MP: लिखित परीक्षा में फेल अफसरों को नहीं हटाया, अब कह रहे कोई परीक्षा ही नहीं हुई
भोपाल.नगर निगम का खजाना खाली है, छोटे- बड़े सभी विकास कार्य ठप पड़े हैं। इसके बावजूद निगम की आय बढ़ाने को लेकर जिम्मेदार कितने गंभीर हैं इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आंतरिक परीक्षा में फेल अफसर चार महीने बाद भी जोनल अधिकारी और वार्ड प्रभारी बने हुए हैं। जबकि राजस्व वसूली की जिम्मेदारी इन्हीं की होती है।

दरअसल, पूर्व निगमायुक्त छवि भारद्वाज ने इन अफसरों की हकीकत जानने के लिए चार महीने पहले एक लिखित परीक्षा आयोजित कराई थी। इस परीक्षा में आधा दर्जन से अधिक अफसर फेल हुए थे। यही नहीं, आधे से ज्यादा अफसरों को 50 प्रतिशत से भी कम अंक मिले थे।
– हैरानी की बात तो यह है कि प्रशिक्षण से पहले बाकायदा विशेषज्ञों की ओर से दो दिवसीय प्रशिक्षण दिया गया था। इसके बाद 20 अंक का एक प्रश्न पत्र इन अफसरों को हल करने के लिए दिया गया था। लेकिन हैरानी की बात तो यह थी कि कुछ जोनल अधिकारी छह अंक ही ला पाए थे।
– इस परीक्षा का उद्देश्य राजस्व वसूली के काम में लगे अफसरों की योग्यता परखना था। राजस्व शाखा की जिम्मेदारी संभाल रहे तत्कालीन अधिकारियों का कहना था कि परीक्षा में फेल होने वाले अफसरों से राजस्व वसूली की जिम्मेदारी वापस लेकर यह जिम्मेदारी दूसरे काबिल अफसरों को दी जाएगी। लेकिन, परीक्षा हुए चार महीने बीतने के बाद भी किसी भी अफसर की जिम्मेदारी में बदलाव नहीं किया गया है।
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अब नकार रहे हैं जिम्मेदार, तर्क- वह तो विभागीय कार्रवाई थी
– परीक्षा आयोजित कर योग्यता परखने की योजना तत्कालीन अपर आयुक्त राजस्व एमपीएस अरोरा ने बनाई थी। तत्कालीन निगमायुक्त ने इस पर मुहर लगाई थी। परीक्षा से पहले अपर आयुक्त अरोरा का तबादला निगम से हो गया।
– यही नहीं, पिछले दिनाें निगमायुक्त भारद्वाज भी निगम से जा चुकी हैं। इनके जाने के साथ ही अधिकारियों ने इस प्रक्रिया को ही नकार दिया है। जिम्मेदारों का कहना है कि परीक्षा नहीं हुई विभागीय कार्रवाई थी।
इसलिए जरूरी है बदलाव
– वर्तमान में निगम में ऐसे अफसर वार्ड प्रभारी अौर जोनल अधिकारी की जिम्मेदारी निभा रहे हैं जिन्हें राजस्व की गणना सहित अन्य काम नहीं आते हैं। लेकिन, राजनीतिक रसूख के कारण ये लंबे समय से इस पद पर डटे हैं। ये लोग निगम के हित में काम करने के बजाय अपने और अपने राजनीतिक आकाओं के लिए काम करके निगम के खजाने को घाटा कराते हैंं।
– मकोरिया को मिले थे 30% अंक: 20 नंबर की परीक्षा में जोन एक जोनल अधिकारी अवधनारायण मकोरिया को छह और जोन दो जोनल अधिकारी एमपी शांडिल्य को महज आठ अंक मिले थे। जबकि अधिकांश अफसरों के नंबर 50 प्रतिशत से कम थे। हालांकि जोन सात जोनल अधिकारी अर्जुन मेघानी ने पूरे 20 और जोन 13 जोनल अधिकारी नीलेश श्रीवास्तव ने 18 नंबर प्राप्त किए थे।
– कोई परीक्षा आयोजित नहीं हुई थी। न ही इसके आधार पर किसी तरह का बदलाव होना था। राजस्व वसूली में लगे अफसरों से पूछताछ की गई थी।





