घुटने बदलवाना हुआ सस्ता, 1.50 लाख का ऑपरेशन अब 54,720 रु. में

  • नई दिल्ली/जयपुर.प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण के अगले ही दिन घुटना बदलना 70 फीसदी तक सस्ता हो गया है। दरअसल, सरकार ने घुटना बदलवाने के दौरान होने वाली ‘लूट’ पर लगाम कसते हुए बुधवार को इसकी अधिकतम कीमतें तय कर दी। अब घुटने के ऑपरेशन में लगने वाले उपकरणों की अधिकतम कीमत 1.14 लाख रुपए तक होगी। पहले सबसे कम खर्च करीब डेढ़ लाख रुपए था, जो अब करीब 55 हजार रुपए होगा। हालांकि इन पर जीएसटी अलग से देना होगा। नई कीमतें तुरंत प्रभाव से लागू हो गई हैं।
     घुटने बदलवाना हुआ सस्ता, 1.50 लाख का ऑपरेशन अब 54,720 रु. में
    रसायन एवं उर्वरक मंत्री अनंत कुमार ने बताया कि नेशनल फार्मा प्राइसिंग आथरिटी (एनपीपीए) ने घुटना बदलवाने के दौरान की जाने वाली ‘लूट’ को रोकने के लिए इन उपकरणों का मूल्य नियंत्रित कर दिया है। स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री ने कहा था कि सरकार घुटने की सर्जरी की कीमत तय करने के उपायों पर काम कर रही है। इससे पहले सरकार ने फरवरी में हार्ट पेशेंट के लिए स्टेंट की कीमतें भी नियंत्रित की थी।

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    बड़ा सवाल …क्या कंपनियां और अस्पताल घुटने टेकेंगे

    बड़ा सवाल है कि सरकार ने कीमतें तो तय कर दी, लेकिन क्या बड़े अस्पताल मरीजों तक इसका फायदा पहुंचने देंगे। भास्कर ने हाल ही स्टिंग किया था। उसमें खुलासा किया था कि हार्ट स्टेंट की कीमतें तय किए जाने के बाद भी ओटी चार्ज, सर्जन फीस और अन्य सुविधाओं के नाम पर पहले जितनी ही राशि वसूली जा रही है।
     
    विशेषज्ञों का कहना है कि नी-रिप्लेशमेंट की दरें तय होने से कीमतों में कमी तो आएगी, लेकिन जो बड़े सेंटर पहले से मोटा खर्च वसूलते हैं, वो दरें कम करने के बजाए ओटी चार्ज, सर्जन फीस, स्टे का पैकेज बढ़ा देंगे। ऐसे में राज्य सरकार को आगे आकर दरें कम करने की पहल करनी होगी। असिस्टेंट ड्रग कंट्रोलर दीवाकर पटेल व डॉ. प्रवीण मंगलूनिया ने कहा कि अब सरकार को कैंसर, आंखों के लैंस, ऑर्थोपेडिक्स इंप्लांट के साथ नेफ्रोलॉजी के बढ़े हुए इलाज को भी कीमतें तय कर सस्ता करने की जरूरत है।
     
    449 फीसदी तक मुनाफा कमा रहे हैं हॉस्पिटल और अन्य
    सूत्रों के मुताबिक नेशनल फार्मा प्राइसिंग आथरिटी (एनपीपीए) का मानना है कि घुटने के ट्रांसप्लांट के ऑपरेशन में जुड़े हॉस्पिटल, इम्पोर्टर और डिस्ट्रिब्यूटर 449 फीसदी तक मुनाफा कमा रहे हैं। इसमें इंपोर्टर्स को करीब 76 फीसदी और डिस्ट्रीब्यूटर को करीब 135 फीसदी तक का फायदा होता है। इन सबका बोझ मरीज की जेब पर पड़ता है। ऐसे में कई मरीज घुटने का ऑपरेशन नहीं करवा पाते हैं।
     
    जयपुर में हर माह 150-170 तक सर्जरी, अब संख्या बढ़ेगी
     
    जयपुर के 5-6 बड़े सेंटर फोर्टिस, नारायणा, ईचसीसी, मणिपाल, दुर्लभजी, खंडाका आदि में घुटने बदले जाते हैं। यहां प्रतिमाह औसतन 150-170 तक सर्जरी होती हैं।
     
    बड़े सेंटर पर एक नी-रिप्लेसमेंट के पैकेज में 3 से 4 लाख रु. तक वसूले जाते हैं। खंडाका अस्पताल के डॉ. अशोक खंडाका, फोर्टिस अस्पताल के डॉ. अनूप जूरानी, ईचसीसी के डॉ. राजीव भार्गव कहते हैं कि घुटनों के मरीज बढ़ रहे हैं, लेकिन बदलवाने को लेकर अव्वल तो जानकारी नहीं है, वहीं इलाज की कई भ्रांतियां और कीमतों को लेकर भी असमंजस रहता है। अब कीमतें तय होने से स्पष्टता बढ़ेगी और दर्द से कराहने वाले इलाज के लिए आगे आएंगे।
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