62 साल बाद आएगा दुर्लभ संयोग, इस मुहूर्त में करें होलिका दहन

22 मार्च मंगलवार को पूर्णिमा प्रदोष व्यापिनी है। इस दिन भद्रायुक्त पूर्णिमा होने से होलिका दहन निषेध माना गया है, जबकि 23 मार्च बुधवार को वृद्धि गामिनी पूर्णिमा है, जो भद्रा मुक्त है।
इस दिन शाम 5.31 बजे तक पूर्णिमा है, जो साढ़े तीन प्रहर से अधिक काल की होती है। उससे आगे आने वाली प्रतिपदा का मान भी पूर्णिमा से अधिक होने के कारण 23 मार्च को ही गोधूलि युक्त प्रदोष वेला में होलिका दहन शास्त्रानुसार रहेगा। जयपुर में इस दिन प्रदोष काल में शाम 6.36 बजे से 6.48 बजे तक होलिका दहन किया जा सकेगा।
62 साल पहले बना था ऐसा योग
पंडित सुरेश शास्त्री ने बताया कि 1954 में भी ऐसा ही योग बना था। तब भी पूर्णिमा के दिन प्रदोष के समय पूर्णिमा स्पर्श का अभाव था। उस समय भी पंडितों ने माना था कि यदि वृद्धि को प्राप्त होने वाली प्रतिपदा हो तो दूसरे ही दिन प्रदोष व्यापिनी प्रतिपदा में होलिका दहन श्रेष्ठ होगा।
गोधूलि वेला में होगा होलिका दहन
ज्योतिष परिषद एवं शोध संस्थान के अध्यक्ष पंडित पुरुषोत्तम गौड़ ने बताया कि 22 मार्च को दोपहर 3:12 बजे पूर्णिमा तिथि प्रारंभ होने के साथ ही भद्राकरण भी प्रारंभ हो जाएगा। भद्राकरण 23 मार्च (उत्तर रात्रि) सुबह 4:22 बजे तक रहेगा। अत: इस समय के बाद ही होलिका दहन करना शास्त्र सम्मतहै।





