इतिहास के पन्नो में स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जाएगा 22 मार्च 2020 का दिन

लखनऊ: इतिहास के पन्नो में स्वर्णिम अच्छरों में लिखा जाएगा 22मार्च 2020 का दिन रविवार। न प्रशासन का फरमान न पुलिस का दबाब, लेकिन सड़कों पर सन्नाटा और घरों में कैद रहे लोग। यह दिन है कोरोना वायरस से लड़ने का। जिसके लिए प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने जतना से जनता कर्फ्यू के लिए अपील की थी। प्रधानमंत्री की इस अपील पर पूरा जिला उनके साथ खड़ा हो गया। नतीजतन सुबह 7 बजे से 10 बजे तक सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहा। बस स्टैंड व रेलवे स्टेशन सूने पड़े रहे। चाहे शहरी क्षेत्र हो या फिर कस्वा गांव हो या मजरा हर जगह जनता कर्फ्यू सफल नजर आ रहा है।

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आलम यह है सुबह 4 बजे से सर्वाधिक भीड़ भीड़ रहने वाला फतेहगढ़ का मिलिट्री चौराहा आज सूना पड़ा है। सड़कों और गलियों में पूरी तरह सन्नाटा पसरा है। बात यही खत्म नहीं होती विश्व प्रसिद्ध सूफी संत राम चन्द्र मंदिर जहां सुबह होते भक्तों की भीड़ लग जाती थी। वहां पर भी कोई भक्त माथा टेकने नहीं गया। गंगा तट पांचालघाट पर न पंडा नजर आए न यजमान जिले के पांचालघाट, श्रंगीरामपुर, किला घाट, ढाई घाट 7 बजे से ही सूने हो गए। शहर के त्रिपोलिया चौक, लाल सराय,पंडा बाग, भोलेपुर आवास विकास की गलियां व सड़के पूरी तरह से सूनी रहीं।

कस्वा मोहम्मदाबाद,कमालगंज में भी लोग अपने घरों में बिना किसी दबाब के कैद रहे। गांव की गलियां पूरी तरह से सुनी नजर आई। गांव हो या शहर सभी लोग जनता कर्फ्यू के तहत बिना किसी जोर दबाब के सफल बनाने के लिये घर से बाहर नहीं निकले। इस सम्बंध में फतेहगढ़ चौराहे पर अपने घर मे मौजूद मोहम्मद यूनुस अंसारी से जब बात की गई तो उन्होंने कहा कोरोना जैसी माहमारी से लड़ने के लिए सभी लोग देश के साथ हैं। आज यहां मोहम्मद रफी के महल उदास और गलियां सूनी गाने के बोल जीवंत हो रहे हैं।यह गाना मोहम्मद रफी ने 57 साल पहले गाया था। जिसकी याद को कोरोना ने तरो ताजा कर दिया है।

गांव कमालपुर के रावेंद्र सिंह, गजेंद्र सिंह का कहना है कि जिस समय कोरोना की दहसत से लोग परेशान थे उस समय उन गांव वालों को उम्मीद थी कि प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी कोई साधारण व्यक्ति नही हैं। वह महामानव हैं। मनुष्य जाति को बचाने के लिए जरुर वह कोई तरीका लेकर आएंगे। उन्होंने कोरोना पर विजय पाने के लिए एक दिन जनता कर्फ्यू की अपील की। इस वजह से वह लोग बिना किसी जोर दबाब के अपने घरों में कैद हैं। गांव का कोई बच्चा घर से बाहर नहीं निकल रहा है।

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