इन नेत्रहीन बुजुर्ग भाई-बहन ने कहा, हम जैसों तक अगर स्कीमें नहीं पहुंचती, हर कोशिश अधूरी है

  • पट्‌टी.पंजाब सरकार की तरफ से गरीब और बिना घर वाले परिवारों को घर बना कर देने और खुले में शौच करने की स्कीम के अंतर्गत घरों में शौचालय बना कर देने की स्कीमों को पास कर रखा है। पंजाब के हर जिले से संबंधित डीसी सिविल प्रशासन के साथ उक्त स्कीमों को लागू करने के लिए तकरीबन हर रोज ही मीटिंगें कर रहे हैं, लेकिन फिर भी बड़े अफसोस की बात है कि उक्त स्कीमें कई बार कई गांवों में फाइलों में पूरी कर दी जाती हैं। जिससे कई जरूरतमंद परिवार सरकार स्कीमों से वांछित ही रह जाते हैं। हम बात कर रहे हैं तहसील पट्टी अधीन पड़ते गांव पूनियां की, जहां पर एक बेहद गरीब परिवार से संबंधित अंधे बहन-भाई को सरकार की किसी भी स्कीम का लाभ प्राप्त नहीं हुआ।
    इन नेत्रहीन बुजुर्ग भाई-बहन ने कहा, हम जैसों तक अगर स्कीमें नहीं पहुंचती, हर कोशिश अधूरी है
    यह गरीब बहन-भाई कच्चे मकान में रह रहे हैं, अभी तक तो उनके घर में किसी ने शौचालय बनवाया है और ही बिजली पीने के पानी का प्रबंध है। आंखों से अंधे सरवन सिंह (60) और उसकी बहन देवा (50) ने बताया कि छोटी आयु में ही उनके सिर से माता-पिता का साया उठ गया। तभी से वह दोनों बहन-भाई एक साथ रह रहे हैं। आज तक किसी भी सरकार जिला प्रशासन ने उनकी सार नहीं ली। इन दोनों भाई-बहन को पेट भरने के पट्‌टी की समाज सेवी संस्था बाबा दीप सिंह चेरिटेबल ट्रस्ट के मुखी गुरमीत सिंह द्वारा हर माह राशन और तन ढक्कने के लिए कपड़े दिए जाते हैं।
    लेकिन जिला प्रशासन और सरकार ने तो उन्हें पक्का घर ही दिया और ही घर में शौचालय बनवा कर दिया। जिस कारण उन्हें मजबूरन खुले में शौच जाना पड़ता है। उन्होंने सरकार से अपील की कि जिले के उच्च अधिकारियों को निर्देश दिए जाएं कि अगर सरकार की स्कीमों को फायदा जरूरतमंदों तक पहुंचाना ही नहीं होता तो सिर्फ दफ्तरों में बैठ कर लोगों को ये स्कीमें मुहैया करवानी की जानकारी भी नहीं दी जानी चाहिए।

    इसे भी देखें:- अब बाबा फलाहारी ने भी वही कहा, जो राम रहीम ने कहा था – मै नपुंसक हूँ, मै रेप कर ही नहीं सकता!

     मुश्किल का हल जल्द होगा: डीसी

    इस परिवार की हरेक मुश्किल का हल जल्द और पहल के आधार पर किया जाएगा। सरकार की सभी स्कीमों पर जरूरतमंद परिवारों का हक है, जिसे देना जरूरी है। -प्रदीपकुमार सभ्रवाल, डीसी, तरनतारन
    दोनों को कहना है कि, वे बुजुर्ग हैं जिससे सरकारी विभागों दफ्तरों में कहीं जा नहीं सकते। ऐसे में अधिकारी-कर्मचारियों ने भी उन तक कभी पहुंच नहीं की, जिससे बड़ी मुश्किल से गुजर-बसर हो रही है।
Back to top button