आतंकी अब्दुल्लाह को भेजा पांच दिन की रिमांड पर, दूसरे आतंकियों को पनाह देने की बात कबूली

आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) के हत्थे चढ़े बांग्लादेशी आतंकी अब्दुल्लाह को मंगलवार को विशेष सीजेएम, कस्टम की अदालत में पेश किया गया। उसे ट्रांजिट रिमांड पर मुजफ्फरनगर से लखनऊ लाया गया है। विशेष सीजेएम छवि सक्सेना ने अब्दुल्लाह को पांच दिन के कस्टडी रिमांड पर एटीएस के सुपुर्द कर दिया।

आतंकी अब्दुल्लाह को भेजा पांच दिन की रिमांड पर, दूसरे आतंकियों को पनाह देने की बात कबूली

इस मामले में विवेचक पुलिस उपाधीक्षक हृदेश कठेरिया ने कोर्ट में दलील दी कि बांग्लादेशी आतंकी से अन्य लोगों के बारे में भी जानकारी जुटानी है। साथ ही फैजान के बारे में और तफ्सील जाननी है। इसलिए 10 दिन के रिमांड की जरूरत है। लेकिन विशेष सीजेएम ने पांच दिन का रिमांड मंजूर करते हुए अब्दुल्लाह को एटीएस के सुपुर्द कर दिया।

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शुरुआती पूछताछ में अब्दुल्लाह ने बताया कि वह बांग्लादेश से आने वाले अंसारुल्लाह बांग्ला टीम (एबीटी) के दूसरे आतंकियों को भी पनाह देता रहा है। एटीएस यह जानकारी जुटा रही है कि अब तक उसके पास कौन-कौन आतंकी आकर ठहरे और वे कहां गए? सूत्रों का दावा है कि अब्दुल्लाह के कुछ साथी भारत में फर्जी पासपोर्ट बनवाकर सीरिया और इराक भी जा सकते हैं। उसने एटीएस को ऐसे छह लोगों के नाम बताए हैं जो अलग-अलग समय पर आकर उसके घर ठहर चुके हैं।

10 हजार रुपये लेकर वकील ने बनवाया पासपोर्ट

एटीएस की पूछताछ में अब्दुल्लाह ने खुलासा किया है कि उसका पासपोर्ट 10 हजार रुपये की रिश्वत देकर बना था। यह रिश्वत उसने एक वकील को दी थी। अब एटीएस उस वकील को तलाश रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आखिर किस तरह से पासपोर्ट बनवाया गया और वह वकील कौन था? उस वकील ने और किस-किसके पासपोर्ट रिश्वत लेकर बनवाए?
 
फर्जी आईडी बनाने का काम करता था फैजान
आईजी एटीएस ने बताया कि फैजान की तलाश जारी है। उसके कुछ नंबरों का पता चला है। अब्दुल्लाह ने भी बताया है कि फर्जी आईडी बनाने का काम फैजान ही करता था। वह फोटोशॉप और कंप्यूटर का जानकार बताया जा रहा है। अब्दुल्लाह ने यह भी जानकारी दी है कि फैजान के पास दो लैपटॉप है, जिसे वह हमेशा अपने पास रखता था।

एटीएस को फैजान के कमरे से बांग्ला भाषा में लिखा एक पत्र भी मिला है। इसमें यूपी में कुछ टारगेट निर्धारित किए गए हैं जिसमें आगरा और मुजफ्फरनगर का जिक्र है। फिलहाल इस पत्र को समझने के लिए बांग्ला भाषा के जानकारों की मदद ली जा रही है। उसके कमरे से बांग्ला भाषा में लिखे कुछ पैंफलेट भी मिले हैं। एटीएस को फैजान के दो बैंक खातों के बारे में भी पता चला है।

 
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