छात्रसंघ चुनावों के लिए वोटिंग पूरी, ABVP और NSUI में सीधा मुकाबला
जयपुर। राजस्थान के सात सरकारी विश्वविद्यालय और 175 सरकारी कॉलेजों में छात्रसंघ चुनाव के लिए मतदान एक बजे खत्म हो गया। वोटिंग सुबह 8 बजे शुरू हुई जो दोपहर एक बजे तक चली। पीएम नरेंद्र मोदी की यात्रा को देखते हुए उदयपुर संभाग को छोड़कर शेष प्रदेश में छात्रसंघ चुनाव मतदान प्रक्रिया पूरी हुई। उदयपुर संभाग में चार सितंबर को मतदान होगा। जयपुर में छात्रसंघ चुनाव में एक हजार पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे। जयपुर सहित सभी कॉलेजों में छिटपुट घटनाओ को छोड़कर मतदान शांतिपूर्वक रहा।

जानिए और इस बारे में…
– डीसीपी कुंवर राष्ट्रदीप ने बताया कि जयपुर में मतदान शांतिपूर्वक हुआ। यहां सुरक्षा के व्यापक बंदोबस्त किए गए थे। शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए एक हजार पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे।
अजमेर : अजमेर में छात्रों के दो गुटाें में मामूली झड़प हुई। हालांकि पुलिस ने हल्का बल प्रयोग कर छात्रों को तितर-बितर कर दिया।
भीलवाड़ा : भीलवाड़ा के एमएलवी कॉलेज में भी छात्रों के दो गुट झगड़ पड़े। उन्हें हटाने के लिए पुलिस ने हल्का बल प्रयोग किया|
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यह होगा इन व्यवस्थाओं का असर
– इस बार विश्वविद्यालयों के पीजी डिपार्टमेंट्स या शिक्षण केंद्रों के लिए वोट नहीं पड़ेंगे। इनमें पढ़ने वाले छात्र सिर्फ विश्वविद्यालय छात्रसंघ के लिए ही वोट डाल सकेंगे। डिपार्टमेंट्स और शिक्षण केंद्रों में बगैर वोटिंग के कक्षा प्रतिनिधि का चुनाव कराया जाएगा।
असर : पिछली बार से वोट प्रतिशत घटेगा।
कैंपस में प्रत्याशियों को अस्थाई टैंट : प्रत्याशियों के चुनाव प्रचार के लिए पहली बार पॉलिसी बनी कि कैंपस में चुनाव प्रचार हो। प्रत्याशियों को अस्थाई टैंट देने का प्रावधान जोड़ा गया। कार्रवाई भी हुई।
असर : जिन पर कार्रवाई हुई वे छात्रनेता एबीवीपी और राज्य सरकार के इशारे पर कार्रवाई को बताकर मतदाताओं से सहानुभूति बटोर रहे हैं।
शोध प्रतिनिधि के चुनाव पहली बार : कई विश्वविद्यालयों में शोध प्रतिनिधि के चुनाव पहली बार होंगे। हालांकि राजस्थान विवि सहित कुछ विश्वविद्यालय में शोध प्रतिनिधि के चुनाव हो रहे हैं।
असर : इससे रिसर्च का प्रतिनिधित्व सामने आएगा और रिसर्च से जुड़े डवलपमेंट के लिए कामकाज को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
प्रचार के लिए 12 दिन : चुनाव घोषणा से मतदान तक इस बार प्रत्याशियों और विश्वविद्यालयों को 12 दिन मिले। इसमें 5 छुट्टियां रही। प्रत्याशियों को छात्रों के बीच जाकर प्रचार का समय नहीं मिला।
असर : चुनावी हंगामों से आम छात्र को फायदा हुआ। प्रत्याशियों को भी ज्यादा मशक्कत नहीं करनी पड़ी।
लिंगदोह के पालन के लिए पहली बार जिम्मेदारी : सरकार ने चुनावों में लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों के पालन के लिए पहली बार जिम्मेदारी तय की। प्रत्येक विश्वविद्यालय और कॉलेजों में डीएसडब्ल्यू या चुनाव संयोजक को इसकी व्यक्तिगत जिम्मेदारी दी गई है।
असर: यूनिवर्सिटी या कॉलेजों के अधिकारी और जिम्मेदारी से काम रहे हैं।
कैंपस में प्रत्याशियों को अस्थाई टैंट : प्रत्याशियों के चुनाव प्रचार के लिए पहली बार पॉलिसी बनी कि कैंपस में चुनाव प्रचार हो। प्रत्याशियों को अस्थाई टैंट देने का प्रावधान जोड़ा गया। कार्रवाई भी हुई।
असर : जिन पर कार्रवाई हुई वे छात्रनेता एबीवीपी और राज्य सरकार के इशारे पर कार्रवाई को बताकर मतदाताओं से सहानुभूति बटोर रहे हैं।
शोध प्रतिनिधि के चुनाव पहली बार : कई विश्वविद्यालयों में शोध प्रतिनिधि के चुनाव पहली बार होंगे। हालांकि राजस्थान विवि सहित कुछ विश्वविद्यालय में शोध प्रतिनिधि के चुनाव हो रहे हैं।
असर : इससे रिसर्च का प्रतिनिधित्व सामने आएगा और रिसर्च से जुड़े डवलपमेंट के लिए कामकाज को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
प्रचार के लिए 12 दिन : चुनाव घोषणा से मतदान तक इस बार प्रत्याशियों और विश्वविद्यालयों को 12 दिन मिले। इसमें 5 छुट्टियां रही। प्रत्याशियों को छात्रों के बीच जाकर प्रचार का समय नहीं मिला।
असर : चुनावी हंगामों से आम छात्र को फायदा हुआ। प्रत्याशियों को भी ज्यादा मशक्कत नहीं करनी पड़ी।
लिंगदोह के पालन के लिए पहली बार जिम्मेदारी : सरकार ने चुनावों में लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों के पालन के लिए पहली बार जिम्मेदारी तय की। प्रत्येक विश्वविद्यालय और कॉलेजों में डीएसडब्ल्यू या चुनाव संयोजक को इसकी व्यक्तिगत जिम्मेदारी दी गई है।
असर: यूनिवर्सिटी या कॉलेजों के अधिकारी और जिम्मेदारी से काम रहे हैं।





