32 साल में नहीं सुलझी इस राजा की मर्डर मिस्ट्री, तोड़ा था CM का हेलिकॉप्टर

भरतपुर. राजा मानसिंह हत्याकांड हाइप्रोफाइल केस की 7वीं बार फिर 18 जुलाई से मथुरा जिला कोर्ट में बहस शुरू हो गई है। 32 साल पहले डीग में हुए इस हत्याकांड की गुत्थी अभी तक नहीं सुलझ पाई है। इस प्रकरण में करीब 1560 तारीखें पड़ चुकी हैं। करीब 6 बार फाइनल बहस हो चुकी है। मामला काफी पेचीदा है और पूर्व राजघराने से जुड़ा है। इसलिए इस मुकदमे से जुड़े सभी लोग फूंक-फूंक कर कदम रख रहे हैं। 

पढ़िए भरतपुर से जुड़े हाईप्रोफाइल केस की पूरी रिपोर्ट…
– इस केस की सुनवाई में 19 जज 14 वकील बदल चुके है। केस में पीड़ित पक्ष के 61 और बचाव पक्ष के 17 की गवाही हो चुकी है। करीब 1000 डॉक्यूमेंट हैं, लेकिन आज भी ये रहस्य बना है कि मानसिंह पर गोली किसने चलाई। केस जिला एवं सत्र न्यायाधीश अजीतसिंह की अदालत में चल रहा है। अगली तारीख 22, 23, 24 25 अगस्त हैं। मुख्य आरोपी डीग के तत्कालीन पुलिस उपाधीक्षक कानसिंह भाटी एवं 14 अन्य आरोपियों को पेशी पर स्पेशल टास्क फोर्स की निगरानी में लाया जाता है।
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– एक पेशी पर राजस्थान सरकार का करीब 50 से 60 हजार रुपए खर्च आता है। करीब 8.5 करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं। क्योंकि सभी आरोपियों को विशेष सुरक्षा प्रबंध के तहत मथुरा ले जाया जाता है।
– पहली जांच तत्कालीन जिला कलेक्टर एस अहमद ने अतिरिक्त जिला कलेक्टर आरपी पारीक को 21 फरवरी 1985 को सौंपी थी। न्यायिक जांच भी बिठाई गई और इसकी केंद्रीय जांच ब्यूरो से 1985 में ही जांच भी हो चुकी है।
– राजा मानसिंह की बेटी और मौजूदा पर्यटन मंत्री कृष्णेंद्र कौर इस मामले की पैरवी कर रही हैं।
झंडा उतारने से नाराज मानसिंह ने तोड़ दिया था सीएम का हेलिकॉप्टर
– 20 फरवरी 1985 को विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस उम्मीदवार सेवानिवृत आईएएस ब्रिजेंद्रसिंह के पक्ष में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवचरण माथुर की सभा थी। राजा मानसिंह भी निर्दलीय उम्मीदवार थे।
– कहा जाता है कि कांग्रेस समर्थकों ने राजा मानसिंह के झंडे को किले में लक्खा तोप के पास से हटाकर कांग्रेस का झंडा लगा दिया, जो उन्हें नागवार गुजरा।
– पुलिस की एफआईआर के अनुसार राजा मानसिंह ने चैड बाजार में सभा मंच तथा हायर सेकंडरी स्कूल में खड़े हेलिकॉप्टर को जीप से टक्कर मारकर क्षतिग्रस्त कर दिया।
– उस समय सीएम माथुर बाजार में जनसंपर्क में जुटे थे। इस मामले में दो एफआईआर दर्ज हुई है। जिसमें एक एफआईआर 34/85 तथा 35/85 डीग थाने में पायलट स्क्वॉड्रन लीडर डीसी सूरी एवं आरएसी जवान विशंभरदयाल सैनी की ओर से दर्ज कराई गई थी जो कि आईपीसी की धारा 147,149, 307 427 के तहत दर्ज की गई थी।
