540 करोड़ की धरोहर के बाद अब हवाई कनेक्टिविटी से चमकेगा वैशाली

वैशाली एक बार फिर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर अपनी सशक्त पहचान दर्ज कराने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रही है। ऐतिहासिक वैशाली स्तूप के समीप हेलीपोर्ट निर्माण के लिए लगभग 5 एकड़ भूमि चिह्नित करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। प्रस्तावित हेलीपोर्ट बुद्ध सम्यक दर्शन संग्रहालय एवं स्मृति स्तूप के पास बनाया जाएगा, जिससे देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को सीधी और सुगम हवाई कनेक्टिविटी मिल सके।
वैशाली स्तूप बौद्ध अनुयायियों के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र है। यही वह ऐतिहासिक स्थल है, जहां भगवान गौतम बुद्ध के पवित्र अवशेष सुरक्षित रखे गए थे, जिन्हें बाद में विभिन्न देशों में वितरित किया गया। हर वर्ष बड़ी संख्या में विदेशी बौद्ध भिक्षु, शोधार्थी और श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।
72 एकड़ क्षेत्र में निर्मित बुद्ध सम्यक दर्शन संग्रहालय एवं स्मृति स्तूप बिहार की सांस्कृतिक धरोहर और वैश्विक बौद्ध विरासत का भव्य प्रतीक है। लगभग 540 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित इस परियोजना का उद्घाटन जुलाई 2025 में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने किया था। यह परिसर पवित्र पुष्कर्णी तालाब और पौराणिक स्तूप के समीप विकसित किया गया है।
राजस्थान से लाए गए 42,373 गुलाबी पत्थरों से निर्मित इस भव्य परिसर में संग्रहालय, पुस्तकालय, तालाब, गेस्ट हाउस, एमपी थियेटर और कैफेटेरिया जैसी आधुनिक सुविधाएं विकसित की गई हैं। साथ ही सौर ऊर्जा संयंत्र और विशाल पार्किंग की भी व्यवस्था की गई है।
खुदाई के दौरान मिले भगवान बुद्ध के अस्थि अवशेष को आमजन के दर्शनार्थ यहां सुरक्षित रखा गया है। सुरक्षा कारणों से इन अवशेषों को पहले पटना संग्रहालय में संरक्षित किया गया था, लेकिन संग्रहालय के उद्घाटन के बाद इन्हें वैशाली लाकर स्थापित कर दिया गया।
जिलाधिकारी वर्षा सिंह ने बताया कि हेलीपोर्ट के लिए ऐसी भूमि का चयन किया जा रहा है, जो संग्रहालय और वैशाली के प्रमुख बौद्ध स्थलों के अत्यंत निकट हो। भूमि चयन की प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा जाएगा। स्वीकृति मिलते ही निर्माण कार्य शुरू होने की उम्मीद है। हेलीपोर्ट बनने से विशेष रूप से विदेशी पर्यटकों और बौद्ध श्रद्धालुओं को बड़ी सुविधा मिलेगी तथा वैशाली की धार्मिक पर्यटन संभावनाओं को नई गति प्राप्त होगी।





