अब वोटों से बंद नहीं करा सकेंगे शराब ठेके, हर जिले में विरोध, लेकिन अटक गई वोटिंग

जयपुर. प्रदेश में शराब बिक्री का विरोध हर जिले में हो रहा है। लगभग हर जिले में 5-6 ग्राम पंचायतें ऐसी हैं, जो अपने क्षेत्र का शराब ठेका बंद करवाने के लिए वोटिंग की मांग कर रही हैं। प्रक्रिया अनूठी नहीं है, राजस्थान में दो ग्राम पंचायतों में वोटिंग के जरिये शराब की दुकान बंद करवाई जा चुकी है। मगर अब आबकारी विभाग ने ऐसे बाकी सभी आवेदनों को रोक लिया है। वजह ये कि विभाग को अब याद आया है कि राजस्थान आबकारी एक्ट के तहत वोटिंग प्रक्रिया के जरिये सिर्फ देशी शराब की दुकानें बंद करवाई जा सकती हैं, कम्पोजिट नहीं। जबकि, सच्चाई ये है कि सिर्फ देशी शराब की दुकान तो किसी भी ग्राम पंचायत में है ही नहीं।अब वोटों से बंद नहीं करा सकेंगे शराब ठेके, हर जिले में विरोध, लेकिन अटक गई वोटिंग

हर जिले में विरोध, लेकिन अटक गई वोटिंग प्रक्रिया…

– विभाग सिर्फ कम्पोजिट दुकानों के लाइसेंस देता है और इन्हें बंद करवाने के लिए एक्ट में आवश्यक संशोधन कभी किया ही नहीं गया। अब विभाग ने सरकार को पत्र लिखकर एक्ट के विषय में स्पष्ट निर्देश मांगे हैं।
– प्रदेश में 40 ग्राम पंचायतों में वोटिंग से शराब दुकान बंद कराने की मांग की जा रही है। सबसे ज्यादा राजसमंद जिले में 10 दुकानों को बंद कराने के लिए वोटिंग की मांग हो रही है। इनमें से 7 को बंद कराने के लिए वोटिंग प्रक्रिया शुरू जा चुकी है, लेकिन अब मामला अटक गया है।
– राजसमंद कलेक्टर प्रेम सिंह बेरवाल के मुताबिक, शराब दुकान बंदी के लिए चुनावी प्रक्रिया कराने के लिए आबकारी आयुक्त की ओर से खत मिला था। हमने उसके अनुसार ही वोटिंग कराई थी।

एक्ट में नियम : देशी शराब ठेके का उल्लेख, कम्पोजिट का नहीं

‘दी राजस्थान एक्साइज (क्लोजर ऑफ कंट्री लिकर शॉप बाय लोकल ऑप्शन) रूल्स, 1975 में लिकर शॉप की परिभाषा में स्पष्ट है कि ये सिर्फ देशी शराब की दुकान के विषय में है। यानी इस नियम के तहत वोटिंग से सिर्फ देशी शराब की दुकान को बंद करवाया जा सकता है, कम्पोजिट शराब दुकान को नहीं।

विभाग की पॉलिसी : शराब ठेके कम्पोजिट दिए जाते हैं

विभाग की अपनी पॉलिसी के मुताबिक किसी भी ग्राम पंचायत में सिर्फ देशी शराब की दुकान का लाइसेंस दिया ही नहीं जाता। हर जगह कम्पोजिट लिकर शॉप का लाइसेंस दिया जाता है, जहां देशी व इंडियन मेड फॉरन लिकर दोनों बेची जाती हैं।

ये है वोटिंग प्रक्रिया : 51% वाेट खिलाफ जरूरी

किसी भी ग्राम पंचायत में शराब ठेका बंद कराने के लिए कलेक्टर के यहां आवेदन किया जाता है। वे मतदान की मंजूरी देते हैं। वोटर लिस्ट में शामिल ग्रामीण इस वोटिंग में भाग लेते हैं। अगर 51 प्रतिशत वोट शराब ठेका बंद करने के पक्ष में डाले जाएं तो ठेका बंद कर दिया जाता है।

एक्ट की सही जानकारी के लिए सरकार को लिखा है : आयुक्त

राजस्थान आबकारी आयुक्त ओपी यादव ने बताया कि एक्ट में देशी शराब दुकानों को वोटिंग से बंद कराने का प्रावधान है। एक्ट से कन्फ्यूजन हो रहा था, इसलिए सरकार को लिखा है कि कंपोजिट दुकानें बंद की जा सकती हैं या नहीं। संशोधन सरकार तय करेगी।

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वोटिंग प्रक्रिया से बंद की गई पहली शराब दुकान कम्पोजिट थी

राजसमंद जिला आबकारी अधिकारी रियाज़ुद्दीन खान ने मामले पर कहा कि राजसमंद जिले में जिन शराब दुकानों को बंद कराने के आवेदन प्राप्त हुए वह सभी कंपोजिट शराब दुकानें हैं। एक को वोटिंग से बंद करा दिया गया।

भास्कर व्यू – पॉलिसी बदली, तोनियम क्यों नहीं बदला

जिस नियम का हवाला देते हुए आबकारी विभाग कंपोजिट दुकानें बंद कर चुका है, अब उसी को लेकर कह रहा है कि इसके तहत सिर्फ देशी शराब ठेके ही बंद हो सकते हैं। आबकारी एक्ट 1950 में 67 साल में करीब 24 से ज्यादा छोटे-बड़े संशोधन हुए। इसी एक्ट के तहत 1975 में देशी शराब ठेकों को वोटिंग से बंद कराने का प्रावधान हुआ। उस समय विभाग देशी शराब के ठेके देता था। बाद में विभाग ने पॉलिसी बदली और सिर्फ कम्पोजिट शराब दुकानों के लाइसेंस देना शुरू कर दिया, लेकिन ठेके बंद कराने का नियम वही पुराना रखा। बड़ा सवाल ये है कि जब पॉलिसी बदली तो नियम क्यों नहीं बदला।
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