पंजाब: बैकों ने जन-धन खाते खोलने का जिम्मा प्राइवेट सेंटर को दिया, 200 लेकर जमा 180 कर रहे
अमृतसर.बैंकों के लिए सिरदर्द बनी केंद्र सरकार की जन-धन योजना अब उपभोक्ताओं से अवैध वसूली का जरिया भी बनने लगी है। बैंकों ने अपना बोझ और खर्च कम करने के लिए इन खातों को खोलने का जिम्मा अधिकृत कस्टमर सर्विस सेंटरों को सौंप दिया है, वहां लोगों से पैसे लिए जा रहे हैं। ये सर्विस प्वाइंट्स सही तरीके से काम कर रहे है या नहीं, इस पर नजर नहीं रखी जा रही, जिसका खामियाजा लोग भुगत रहे हैं। 

इस संबंध में मिली शिकायतों के बाद अमृतसर भास्कर टीम ने शहर के विभिन्न हिस्सों में खोले गए इन सेंटरों में जाकर स्थिति का जायजा लिया तो सेंटरों के मालिक मनमर्जी से खाते खोलने की फीस वसूलते मिले। कोई 200 रुपए लेकर खाते में सिर्फ 160 तो कोई 180 जमा करता पाया गया। दूसरी तरफ बैंकों के आला अधिकारियों का कहना है कि इन सेंटरों को कमीशन के आधार पर खाते खोलने का काम दिया गया है। कमीशन बैंक देगा और वह लोगों से कोई फीस नहीं वसूल सकते।
बैंक वालों ने खाता खोलने से किया इंकार
हरिपुरा वेलफेयर एसोसिएशन के नुमाइंदों खुशपाल शर्मा, सुशांत भगत, यशपाल, पिंटू सिंह आदि ने आरोप लगाया है कि वह लोग हरिपुरा एसबीआई बैंक में जन धन योजना स्कीम का खाता खुलवाने गए तो अधिकारियों ने साफ शब्दों में खाता खोलने से मना कर दिया और बाहर प्राइवेट तौर पर बैंक की तरफ से चलवाए जा रहे कस्टमर सर्विस सेंटर पर जाने की सलाह दी। इन लोगों का कहना है कि बैंक के अधीन उनके इलाके में चल रहे एक सेंटर वाले हरेक खाता खोलने के लिए ग्राहक से 200 रुपए लेते हैं और उसमें से 20 से 40 रुपए काट करके बाकी की रकम जमा करवाते हैं। इन लोगों ने कहा कि हालांकि सरकार ने इस खाते को खोलने के लिए जीरो बैलेंस का प्रावधान रखा था।
बैंक खुद दे रहे कमीशन, फिर भी ग्राहक सेवा केंद्रों पर ली जा फीस
बैंकों ने जिन प्राइवेट लोगों को यह जिम्मा दिया है उन्हें बैंक कलैक्शन के हिसाब से कमीशन देते हैं। कमीशन के चक्कर में सेंटर जीरो बैलेंस का खाता खोलने के लिए 200 रुपए तक वसूल रहे हैं। खुशपाल शर्मा का कहना है कि इस रकम से सेंटर वाले 20 से 40 रुपए काट लेते हैं। अगर कोई पूछता है तो कहते हैं कि यह उनका कमीशन है, हालांकि उनको कमीशन बैंक देता है। उनका आरोप है कि यह दिन-दहाड़े लूट है।
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कस्टमर सर्विस प्वाइंटों पर की जा सकती है कार्रवाई
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की रूलिंग तथा स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के अधिकारियों के मुताबिक जन धन खाता खुलवाते समय सेंटर पैसा जमा करवाने के लिए दबाव नहीं बना सकता और न ही जमा पैसे में से कमीशन ले सकता है। अगर कोई ऐसा करता है तो सही शिकायत मिलने पर उसका लाइसेंस रद्द किया जा सकता। इसी तरह से अगर वह पैसे आदि को लेकर फ्राड करता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है।
प्रधानमंत्री ने इसलिए शुरू की थी यह योजना
पीएम मोदी की महत्वाकांक्षी जन धन योजना का मुख्य मकसद था हर उस गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर नागरिक को बैंकों से जोड़ना, उसमें संचय की प्रवृत्ति पैदा करना और बैंकों को सुदूर गांव और मोहल्लों तक पहुंचाना। यह खाते बिना पैसे के खोले जाते हैं। बैंकों ने भी इसे और सुगम बनाने के लिए अपनी शाखाओं के तहत आते इलाकों मेंं प्राइवेट सेंटर चलाने वालों को इसके लिए मंजूरी दी। माना तो यह भी जा रहा है कि बैंकों ने इस बला को सिर से उतारने और अपने स्टाफ का वर्कलोड कम करने के लिए इस काम को निजी हाथों में दिया। हां, यह बात जरूर रही है कि सेंटर संबंधित बैंक की शाखा से जुड़े होते हैं और सारे काम पर नजर रखी जाती है, लेकिन ऐसा हो नहीं रहा है।





