25 फीसदी तक मृत्‍यु दर कम करने वाली कंगारू केयर यूनिट में योगदान  के लिए सीईएल को सम्‍मान

लखनऊ मैनेजमेंट एसोसिएशन ने बेस्ट नॉन-प्रॉफिट संस्था अवॉर्ड 2019 से नवाजा

लखनऊ। कम्युनिटी एम्पावरर्मेंट लैब (CEL) को नवजात शिशुओं की जान बचाने और माताओं को सम्मानजनक देखभाल देने के लिए लखनऊ मैनेजमेंट एसोसिएशन ने बेस्ट नॉन-प्रॉफिट संस्था अवॉर्ड 2019 से सम्‍मानित किया है।
जयपुरिया स्‍कूल ऑफ मैनेजमेंट में आयोजित एक समारोह में कम्युनिटी एम्पावरर्मेंट लैब को यह सम्‍मान 16 मार्च को प्रदान किया गया। आपको बता दें कि कंगारू मदर केयर (KMC) प्रणा‍ली की महत्‍ता का अंदाज इसी बात से लगाया जा सकता है कि अगर जरूरतमंद शिशु को कंगारू मदर केयर मिलती है तो शिशु मृत्‍यु दर 25 प्रतिशत तक घटती है।
 
संस्‍था की सह-संस्थापक आरती कुमार ने यह जानकारी देते हुए बताया कि इस अवार्ड को CEL के संस्थापक अपने पति डॉ.विश्वजीत कुमार के साथ उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव आलोक रंजन से ग्रहण किया। उन्‍होंने बताया कि 2012 से नवजात शिशु देखभाल और प्रारंभिक बाल विकास में नवाचार के तहत CEL को अब तक बिल एन्ड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन द्वारा 5 अति प्रतिष्ठित ग्राण्ड चैलेंजेस अवार्ड प्राप्त हो चुके हैं।
 
रिसर्च संस्था CEL की शुरुआत विश्‍वस्‍तरीय वैज्ञानिक डॉ.विश्वजीत कुमार ने बाल्टिमोर (अमेरिका) से 2003 में वापस उत्तर प्रदेश आकर जॉन्‍स  होपकिन्स यूनिवर्सिटी, अमेरिका और किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी, लखनऊ के साथ मिलकर नवजात शिशु मृत्यु दर को कम करने के लिए UP के जनपद रायबरेली के शिवगढ़ ब्लॉक से की थी।

उन्‍होंने बताया कि हम लोगों का फोकस इस बात पर है कि प्रत्‍येक जिले में कंगारू मदर केयर यूनिट स्‍थापित हों, जिससे हर जरूरतमंद बच्‍चे को यह केयर मिल सके यही नहीं इसके लिए हमने 200 अग्रिमाएं तैयार की हैं, ये वे युवतियां हैं जिन्‍होंने यह शपथ ली है कि वे दो वर्ष अपने विवाह को टालेंगी ये जरूरत युवतियां कंगारू मदर केयर सेंटर पहुंचकर जरूरतमंद शिशु को कंगारू केयर देती हैं। ज्ञात हो कंगारू केयर शिशु के शरीर को गर्मी पहुंचाने के लिए अपने शरीर से चिपका कर शरीर से गर्मी देने की प्रक्रिया है।
 
आरती बताती हैं कि CEL ने शिवगढ़ की माताओं और परिवार को अपने बच्चों की जान बचाने के लिए सक्षम बनाने में सहयोग कर गृह-आधारित नवजात देखभाल प्रथाओं में सुधार किया जिससे मात्र 16 महीनों में ही नवजात शिशु मृत्युदर में 54% की कमी आयी।
 
डॉ.विश्वजीत का यह प्रथम कार्य अभी भी नवजात शिशु देखभाल के क्षेत्र में दुनिया के सर्वश्रेष्ठ कार्यों में से एक गिना जाता है। इस कार्य को और गहराई से समझने के लिए बिल गेट्स की पत्नी मेलिंडा गेट्स, नॉर्वे के राष्ट्रपति के अलावा पूरे विश्व से लगभग 400 से अधिक प्रतिष्टित व्यक्ति शिवगढ़ आ चुके हैं।
 
उन्‍होंने बताया कि यह कार्य राष्ट्रीय ही नही अपितु विश्व स्तरीय स्वास्थ्य देखभाल नीतियों को नई आकृति प्रदान करने में सहायक रहा है. इस कार्य को उत्तर प्रदेश के सम्पूर्ण नवजात देखभाक प्रोग्राम 2008 (UP’s Comprehensive Child Survival Program) में भी समाहित किया गया.
 
हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के साथ कम्युनिटी एम्पावरमेंट लैब के ‘बेटर बर्थ’ प्रोग्राम के तहत WHO के सेफ बर्थिंग चेकलिस्ट को प्रदेश के 60 सरकारी अस्पतालों में 80,000 माताओं के साथ कार्यान्वित किया गया।
 
वर्ष 2016 से CEL ने उत्तर प्रदेश सरकार के समस्त 75 जनपदों में 170 कंगारू मदर केअर लॉन्ज का निर्माण कराने में वैज्ञानिक एवं तकनीकी सहयोग प्रदान किया है। अभी तक कुल 35,000 से भी ज़्यादा कम वज़न एवं समय से पहले जन्में शिशु को KMC की सुविधा मिल चुकी है। यह दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे जल्दी विस्तार करने वाला प्रथम कंगारू केअर प्रोग्राम रहा है।
कंगारू केयर उत्तर प्रदेश का बदलता चेहरा भी दर्शाता है कि अब हमारा प्रदेश सबसे छोटे नवजात शिशुओं की सम्मानजनक देखभाल देने के लिए ततपर एवम समर्पित है।
 

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