जयपुर जाने वाले थे भाटी, फोन आया गिरफ्तारी को निकले, अनाज मंडी में फायरिंग
– तत्कालीन डीएसपी कानसिंह भाटी 21 फरवरी को दोनों एफआईआर की कापी लेकर जयपुर जाने वाले थे। किंतु कहा जाता है कि उनके आवास पर तीन बार फोन आए और वे जयपुर जाना स्थगित कर थाने पहुंचे।
– जहां फोर्स को हथियार सहित तैयार किया तथा राजा मानसिंह को गिरफ्तार करने तथा माहौल बिगड़ने पर फायर करने से नहीं झिझक ने की बात कही। उन्होंने आरएसी के जवान भी साथ में लिए। ऐसा सीबीआई की जांच में माना गया है।
– बाद में पुलिस ने अनाज मंडी में राजा मानसिंह को हाथ से इशारा कर रुकने को कहा, किंतु राजा मानसिंह ने आगे रुकने का इशारा दिया। इस पर पुलिस जीप के ड्राइवर महेंद्रसिंह ने जीप को जोंगा के आगे लगा दिया।
– जहां फोर्स को हथियार सहित तैयार किया तथा राजा मानसिंह को गिरफ्तार करने तथा माहौल बिगड़ने पर फायर करने से नहीं झिझक ने की बात कही। उन्होंने आरएसी के जवान भी साथ में लिए। ऐसा सीबीआई की जांच में माना गया है।
– बाद में पुलिस ने अनाज मंडी में राजा मानसिंह को हाथ से इशारा कर रुकने को कहा, किंतु राजा मानसिंह ने आगे रुकने का इशारा दिया। इस पर पुलिस जीप के ड्राइवर महेंद्रसिंह ने जीप को जोंगा के आगे लगा दिया।
– जब राजा मानसिंह जोंगा को बैक करने लगे तभी फायरिंग हुई। इसमें राजा मानसिंह, सुमेरसिंह हरिसिंह को गोली लगी।
– मृत्यु का कारण गोली लगना बताया गया था। जोंगा के टायर भी फायरिंग एवं राइफल के चाकू से बस्ट हो गए थे। उस दिन जोंगा में राजा मानसिंह के अलावा हरिसिंह, सुमेरसिंह, मलखानसिंह, विजयसिंह, मिट्ठूसिंह, बच्चूसिंह सिनसनी, नवाबसिंह रीठोटी, श्यामसिंह, दिगंबर आदि मौजूद थे।
7 बार विधायक रहे मानसिंह
– राजा मानसिंह भरतपुर रिसायत के अंतिम महाराजा ब्रजेंद्रसिंह के छोटे भाई थे। राजा मानसिंह सेना में सैकंड लेफ्टिनेंट रहे।
– रियासत काल में वे 1946 में मंत्री रहे। इसके अलावा 1952 से 1984 तक लगातार सात बार विधायक रहे। वे नदबई कुम्हेर से एक-एक बार तथा पांच बार डीग से विधायक रहे।
– 1985 में वे आठवीं बार चुनाव लड़ रहे थे। राजस्थान में सिर्फ दो विधायक ही ऐसे हुए है जो लगातार 7 बार चुनाव जीते है। इनमें मोहनलाल सुखाड़िया भी शामिल है।
– रियासत काल में वे 1946 में मंत्री रहे। इसके अलावा 1952 से 1984 तक लगातार सात बार विधायक रहे। वे नदबई कुम्हेर से एक-एक बार तथा पांच बार डीग से विधायक रहे।
– 1985 में वे आठवीं बार चुनाव लड़ रहे थे। राजस्थान में सिर्फ दो विधायक ही ऐसे हुए है जो लगातार 7 बार चुनाव जीते है। इनमें मोहनलाल सुखाड़िया भी शामिल है।





