अजमेर बन रहा अवैध हथियारों की सबसे बड़ी मंडी, 8 हजार में मिल जाती है पिस्टल

  • अजमेर.अवैध हथियारों की खरीद-फरोख्त के मामले में राजस्थान में भरतपुर, अलवर शहर बदनाम रहे हैं, लेकिन पिछले पांच साल में अजमेर इस क्षेत्र में सिरमौर बन गया है। सिर्फ पिछले सात महीने में ही अजमेर में 23 देशी पिस्टल, रिवाल्वर और माउजर बरामद किए गए हैं। लेकिन चौंकाने वाला तथ्य यह है कि अवैध हथियार सहित पकड़े गए लोगों से हथियारों का कारोबार करने वाले गिरोह के नेटवर्क को खंगालने में पुलिस नाकाम साबित हुई है।
    अजमेर बन रहा अवैध हथियारों की सबसे बड़ी मंडी
    नतीजतन पिछले दो साल में अवैध हथियारों से फायर के छह और हत्याओं के तीन वारदात हो चुकी है। अब तक पकड़े गए हथियारों के मामलों में यह सामने आया है कि नोएडा के कुख्यात कसमू और बिहार के मुंगेर में बने हथियार अजमेर में पकड़े गए हैं। पंजाब से गुजरात हो रही शराब तस्करी, प्रोपर्टी कारोबार में आपराधिक गिरोह की लिप्तता और अन्य आपराधिक गतिविधियों के चलते अजमेर अवैध हथियारों का बाजार बनता जा रहा है।

    राजस्थान में बढ़ी अवैध हथियारों की सौदेबाजी

    अवैध फायर आर्म्स की सौदेबाजी के मामले में बिहार, यूपी आैर एमपी को अब राजस्थान पीछे छोड़ने लगा है। राज्य पुलिस के लिए यह चिंता का विषय है। अवैध हथियारों के मामलों में सजा का प्रतिशत देखें तो विगत पांच सालों में यह घटता जा रहा है। इन दिनों अजमेर में सर्वाधिक अवैध हथियार पकड़े जा रहे हैं। पिछले दिनों ही एटीएस ने कार्रवाई कर दो युवकों से 4 पिस्टल, 8 मैग्जीन आैर एक देशी कट्टा बरामद किया था। इसके दो दिन बाद ही पुलिस थाने के बाहर अवैध हथियार छिपाने वाले शातिर को पुलिस ने पकड़ा था, उसने यूनिवर्सिटी के छात्र से अवैध हथियार खरीदना कबूल किया।

    सबसे ज्यादा हथियार पकड़े अलवर गेट थाना पुलिस ने

    इस साल सात माह के पुलिस रिकाॅर्ड के अनुसार जिलेभर में 23 मामलों में पुलिस ने अवैध हथियार बरामद किए हैं। सबसे ज्यादा 12 पिस्टल और रिवाल्वर अलवर गेट थाना पुलिस ने पकड़े हैं। थाना प्रभारी हरिपाल सिंह के अनुसार जनवरी 2017 से अब तक एकता नगर निवासी सलमान उर्फ कालिया, सांवतसर निवासी रामस्वरूप उर्फ गजनी, पींगलोद निवासी जीतू काकट, हिम्मतसिंह, बबलू सिंह, लाडपुरा निवासी रोहिताश, चंद्रवरदाई नगर निवासी फजलूद्दीन, बड़लिया निवासी हिम्मत सिंह और खेड़ा भीलवाड़ा निवासी हुसैन से अवैध देशी पिस्टल, माउजर बरामद किए गए हैं। इसके अलावा कुख्यात आनंदपाल सिंह फरारी मामले में खुलासा हुआ था कि हिस्ट्रीशीटर धर्मेंद्र चौधरी उसे हथियार सप्लाई करता रहा था। हिस्ट्रीशीटर केसरसिंह, धनसिंह और अन्य कुख्यात अपराधियों से हथियार बरामद किए जा चुके हैं।

