लाइसेंस फीस पर हुआ था विवाद
ली मेरिडियन की लाइसेंस फीस पर काफी विवाद हुआ था। तब एनडीएमसी पर आरोप लगा था कि वो इस 5 स्टार होटल से टैक्स वसूली में काफी ढुलमुल रवैया अपना रही है। पिछले साल एनडीएमसी ने होटल की लाइसेंस फीस में 3 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी की थी। तब आरोप लगा था कि एनडीएमसी ने लाइसेंस फीस को 150 करोड़ रुपये में जारी कर दिया था, जिससे खजाने को 400 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था।
ली मेरिडियन की लाइसेंस फीस पर काफी विवाद हुआ था। तब एनडीएमसी पर आरोप लगा था कि वो इस 5 स्टार होटल से टैक्स वसूली में काफी ढुलमुल रवैया अपना रही है। पिछले साल एनडीएमसी ने होटल की लाइसेंस फीस में 3 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी की थी। तब आरोप लगा था कि एनडीएमसी ने लाइसेंस फीस को 150 करोड़ रुपये में जारी कर दिया था, जिससे खजाने को 400 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था।





