6 जनवरी को यहां बच्चे सांता क्लॉज का नहीं ‘बेफाना’ का करते हैं इंतजार
जिंगल बेल, जिंगल बेल जिंगल ऑल द वे’, यह जिंगल सॉन्ग क्रिसमस के दस दिन पहले से ही घरों में सुनाई देने लगता है। दुनिया भर में क्रिसमस बड़ी धूम-धाम से सेलिब्रेट किया जाता है। छोटे-छोटे बच्चे क्रिसमस के लिए क्रिसमस ट्री को बेल्स,स्टार्स और बॉल्ज वगैरह से सजाते हैं। लेकिन एक देश ऐसा भी है, जहां क्रिसमस 25 को नहीं, बल्कि छह जनवरी को मनाया जाता है और वहां बच्चे सांता क्लॉज का नहीं ‘बेफाना’ का इंतजार करते हैं, जिसे ‘क्रिसमस विच’ के नाम से भी जाना जाता है।
इटली में क्रिसमस छह जनवरी को मनाया जाता है, जिसे ‘द फीस्ट ऑफ एपिफेनी’ कहते हैं। माना जाता है कि यीशु के पैदा होने के 12वें दिन तीन ज्ञानी व्यक्ति उन्हें अपना आशीर्वाद और उपहार देने गए थे, इसलिए उन्हीं को याद करके छह जनवरी को ईसामसीह का जन्मोत्सव मनाया जाता है। बच्चे ‘ला बेनाफा’ से उपहार पाने के इंतजार में अपने सॉक्स को ट्री पर टांग देते हैं। वह सांता क्लॉज की तरह रैनडियर पर नहीं घूमती, वह ब्रूमस्टिक का सहारा लेती है।
कहा जाता है कि जब यीशू के जन्म के12वें दिन वह तीन ज्ञानी उन्हें आर्शीवाद और उपहार देने जा रहे थे, तब बेफाना उन्हें घूमती हुई मिली और उन्होंने उससे भी यीशू के यहां चलने के लिए पूछा, लेकिन बेफाना ने उन्हें मना कर दिया और कुछ दिन बाद उसे यीशू से न मिलने का पछतावा हुआ, और तब से वह हर बच्चे के लिए उपहार लाती है इस उम्मीद में कि उसे यीशू मिलेंगे।कहा जाता है कि एपिफैनी की शाम को बूढ़ी बेफाना अपने ब्रूमस्टिक पर घूम-घूम कर बच्चों को उपहार और स्वीट कैंडीज बांटती है। सांता क्लॉज की ही तरह, ला बेफाना को तेरहवीं शताब्दी से कथाओं में पढ़ा जाता रहा है। यह पॉप संस्कृति की बजाय ईसाई कथा से आती है, जिसका बच्चे बेसब्री से इंतजार करते हैं।





