8th Pay Commission के 6 महीने पूरे, सैलरी-पेंशन बढ़ने में बचे इतने दिन

सैलरी और पेंशन बढ़ने का इंतजार कर रहे केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए बड़ी खुशखबरी है। आठवें वेतन आयोग (8th Pay Commission) की प्रक्रिया अब धीरे-धीरे रफ्तार पकड़ रही है। 3 मई 2026 को आयोग के गठन के 6 महीने पूरे हो चुके हैं और अब भी लगभग 12 महीने का काम बाकी है। यानी आज से ठीक 1 साल के भीतर आठवां वेतन आयोग अपनी आधिकारिक रिपोर्ट सौंप सकता है।

अगर हम पिछले 6 महीने का रिव्यू करें तो अप्रैल-मई 2026 के बीच कई अहम कदम उठाए गए हैं, जो आगे वेतन संशोधन की दिशा तय करेंगे। अब सवाल यह कि आयोग के गठन की आधिकारिक घोषणा के बाद और आयोग के टर्म ऑफ रेफरेंस के 6 महीने में क्या-क्या काम हो चुका है।

आयोग ने अप्रैल से पकड़ी काम की रफ्तार
अप्रैल में प्रक्रिया ने सबसे ज्यादा रफ्तार पकड़ी। 10 अप्रैल 2026 से स्टाफ हायरिंग शुरू हुई, वो भी कॉन्ट्रैक्ट बेसिस पर। इसका मतलब साफ है- सरकार चाहती है कि आयोग तेजी से काम पूरा करे और रिपोर्ट में देरी न हो। 14 अप्रैल को NC-JCM ने 51 पन्नों का मेमोरेंडम सौंपा, जिसमें कर्मचारियों की सैलरी, भत्तों, पेंशन और फिटमेंट फैक्टर जैसे बड़े मुद्दे शामिल हैं। यही दस्तावेज आगे सिफारिशों की नींव माने जा रहे हैं।

इसके बाद 28 अप्रैल को दिल्ली में आयोग और NC-JCM के बीच पहली आधिकारिक बैठक हुई। इस मीटिंग में कर्मचारियों की मांगों पर शुरुआती चर्चा हुई और आगे की बातचीत का रोडमैप तय किया गया। साथ ही 28 से 30 अप्रैल के बीच अलग-अलग कर्मचारी संगठनों के साथ भी मीटिंग्स हुईं, जिससे संकेत मिलता है कि आयोग हर पक्ष की राय लेने में जुटा है।

मेमोरेंडम जमा करने की तारीख 31 मई तक बढ़ी
एक और बड़ा फैसला- मेमोरेंडम जमा करने की अंतिम तारीख बढ़ाकर 31 मई 2026 कर दी गई है। यानी अभी भी संगठनों के पास अपनी मांगें रखने का मौका है। सीधी बात करें तो 6 महीने में बुनियाद तैयार हो चुकी है और अब असली काम शुरू हो गया है।

अब आयोग के पास बचा है 12 महीने का वक्त
अभी भी आयोग के पास रिपोर्ट फाइनल करने के लिए करीब 12 महीने का वक्त बचा है। पिछले 6 महीनों में आयोग ने देहरादून और दिल्ली में विभिन्न संगठनों के साथ मीटिंग करके जमीन तैयार कर ली है। अब असली चुनौती उन मांगों पर मुहर लगाने की होगी, जो कर्मचारियों के जीवन स्तर को बेहतर बना सकें।

केंद्रीय कर्मचारियों की निगाहें अब इसी बात पर टिकी हैं कि आने वाले महीनों में फिटमेंट फैक्टर, बेसिक सैलरी, फैमिली यूनिट से डीए मर्जर और अन्य भत्तों को लेकर क्या ठोस फैसला निकलकर सामने आता है। फिलहाल, ‘सेटअप’ का काम पूरा हो चुका है और अब पूरी प्रक्रिया पूरी तरह से ‘एक्शन’ मोड में है।

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