पंजाब: सुखप्रीत कौर जिंदा है या नहीं, तलाश में जुटी पुलिस इसे लेकर भी संशय में

अमृतसर. गुरुनानक देव यूनिवर्सिटी की असिस्टेंट प्रोफेसर के गायब होने का मामला पुलिस के लिए अभी तक अन सुलझी पहेली बना हुआ है। जिस गैरी विर्क पर उसे किडनैप करने के आरोप लगे थे, वह महाराष्ट्र में सुसाइड कर चुका है। वर्ष 2014 में शादी डाट काम के जरिए सुखप्रीत और गैरी के बीच शुरू हुई दोस्ती चाहे शादी के बंधन तक नहीं पहुंची, लेकिन इसके बावजूद दोनों में लगातार फोन पर बातें होती रहती थीं।पंजाब: सुखप्रीत कौर जिंदा है या नहीं, तलाश में जुटी पुलिस इसे लेकर भी संशय में

मंगेतर को एक साल तक टालता रहा गैरी

उधरगैरी अपनी मंगेतर के साथ भी लगातार फोन पर संपर्क में था, लेकिन उसे शादी के लिए लटका रहा था। वहीं पुलिस लगातार सुखप्रीत कौर को ढूंढने में सर्च कर रही है। मौजूदा समय में भी पुलिस की टीम पंचकूला में जांच कर रही है, क्योंकि पुलिस को शक है कि तीन दिन तक गैरी विर्क पंचकूला में रहा है। ऐसे में उसने सुखप्रीत कौर को मार कर उसकी लाश को वहीं पर ही छिपा दिया हो।

मामला उलझा हुआ है

एडीसीपीलखबीर सिंह ने कहा कि इस समय पूरा मामला उलझ चुका है, क्योंकि जजिंदर सिंह गैरी की मौत हो जाने के बाद उनकी जांच फिर से जीरो पर गई थी। अब किसी तरह सुखप्रीत कौर को ढूंढने की कोशिश की जा रही है। उसके मिलने के बाद ही सारी बात साफ हो पाएगी।

रोपड़,पंचकूला से ब्यास दरिया तक खंगाला

हालां कि मामले में पुलिस कुछ भी स्पष्ट नहीं कर रही है, लेकिन सुखप्रीत जिंदा है या नहीं इसे लेकर भी संशय बना हुआ है। सुखप्रीत ने जब ब्यास में एटीएम से कैश निकलवाया तो गैरी उसके पीछे ही खड़ा था। गैरी पर रोपड़ में एनडीपीएस एक्ट के तहत पर्चा भी दर्ज था, पुलिस को शक है कि कहीं गैरी ने सुसाइड करने से पहले सुभानपुर-ढिलवां क्रास करने के बाद ही सुखप्रीत को जानी नुकसान पहुंचाने की कोशिश की हो। गैरी ने कार में भी अपनी नस काट कर मरने की कोशिश की थी लेकिन बच गया और फिर कमरे में जाकर उसने सुसाइड की। पुलिस इस मामले में रोपड़, पंचकूला, खरड़, सुभानपुर, ब्यास दरिया और आस-पास का इलाका खंगाल चुकी है। गैरी अपने साथ एक और फोन लेकर गया था, जिसे उसने आन ही नहीं किया था। वहीं अपहरण के 15 दिन बाद तक भी सुखप्रीत की ओर से किसी से संपर्क किया जाना भी संदेह को बढ़ा रहा है।
यूनिवर्सिटी के हिंदी विभाग में बतौर असिस्टेंट प्रोफेसर सुखप्रीत ने लेक्चर थियेटर में 11 सितंबर को स्टूडेंट्स का पेपर लिया और डिपोजिट भी करवा कर गईं थी। यूनिवर्सिटी में उनके सहकर्मियों ने उसके व्यवहार में कभी कोई बदलाव भी नहीं देखा था, वहीं एक महिला असिस्टेंट प्रोफेसर के साथ उसकी काफी गहरी दोस्ती थी, लेकिन उसे भी सुखप्रीत ने गैरी के बारे में नहीं बताया था। उसके जीएनडीयू में रोजाना 2 से लेकर 3 तक लेक्चर होते थे।
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