    एमपी के धार, देवास इलाकों में हैं अवैध हथियारों की फैक्ट्रियां

    विभिन्न आपराधिक मामलों की तफ्तीश में खुलासा हुआ है कि अवैध हथियारों की सप्लाई मध्यप्रदेश के धार, खरगौन, देवास इलाकों से और यूपी के इटावा, अलीगढ़ क्षेत्रों से हुई है। हालांकि आरोपियों के बयान के आधार पर पुलिस अवैध हथियार बनाने और सप्लाई करने वालों के नेटवर्क को खंगाल नहीं सकी है, लेकिन जांच के नाम पर हर मामले में पुलिस दल एमपी और यूपी भेजे गए थे।

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    कसमू ब्रांड से बिकते हैं अवैध रिवाॅल्वर

    हाल ही के वर्षों में दिल्ली पुलिस ने कई ऐसे अपराधी पकड़े जिनके पास ‘कसमू के कट्टे’ बरामद हुए। ये सस्ते देशी कट्टे कसमू की फैक्ट्री में बने होते थे। कसमू अपराध की दुनिया का एक जाना-माना नाम हो गया था। दिल्ली पुलिस उसकी लंबे समय से तलाश कर रही थी। आखिरकार पिछले महीने पुलिस ने गाजियाबाद के लोनी इलाके में उसकी अवैध हथियारों की फैक्ट्री का भंडाफोड़ कर बड़ी मात्रा में अवैध हथियार और कारतूस बरामद किए थे। सामने आया था कि राजस्थान, हरियाणा, महाराष्ट्र में भी इस फैक्ट्री से हथियारों की सप्लाई थी। दिल्ली पुलिस ने अवैध हथियारों की फैक्ट्री चलाने वाले कसमुद्दीन और उसके 2 साथियों अजय और हाशिम को गिरफ्तार किया था।

    8 हजार रुपए में मिल जाती है मुंगेर की पिस्टल

    देश भर में जहां भी अवैध हथियारों की बरामदगी हुई है, वहां बिहार के मुंगेर का नाम जरूर आता है। पांच साल के दौरान अजमेर में आपराधिक गिरोह के लोगों से पकड़े गए अवैध हथियारों में सबसे ज्यादा मुंगेर निर्मित पाए गए हैं। देसी कट्टे, बंदूक एवं राइफल से लेकर अत्याधुनिक पिस्टल, कारबाइन और एके-47 तक मुंगेर में बनाई जा रही हैं। मेड इन इंग्लैंड, मेड इन अमेरिका, मेड इन जापान अंकित इन अत्याधुनिक हथियारों की क्वालिटी ऐसी होती है कि असली और नकली में कोई फर्क नजर नहीं आता। लिहाजा देशभर में आपराधिक गिरोह में मुंगेर निर्मित हथियारों की मांग बढ़ती जा रही है। यही वजह है कि अवैध हथियार मुंगेर की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन चुके हैं। एक अनुमान के मुताबिक, यहां प्रतिदिन अवैध हथियारों का कारोबार लगभग 22 से 25 लाख रुपए का होता है। जहां एक तरफ लाइसेंसी पिस्टल खरीदने के लिए करीब 80 हजार रुपए खर्च करने की जरूरत पड़ती है वहीं मुंगेर में बने पिस्टल की कीमत ज्यादा से ज्यादा 8 हजार ही होती है।

    हथियार तस्करों के नेटवर्क की तह तक पहुंचेंगे

    राज्य में अजमेर, अलवर, भरतपुर और झालावाड़ इलाकों में सबसे ज्यादा अवैध हथियार पकड़े गए हैं, तफ्तीश में सामने आया है कि हथियार एमपी के खरगौन और यूपी से आरोपियों को मिले थे। अजमेर में पिछले सात महीने में आर्म्स एक्ट के तहत बड़ी संख्या में कार्रवाई की गई है। अवैध हथियारों की सप्लाई करने वालों के नेटवर्क को खंगालने और मुख्य सप्लायर को पकड़ने के लिए प्राथमिकता से काम किया जा रहा है। -राजेंद्र सिंह चौधरी, एसपी

