पूर्व सीएम के भाई ने बेच दिया मकान, शिकायत करने पर म्यूटेशन खारिज

पूर्व मुख्यमंत्री एनडी तिवारी का मकान बगैर उनकी इजाजत के उनके भाई रमेश चंद्र तिवारी ने बेच दिया। यह मकान अलीगंज में अलीगंज है। यही नहीं एलडीए ने दो महीने पहले खरीदार ऊषा शर्मा के पक्ष में इसका म्यूटेशन भी कर दिया। मामला सामने आने पर पूर्व सीएम ने इसकी शिकायत एलडीए में की तो म्यूटेशन खारिज कर दिया गया।

पूर्व सीएम के भाई ने बेच दिया मकान, शिकायत करने पर म्यूटेशन खारिज

एलडीए के रिकॉर्ड के मुताबिक बल्क सेल में अलीगंज योजना के सेक्टर-एफ में कुछ प्लॉट एक निजी सोसाइटी को बेचे गए थे। नरेंद्रनगर को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी को दिए भूखंडों में से एक की रजिस्ट्री एनडी तिवारी के नाम पर भी की गई। एनडी तिवारी इस सोसाइटी के सदस्य थे। इस पर मकान का निर्माण भी हो चुका है। ऊषा शर्मा को अगस्त 2016 में पावर ऑफ अटॉर्नी का उपयोग कर बेचा गया। 2017 में इसका म्यूटेशन भी रजिस्ट्री हो जाने को आधार बनाकर एलडीए ने कर दिया।

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पंजीकृत नहीं है पावर ऑफ अटॉर्नी
एलडीए के ओएसडी राजेश शुक्ला ने बताया कि पूर्व मुख्यमंत्री ने अपनी शिकायत में कहा कि उनकी संपत्ति को गलत पावर ऑफ अटॉर्नी का उपयोग कर बेचा गया है। यह पावर ऑफ अटॉर्नी उनके भाई रमेश चंद्र तिवारी के नाम पर बताई गई। रजिस्ट्री और म्यूटेशन के लिए इस्तेमाल हुई पावर ऑफ अटॉर्नी गैर पंजीकृत है। इसकी वैधता की जांच कराई जा रही है। रजिस्ट्री के विवाद पर सोसाइटी और आवंटी को खुद मिलकर फैसला लेना होगा। रजिस्ट्री पर कार्रवाई निबंधन कार्यालय से ही होगी।

कानूनी वैधता की करानी होगी जांच
क्या गैर पंजीकृत पावर ऑफ अटॉर्नी वैध है, इसकी वैधानिकता पर एलडीए को जांच करानी होगी। जानकारों का कहना है कि 2003 से पहले बिना पंजीकृत पावर ऑफ अटॉर्नी का उपयोग किया जा रहा था। इसकी वैधता से ही तय होगा कि म्यूटेशन और रजिस्ट्री करने वाले अफसरों और स्टाफ ने गलती की है या नहीं।

 

 

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