6 महीने बाद एक्स का देर रात मैसेज? पिघलिए मत, यह प्यार नहीं…

मॉडर्न दुनिया में हर दूसरे दिन कोई न कोई नया डेटिंग ट्रेंड देखने को मिलता है, कभी घोस्टिंग, कभी ब्रेडक्रंबिंग, कभी ग्रेवयार्ड डेटिंग तो अब एक और नया ट्रेंड सामने आया है। इस नए डेटिंग ट्रेंड का नाम है पेपरक्लिपिंग। कहीं आप तो इस इस तरह के डेटिंग पैटर्न के शिकार नहीं, आइए आपको डिटेल में बताते हैं पेपरक्लिपिंग नामक इस जहरीले खेल की कहानी।
क्या है पेपरक्लिपिंग?
डेटिंग की दुनिया में पेपरक्लिपिंग एक बेहद परेशान करने वाला टर्म हो सकता है, क्योंकि इसमें आपका एक्स बिना किसी वजह के हफ्तों या महीनों बाद संपर्क करने की कोशिश करता है। यह संपर्क बिना किसी इरादे के किया जाता है जो व्यक्ति को कन्फ्यूज कर सकता है।
नाम के पीछे का लॉजिक
पेपरक्लिपिंग नाम माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस के उस पुराने असिस्टेंट क्लिपी के नाम पर रखा गया है, जो पॉप अप की तरह अचानक स्क्रीन पर आता रहता था। जैसे बिन बुलाए महेमान की तरह क्लिपी आता था, उसी तरह कुछ लोगों की जिंदगी में एक्स की भी वापसी हो रही है।
‘ऑप्शन B’ और बैकअप बनाकर रखना
इस ट्रेंड की सबसे परेशान करने वाली बात यह है कि इसमें वापिस संपर्क करने वाले व्यक्ति का इरादा दोबारा जिंदगी में आना नहीं होता, बल्कि अपनी उपस्थिति दर्ज कराना और सामने वाले को बैकअप की तरह रखना होता है। सीधे शब्दों में कहें तो दरवाजा इतना खुला रखना कि सामने वाले को अंदर आने की संभावना भी रहे और बर्ताव ऐसे करना कि वह अंदर खुद से आने की हिम्मत भी न दिखा पाए।
जीरो एफर्ट, मैक्सिमम अटेंशन ट्रैप
अगर कोई व्यक्ति पेपरक्लिपिंग कर रहा है तो उसके एफर्ट एकदम जीरो यानी न करे बराबर दिखाई देते हैं और अटेन्शन वह पूरी पाता है। इसमें एक्स के मन में पहले कोई भावना या इरादा नहीं होता, इसी वजह से उसकी तरफ से रिश्ते को बनाए रखने के लिए किसी तरह की इनवेस्टमेंट नहीं की जाती। यह भ्रम पैदा करता है कि एक्स वापिस आना चाहता है, जबकि सामने वाले इरादा केवल अपना मतलब निकालना या ईगो संतुष्ट करना होता है।
पेपरक्लिपिंग से बचने के तरीके
अपनी सीमाएं तय करें और दिल से सोचने के बजाय दिमाग से काम लें।
खुद की लाइफ बेहतर करने पर फोकस करें।
पेपरक्लिपिंग के संकेतों को भावनाओं के चलते अनदेखा न करें
सोशल मीडिया से दूरी बनाकर रखें
मूव ऑन करने के अपने इरादे मजबूत रखें।





