लखनऊ.यूपी की राजधानी लखनऊ में मंगलवार को योगी आदित्यनाथ ने मेट्रो की शुरुआत कर दी। लखनऊ मेट्रो देश की सबसे तेजी से बनने वाली मेट्रो है। लेकिन इस तेजी के चक्कर में कई सुरक्षा मानकों का ख्याल नहीं रखा गया है। लखनऊ मेट्रो के ट्रैक्स पर कोई बैरिकेडिंग नहीं की गई है जिसकी वजह से इसके सुसाइड पॉइंट में तब्दील होने के चांसेज बढ़ गए हैं। ये हम इस हिसाब से कह रहे हैं कि ऐसा मामले दिल्ली मेट्रो में सामने आ चुके हैं।
दिल्ली मेट्रो बन गया था सुसाइड पॉइंट…
– बता दें, दिल्ली में मेट्रो की शुरुआत साल 2002 में हुई थी। इसके बाद इस सेवा ने विस्तार करते हुए दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में अपने ट्रैक्स बिछा दिए।
– इस सेवा से जहां लोगों को ट्रांस्पोर्टेशन में सहुलियत मिली। वहीं, सुसाइड करने वालों के लिए भी इसके ट्रैक्स फेवरेट पॉइंट बन गए। इसकी वजह थी कि दिल्ली मेट्रो के स्टेशनों पर से ट्रैक पर जाना काफी आसान था। लोगों को रोकने के लिए किसी तरह की बैरिकेडिंग नहीं थी।
– यही वजह रही कि सुसाइड करने वाले लोग ट्रैक्स पर चले जाते थे। जिनमें से ज्यादातर को तो बचा लिया जाता था, लेकिन कई अपनी जान गवां देते थे।
– जब ये मामले बढ़ने लगे तो दिल्ली मेट्रो ने स्टेशन से ट्रैक पर जाने वाले हर रास्ते पर जालियां लगा दी। जिससे ये मामले कुछ कम हुए।
लखनऊ मेट्रो में कहां हो रही है चूक
– 2011-12 में लखनऊ के फ्लाईओवर्स और गोमती पर बने पुल से कूद कर सुसाइड करने के केस बढ़ गए थे। जिसके बाद विधानसभा में काफी हंगामा भी हुआ था। इसपर फ्लाईओवर और पुलों पर बड़ी बड़ी जालियां भी लगाई गई थीं।
– अब कुछ ऐसा ही मामला लखनऊ मेट्रो के ओवरब्रिज पर नजर आ रहा है। ट्रांसपोर्ट नगर स्टेशन से लेकर चारबाग स्टेशन तक कोई भी सुसाइड अटेम्प्ट कर सकता है।
– दरअसल, जहाँ तक मेट्रो खड़ी रहती है उसके आगे पटरी पर कूदने के लिए लगभग 100 मीटर की जगह है। जबकि ओवर ब्रिज से नीचे खुली सड़क भी दिखाई देती है। बैरिकेडिंग काफी नीची है, जिससे कोई भी छलांग लगा सकता है।
दिल्ली मेट्रो में किस साल हुए कितने सुसाइड
#2011- 5
#2012- 9
#2014- 8
#2015- 12
#2016- 11
दिल्ली मेट्रो में किस साल कितने सुसाइड अटेम्प्ट
#2011- 56
#2012- 63
#2014- 45
#2015- 51
#2016- 88
ऐसी घटनाओं को रोका जाएगा: डीजी पीएसी
– डीजी पीएसी ने आरके विश्वकर्मा ने कहा- ”हमारे पीएसी की अलग-अलग यूनिटें हर स्टेशन पर तैनात हैं। प्राइवेट कंपनी के गार्ड भी यहां लगाए गए हैं। सीसीटीवी कैमरे से भी निगरानी रखी जाएगी। हम किसी को सुसाइड नहीं करने देंगे। ऐसी घटनाओं को रोका जाएगा।”
– बता दें, लखनऊ मेट्रो की सुरक्षा का जिम्मा पीएसी को दिया गया है।
दिल्ली मेट्रो में सेप्रेटर्स लगाने के दिए थे सुझाव: डीआईजी सीआईएसएफ
– डीआईजी सीआईएसएफ दिल्ली मेट्रो यूनिट रघुबीर लाल ने बताया- ”हमने दिल्ली मेट्रो को सुझाव दिया है कि जो प्लेटफॉर्म पर सेप्रेटर्स लगे होते हैं वह तभी खोले जाएं जब ट्रेन आ जाए। इसे आटोमेटिक डोर सेपरेटर कहते हैं।
क्राइम एन्ड सिक्योरिटी इंटिलिजेंस यूनिट बनाई है। जिसमें सादे कपड़ों में युवा महिला और पुरुष सिपाहियों को तैनात कर रहे हैं। येलो लाइन पर सीसीटीवी की नजर है। जो भी ट्रैक्स की ओर बढ़ता है उसे ये गार्ड्स रोकते हैं। 2017 में 350 सुसाइड रोक चुके हैं।”