जीएसटी के कारण 50 लाख के फ्लैट पर देना होगा 75 हजार ज्यादा टैक्स

  • जयपुर. गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) व्यवस्था के तहत फ्लैट कम से कम डेढ़ फीसदी महंगे हो गए हैं। दरअसल, जीएसटी से पहले 4.5 फीसदी सर्विस टैक्स लगता था, जबकि अब 12 फीसदी जीएसटी है। हालांकि सरकार ने नई टैक्स व्यवस्था में निर्माण सामग्री पर चुकाए टैक्स के बदले इनपुट क्रेडिट देने का प्रावधान है। जो बिल्डर ग्राहक को देगा। लेकिन इनपुट क्रेडिट के बावजूद फ्लैट खरीदने पर पहले से ज्यादा टैक्स देना होगा। उल्लेखनीय है कि इनपुट क्रेडिट जीएसटी के तहत जमीन की लागत के बदले दी गई छह फीसदी की रियायत से अलग है। जबकि कई बिल्डर इस रियायत को ही इनपुट क्रेडिट बताकर ग्राहकों को भ्रमित कर रहे हैं। सरकार ने जीएसटी के तहत प्रॉपर्टी पर 18 फीसदी टैक्स लगाया है। लेकिन प्रोजेक्ट की लागत में 33 फीसदी हिस्सा जमीन की लागत का मानते हुए सरकार ने प्रॉपर्टी में पर जीएसटी में 6 फीसदी की रियायत दी है। इसके चलते प्रॉपर्टी पर जीएसटी की प्रभावी रेट 12 फीसदी है। एक अनुमान के मुताबिक इनपुट क्रेडिट का फायदा लेने के बावजूद 50 लाख के फ्लैट पर कम से कम 75,000 रुपए टैक्स ज्यादा लगेगा। Due to GST, it will have to pay 75 lakh more on the flat of 50 lakhs.

    क्रेडिट इनपुट में जमीन का मूल्य शामिल नहीं …

    इनपुट क्रेडिट में जमीन का मूल्य के बदले सरकार की ओर से दी गई छह फीसदी रियायत शामिल नहीं है। बिल्डर को भवन निर्माण सामग्री पर इनपुट क्रेडिट मिलेगा। इसको ग्राहकों को पास किया जाएगा। काबिलेगौर है कि केंद्र सरकार ने प्रॉपर्टी पर 18 फीसदी जीएसटी लगाया है। लेकिन अपार्टमेंट की लागत में 33 फीसदी हिस्सा जमीन की लागत का मानते हुए सरकार ने इसके बदले प्रॉपर्टी पर जीएसटी में छह फीसदी रियायत दी है। इस वजह से प्रॉपर्टी पर जीएसटी की प्रभावी रेट 12 फीसदी हो गई।

    फ्लैट महंगे होने का यह है गणित

    – बिल्डरों के मुताबिक फ्लैट की कीमत 4000 रुपए वर्ग फीट है, तो इसमें फ्लैट की निर्माण लागत 1600 रुपए होगी। बिल्डर को इसका ही इनपुट क्रेडिट मिलेगा।
    – जो बिल्डर ग्राहक को पास करेगा। लेकिन फ्लैट की कीमत के शेष बचे हिस्से 2,400 रुपए पर 12 फीसदी जीएसटी यानी 288 रुपए प्रति वर्ग फीट का टैक्स लगेगा।
    – जीएसटी से पहले 4.5 फीसदी के हिसाब 200 रुपए प्रति वर्ग फीट टैक्स लगता था। यानी 4000 रुपए प्रति वर्ग फीट का फ्लैट खरीदने पर 88 रुपए प्रति वर्ग फीट ज्यादा टैक्स चुकाना होगा।
    – मतलब 4000 कीमत वाला फ्लैट 2.4% महंगा होगा। अमूमन लोग 3,000 से 4,000 रु.प्रति वर्ग फीट की रेंज के फ्लैट बिकते हैं। बिल्डरों का कहना है 5000, 6000 अधिक कीमत के फ्लैट्स पर टैक्स की मार ज्यादा पड़ेगी।

    रेरा में रजिस्ट्रेशन से बचने के लिए पुरानी तारीख में करा रहे हैं रजिस्ट्री

    कई फ्लैट खरीदारों ने बताया कि कई बिल्डर अपने प्रोजेक्ट को रेरा में रजिस्ट्रेशन से बचाने के लिए ग्राहकों से चुपचाप मई की तारीखों में पजेशन लेटर पर हस्ताक्षर करा रहे हैं। दरअसल, किसी भी प्रोजेक्ट में यदि 60 फीसदी फ्लैट्स का पजेशन मई तक दे दिया गया है, तो उसको फिर रेरा में रजिस्ट्रेशन कराने की जरूरत नहीं है।

    फ्लैट पर कुल 19% टैक्स

    क्रेडाई की राजस्थान इकाई के अध्यक्ष अनुराग शर्मा का कहना है कि प्रॉपर्टी पर अब कुल 19 फीसदी टैक्स हो गया है। 12 फीसदी जीएसटी, 5 फीसदी स्टांप ड्यूटी, 1 फीसदी रजिस्ट्रेशन शुल्क और एक फीसदी सेस। प्रॉपर्टी पर इतना टैक्स नहीं होना चाहिए। जीएसटी की रेट को भी सर्विस टैक्स के आसपास ही रखने की जरूरत है।

    ज्यादातर प्रॉपर्टी होगी महंगी

    बिल्डर आत्माराम गुप्ता व एन. के गुप्ता का कहना है कि 12% जीएसटी लगाने से प्रॉपर्टी महंगी हो जाएगी। जीएसटी की रेट को भी सर्विस टैक्स के आसपास ही रखनी चाहिए थी। 12 फीसदी जीएसटी से 2,500-3000 रुपए मूल्य के फ्लैट्स की कीमत में ज्यादा अंतर नहीं आएगा, लेकिन महंगे फ्लैट्स पर ज्यादा टैक्स लगेगा। इसके चलते फ्लैट्स 400 रु. प्रति वर्ग फीट तक महंगे होंगे।

    50 लाख रुपए के फ्लैट पर 3 लाख का इनपुट क्रेडिट

    माना कि पांच हजार रुपए वर्ग फीट के हिसाब से एक हजार वर्ग फीट का फ्लैट खरीदा गया। इसकी कीमत 50 लाख रुपए होेगी। बिल्डरों के मुताबिक 50 लाख के फ्लैट औसतन 6 फीसदी इनपुट क्रेडिट मिलेगा। यानी 3 लाख रुपए का इनपुट क्रेडिट मिलेगा, जो बिल्डर आपको देगा। वहीं कुल जीएसटी छह लाख रुपए होगा। यानी इनपुट क्रेडिट माइनस करने के बाद 50 लाख के फ्लैट पर 3 लाख रुपए टैक्स देना होगा। जबकि जीएसटी से पहले 50 लाख के फ्लैट 2.25 लाख रुपए सर्विस टैक्स लगता था। यह भी घ्यान रखे रखे कि इनपुट क्रेडिट में जमीन की लागत पर दी गई 6 फीसदी रियायत शामिल नहीं है।
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