अध्यात्म और वाइल्ड लाईफ के साथ ऑयल रिग देखना हो तो असम में घूमें ये 5 खुबसूरत शहर


गुवाहाटी
गुवाहाटी असम राज्य की राजधानी है। यह ब्रह्मपुत्र नदी के किनारे बसा, पूर्वोत्तर भारत का मुख्य शहर है। इसे प्राचीन हिंदू मंदिरों के लिए भी जाना जाता है। प्राचीन काल मे गुवाहाटी को प्राग्ज्योतिस्पुर के नाम से जाना जाता था, जो की प्राचीन असम यानि कामरूप की राजधानी थी। गुवाहाटी में कामाख्या मंदिर, नवग्रह मंदिर, उमानन्दा मंदिर, असम जू एवं बॉटनिकल गार्डन्स और पाव मक्का मस्जिद की सैर कर सकते हैं।

जोरहाट
भोगदोई नदी के किनारे बसा जोरहाट असम का महत्वपूर्ण शहर माना जाता है। इसकी स्थापना 18 वीं सदी के अंत में हुई थी। यहां पर चौकीहाट और माचरहाट नाम के दो बाजार हैं। इसी कारण इसका नाम जोरहाट यानि हाटों की जोड़ी रखा गया है। जोरहाट में मुख्य रूप से वैष्णव धर्म को मानने वाले लोग रहते हैं। यहां पर वैष्णव धर्म से जुड़े अनेक मठ और सतरा भी बने हुए हैं। इनमें माजुली वैष्णव धर्म का सबसे बड़ा तीर्थस्थान है। माजुली में वैष्णव धर्म के औनिआती, दक्षिणपथ, गारामूर और कमलाबाड़ी जैसे अनेक तीर्थस्थान हैं। इन तीर्थस्थानों को यहां के लोग सतरा कहते हैं।

तेजपुर
तेजपुर असम राज्य में ब्रह्मपुत्र नदी के उत्तरी किनारे पर स्थित है। पहले तेजपुर को शोणितपुर के नाम से जाना जाता था। तेजपुर एक शांत जगह है और यहाँ पर अनेक उद्यान बने हुए हैं। इन उद्यानों के अलावा यहाँ पर अनेक हिन्दु मंदिर और ऐतिहासिक इमारतें भी हैं। इन ऐतिहासिक इमारतों से अनेक कथाएँ और घटनाएँ जुड़ी हुई हैं। तेजपुर में अग्निगढ़, कोलिया भोमोरा सेतु, पदम पुखुरी, महाभैरव मंदिर, हलेश्वर मंदिर आदि देखने लायक स्थान हैं।

डिगबोई
डिगबोई भारत के असम राज्य के तिनसुकिया जिले के उत्तर पूर्वी हिस्से में स्थित एक छोटा सा नगर है। 19वीं सदी के अंतिम वर्षों में यहां कच्चे तेल की खोज के बाद से डिगबोई को असम की तेल नगरी के रूप में भी जाना जाता है। 1901 में यहाँ एशिया की पहली रिफाइनरी को शुरू किया गया था। डिगबोई में अभी तक उत्पादन करने वाले कुछ सबसे पुराने तेल कुए हैं। यहां डिगबोई तेल शोधनागार के अलावा नामेरी राष्ट्रीय उद्यान, बुरा-चापोरी वन्यजीव अभयारण्य, नागशंकर मंदिर और केतकेश्वर देवल देखने योग्य हैं।

दिफू
दिफू भारत के असम राज्य के पूर्व कर्बी एंग्लोंग जिले का मुख्यालय है। यह छोटा शहर एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल है। दिफू सफेद पानी के लिए इस्तेमाल होने वाला दिमाशा भाषा का शब्द है। इसमें दि मतलब पानी, फु मतलब सफेद, ऐतिहासिक रूप से यह कहा जाता है कि दिफू में बरसात के मौसम में जल धारा बहुत अधिक रेतीली मिट्टी लेकर बहती है जिसके चलते यह सफेद रंग की दिखने लगती है। इसलिए इसका नाम व्हाइट वाटर यानि दिफू है। यहां का बॉटनिकल गार्डन, जिला संग्रहालय, अर्बोरेटम, तरलांगो सांस्कृतिक केंद्र और उमंग दर्शनीय स्थल हैं।





