बठिंडा.गलत ढंग से आटा दाल योजना के तहत कार्ड बनाकर लाभ ले रहे लोगों की पहचान करने के लिए पंजाब सरकार की तरफ से शुरू करवाए सर्वे पर भी डेरा सिरसा मुखी विवाद का असर देखने को मिला। जिस सर्वे को विभाग की तरफ से 31 अगस्त तक पूरा करना था वही अब 10 सितंबर तक पूरा करने का समय तय किया गया है। जिसके पीछे तर्क दिया गया कि पिछले दिनों 24 तारीख के बाद माहौल तनावपूर्ण रहने के कारण सर्वे वाली टीमें घरों में जा नहीं सकी। सर्वे के लिए विभिन्न विभागों के मुलाजिमों की 300 टीमें बनाकर ड्यूटी लगाई गई है।
1.75 लाख में से 18 हजार मिले अयोग्य: आटा दाल कार्डों की वेरिफिकेशन के दौरान जिले में अभी तक 1.75 लाख कार्डों की जांच हो चुकी हैं, जिसमें से 18,182 कार्ड अयोग्य पाए गए हैं। इनमें सबसे ज्यादा कार्ड केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल के हलका बठिंडा डिविजन में मिले। जहां पर 14 हजार कार्ड अयोग्य पाए हैं। वहीं जिले के मौड़ में 1200, रामपुरा में 800 व तलवंडी ब्लॉक में 2100 कार्ड आयोग मिले। जबकि जिले में कुल 2,23,427 कार्ड होल्डर है। जो आटा दाल स्कीम के तहत गेहूं व दाल लेने का फायदा ले रहे हैं।
आटा दाल स्कीम के तहत रामपुरा फूल डिविजन में 339 केस ऐसे मिल हैं, जिनके पास अधिक जमीन है और वह किसी भी प्रकार से आटा दाल स्कीम के दायरे में नहीं आते। इसी प्रकार 185 केस ऐसे हैं जिनकी आमदन ज्यादा है। वहीं लहरा मोहब्बत बिजली घर में भी सेवानिवृत्त हुए कई मुलाजिमों के परिवार स्कीम का लाभ ले रहे हैं। दूसरी तरफ सब डिविजन मौड़ के 1068 परिवार जांच में गैर हाजिर हो गए। जबकि 51 परिवार ऐसे हैं जिनके पास अच्छी जमीन है और 131 परिवारों की आमदन ज्यादा पाई गई है। जबकि तलवंडी साबो में तो कई लोगों के एड्रेस भी गलत निकले हैं। तलवंडी साबो के इलाके में 336 परिवारों की आमदन ज्यादा है, जिनमें ज्यादातर मुलाजिमों के परिवार हैं।
शर्तों को पूरा करना होगा
– परिवार के पास 2.5 एकड़ से ज्यादा की जमीन नहीं होनी चाहिए।
– परिवार की 60 हजार रुपए से ज्यादा की आमदन नहीं होनी चाहिए।
– परिवार में कोई सरकारी नौकरी न करता हो।
– डेली वेज पर काम करना तो ठीक, मगर प्राइवेट जोब भी पक्की नहीं होनी चाहिए।
– घर में एसी व कार नहीं होनी चाहिए।