    वारदात-दर-वारदात

    – प्रोपर्टी को लेकर रंजिश के मामले में रोडवेज बस स्टैंड पर करीब पांच साल पहले कांग्रेस नेता महेंद्र चौधरी पर हिस्ट्रीशीटर धर्मेंद्र चौधरी ने सरेआम फायरिंग कर दहशत फैलाई थी।
    – जमीन के विवाद में अजमेर क्लब के सामने विक्रम शर्मा व धर्मेंद्र चौधरी गिरोह के लोगों के बीच फायरिंग हुई थी।
    – हिस्ट्रीशीटर धर्मेंद्र चौधरी और रामकेश मीना की हत्या सरेआम अवैध हथियार से फायर कर की गई, दोनों ही मामलों में आरोपियों से पुलिस ने अवैध हथियार बरामद किए।
    – तत्कालीन सीआई प्रमोद स्वामी के कार्यकाल के दौरान क्लॉक टावर थाना पुलिस ने बड़ी संख्या में अवैध हथियार पकड़े थे। इनमें से ज्यादातर देशी कट्टे यूपी से लाए गए थे।
    – आपसी रंजिश के चलते रेलवे स्टेशन परिसर में मनीष राजौरिया ने हेमंत भाटी पर देशी कट्टे से फायरिंग की थी। जीआरपी ने राजौरिया को कट्टे सहित गिरफ्तार किया था।
    – कोतवाली थाना परिसर में हथियार छिपाने वाले शातिर साजिद को पुलिस ने अवैध हथियार सहित गिरफ्तार
    किया था।
    – एटीएस ने एमपी से 4 पिस्टल, देशी कट्टा आैर 8 मैग्जीन लाने वाले शातिर दो युवकों को गिरफ्तार किया था। हथियार सप्लाई करने के लिए लाए गए थे। पिस्टल पर यूके मार्का था।
    – कॉलेज छात्र से पकड़ा गया अवैध हथियार, जांच में सामने आया कि यूपी से खरीदकर लाया था।
    – एक पुलिसकर्मी के पुत्र व होटल संचालक युवक से अवैध माउजर की बरामदगी की गई थी।

    ये हैं आर्म्स एक्ट की धाराएं

    क्या है धारा 4/25 | इसमें 6 माह की सजा आैर 500 रुपए का जुर्माने के प्रावधान है। सजा आैर जुर्माना दोनों भी हो सकते हैं।
    आर्म्स एक्ट की धारा 27 | इसमें 3 से 7 साल की सजा का प्रावधान है। यदि प्रतिबंधित हथियार जैसे एके-47 आदि पकड़े जाते हैं तो इसमें आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान भी है।
    धारा 25 (1) (कक) में होनी चाहिए कार्रवाई | इसमें सीधे आजीवन कारावास का प्रावधान है, आैर जुर्माना भी वसूला जा सकता है। सजा आैर जुर्माना दोनों भी हो सकता है। जिला पुलिस यदि इस धारा में कार्रवाई करे तो अवैध हथियारों के सौदागरों पर शिकंजा कस सकता है।
    अवैध फायर वैपन के साथ पकड़े गए बदमाशों के खिलाफ ज्यादातर जिला पुलिस आर्म्स एक्ट की धारा 4/25 व 27 के तहत कार्रवाई करती है। हालांकि पुलिस मुख्यालय से सभी थानों को दिशा-निर्देश हैं कि अवैध हथियारों के सौदागरों के खिलाफ सख्त से सख्त धाराआें में कार्रवाई करें।
     
     
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