नींदड़ पर किसान और जेडीए आमने- सामने, कब्जे पर फैसला आज

जयपुर. शहर के नींदड़ आवासीय योजना के लिए जमीन अवाप्ति के मामले में जेडीए व किसान अब आमने- सामने हो गए है। दीपावली का त्यौहार मनाने के बाद जेडीए ने समर्पित हो चुकी, सरकारी व मंदिर माफी की जमीन पर कब्जा लेने की कार्यवाही शुरु कर दी है। जमीन पर कब्जा लेने की प्लानिंग पर सोमवार को फैसला होगा। पहले जेडीए कमिश्नर के विदेश होने के कारण निर्णय नहीं हो पाया था।
नींदड़ पर किसान और जेडीए आमने- सामने, कब्जे पर फैसला आज
वहीं, किसानों ने भी जेडीए की हर गतिविधि पर नजर रखे हुए है तथा जबरन कब्जा लेने की स्थिति में मुकाबला करने की तैयारी कर ली है। हालांकि जेडीए की ओर से पहले हु राजकार्य में बाधा को लेकर ज्यादातर आंदोलनकारियों के खिलाफ मुकदमे दर्ज है तथा इन पर कभी भी कार्रवाई हो सकती है। इसको लेकर पहले जेडीए के अधिकारियों ने पुलिस कमिश्नरेट के अधिकारियों से भी वार्ता कर चुके है।

जेडीए की प्लानिंग से दो गुटों में बंटे किसान

नींदड़ आवासीय स्कीम की प्लानिंग के बाद कुछ किसानों ने अपनी जमीन जेडीए को समर्पित कर दी। इस समर्पित जमीन के आरक्षण पत्र के सौदे भी हो चुके है। ऐसे में समर्पित जमीन करने वाले अब जेडीए पर विकसित जमीन देने का दबाव बना रहे है। जेडीए ने इन समर्पित जमीन कर चुके किसानों व लोगों के लिए 1350 में से 500 बीघा में प्लानिंग की है तथा इसका रेरा में भी रजिस्ट्रेशन करवाया जा रहा है। जेडीए की दलील है कि समर्पित कर चुके व जेडीए की ओर से कोर्ट में पैसे जमा करवाए गई जमीन पर कब्जा लिया जाएगा। लोगों को विकसित जमीन दी जाएगी।

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समर्पित कर चुके किसान भी कर रहे है आंदोलन

नींदड़ बचाओ युवा किसान संघर्ष समिति के संयोजक नगेंद्र सिंह शेखावत व दूसरे किसानों का कहना है कि जेडीए को जमीन समर्पित कर चुके किसान भी आंदोलन कर रहे है। उन्होंने पहले गलती से जमीन दे दी, लेकिन अब जमीन समाधि सत्याग्रह में शामिल है। आंदोलन के बाद एक भी किसान ने जमीन जेडीए को नहीं दी है।
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