जिंदगी की जंग में महिलाएं अव्वल, 4 साल में महिलाओं से पुरुषों के 3 गुना ज्यादा सुसाइड

  • जयपुर.महिला-पुरुष लिंगानुपात के मामले में चाहे प्रदेश के हालात कितने ही चिंताजनक क्यों न हों, जिंदगी की जंग में उन्होंने पुरुषों को काफी पीछे छोड़ दिया है। पिछले चार साल में प्रदेश में हुई आत्महत्या के मामलों पर नजर डालें, तो पुरुषों की संख्या महिलाओं से तीन गुना ज्यादा है। पिछले चार साल में प्रदेश में 12 हजार 136 पुरुषों ने आत्महत्या की जबकि इस दौरान आत्महत्या करने वाली महिलाओं की संख्या 4664 रही। हर साल महिलाओं के खुदकुशी के आंकड़े कम हो रहे हैं जबकि पुरुषों के बढ़ रहे हैं। आत्महत्या के आंकड़ें बताते हैं कि विकट हालातों में भी महिलाएं जिंदगी से हार मारने की जगह, जिंदगी की डोर थामना पसंद करती हैं। जिंदगी जंग में महिलाओं के मुकाबले पुरुष पिछड़ रहे हैं।
    जिंदगी की जंग में महिलाएं अव्वल, 4 साल में महिलाओं से पुरुषों के 3 गुना ज्यादा सुसाइड
     
    कम हैं लेकिन कमजोर नहीं महिलाएं
    प्रदेश में प्रति एक हजार पुरुषों के मुकाबले महिलाओं की संख्या 74 कम है लेकिन आत्महत्या के मामले में पुरुषों की संख्या महिलाओं से तीन गुना ज्यादा है। 2011 की जनगणना के अनुसार राज्य की कुल जनसंख्या में पुरुषों का हिस्सा 51.92 प्रतिशत है और महिलाओं की हिस्सेदारी 48.07 प्रतिशत है। पिछले चार साल में राजस्थान में 16 हजार 782 आत्महत्याएं हुई हैं जिनमें पुरुषों की संख्या 72 प्रतिशत रही है। इस दौरान आत्महत्या करने वाली महिलाओं की संख्या 4646 यानि 27 प्रतिशत रही है।

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    कानून भी नहीं रोक पा रहा
    देश में बढ़ती आत्महत्याओं को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने वर्ष 2013 में मानसिक स्वास्थ्य सुविधा विधेयक 2013 पारित किया। इसके बावजूद विश्व की 17 प्रतिशत आत्महत्या भारत में होती हैं। विश्व में हर साल करीब आठ लाख लोग आत्महत्या करते हैं, भारत में सालाना एक लाख 35 हजार लोग जिंदगी की जंग हार जाते हैं। देश में हर साल जितनी आत्महत्याएं होती हैं उनमें राजस्थान की संख्या करीब तीन प्रतिशत है।

     
    आत्महत्या के कारण
    आत्महत्या की घटनाओं के पीछे मानसिक अवसाद, पारिवारिक कलह, आर्थिक तंगी, संबंधों की नाकामी, घरेलू हिंसा, दहेज विवाद, आर्थिक या शारीरिक शोषण और नशे की लत प्रमुख वजह है।
     
    सात साल में की 2800 किसानों ने खुदकशी
    वर्ष 2008 से लेकर 2017 तक राजस्थान में खुदकशी करने वाले किसानों की तादाद 2800 से ज्यादा रही है। राज्य सरकार के आकड़ों के अनुसार प्रदेश में किसानों ने सबसे ज्यादा आत्महत्या 2008 से लेकर 2013 तक के कार्यकाल में हुई हैं। इस दौरान किसानों की खुदकशी की 2867 घटनाएं हुई। इनकी प्रमुख वजह पारिवारिक कलह और आर्थिक तंगी थी।
     
    दायित्वों से महिलाएं मानसिक रूप से मजबूत
    महिलाओं को विरासत में मिले पारिवारिक दायित्व उन्हें मानसिक रुप से मजबूती प्रदान करते हैं। पिछले कुछ वर्षों में स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार जैसी सामाजिक सुरक्षा काफी कमजाेर हुई है जिसके कारण आत्महत्याओं की घटनाओं में इजाफा हुआ है। प्रो. राजीव गुप्ता, समाजशास्त्री
     
    आत्महत्या के पीछे जिम्मेदारी का बोझ
    आत्महत्या के पीछे सोशल स्ट्रक्चर कमजोर होना बड़ा कारण है। पुरुष को परिवार का पोषक माना गया है, जिम्मेदारी का बोझ भी ज्यादा उसी पर रहता है, इसी वजह से पुरुषों में आत्महत्या के मामले भी ज्यादा हैं। -प्रो. एवीएस मदनावत, मनोवैज्ञानिक, राजस्थान विश्वविद्यालय
     
     
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