2016 के शो केस के सहारे मिशन 2017, अखिलेश ने लगाया टॉप गियर

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव अपनी सरकार के चौथे साल में अपनी महत्वाकांक्षी योजनाओं का शो केस जनता के सामने पेश करने के लिए बेचैन हैं. अखिलेश यादव ने
खुद की छवि विकास के नक़्शे के बरक्स खड़ा करने की कोशिश को तेज कर दिया है. वे साईकिल और टेक्नोलाजी के एक कर नया फार्मूला दें रहे हैं.

मेट्रो परियोजना , बिजली उत्पादन , लखनऊ आगरा एक्सप्रेस वे, हाई टेक सिटी, आईटी सिटी, हाईटेक पुलिस मुख्यालय, अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम, जनेश्वर मिश्र पार्क और इन सबके अलावा हाईटेक मुख्यमंत्री सचिवालय वह योजनाये हैं जिसे सीएम अपने विकास के माडल के बतौर पेश करना चाहते हैं.मुख्यमंत्री सचिवालय के अधिकारीयों को हर ड्रीम प्रोजेक्ट का नोडल आफिसर भी बनाया गया है.

 

विकास के इस शो केस के जरिये अखिलेश आने वाले चुनावो में खुद को पीएम नरेन्द्र मोदी से बेहतर दिखाने की रणनीति पर भी काम कर रहे हैं. उन्हें बखूबी पता है कि भाजपा मोदी की विकास कर्ता की छवि ले कर ही मैदान में उतारेगी और इसीलिए वे अक्सर केंद्र की सरकार पर विकास योजनाओ के साथ भेदभाव करने का आरोप भी लगाते हैं.

मुख्यमंत्री अपने ड्रीम प्रोजेक्ट्स को ले कर कितने उत्साहित है इसका पता उनके हालिया दिनों के भाषणों से लगता है. वे जिस भी कार्यक्रम में जाते हैं वहां वे इन परियोजनाओं का जिक्र करना नहीं भूलते.आज भी एक मीडिया हॉउस द्वारा आयोजित कार्यक्रम में अखिलेश का भाषण इन्ही योजनाओं पर केन्द्रित रहा. और इसके पहले मुम्बई में निवेश को आकर्षित करने की कवायद में भी अखिलेश ने इनका जिक्र किया.

आने वाली जनवरी से मुख्यमंत्री अपने नए कार्यालय में बैठने का अल्टीमेटम अधिकारीयों को दे चुके है, इसलिए सचिवालय का काम पूरे जोरों पर जारी है. यूपी का नया मुख्यमंत्री सचिवालय कई मायनों में अनूठा होने वाला है. मुख्यमंत्री का नया दफ्तर नई बन रही इमारत में होगा जिसे नवीन सचिवालय भवन का नाम दिया गया है.

दरअसल विधान भवन के सामने सड़क पार विधायक निवास दारुलसफा का एक बड़ा हिस्सा खाली करा के मुख्यमंत्री और सूबे के बड़े अफसरों का नया दफ्तर बनाने का आईडिया पूर्व मुख्यमंत्री मायावती का था. तत्कालीन मुख्यमंत्री ने उसी वक़्त अपने लिए एक नया लग्जरी और आधुनिक संसाधनों से युक्त दफ्तर बनाने के आदेश दिए. आईडिया मायावती का था और अखिलेश यादव की सरकार.उसे साकार स्वरुप दे रही है. इस काम में तेजी का आलम यह है कि खुद मुख्य सचिव ने निर्देश दिये हैं कि नवीन सचिवालय भवन के बी-ब्लाक एवं ए-ब्लाक के निर्माण का कार्य निर्धारित मानक एवं गुणवत्ता के साथ हरहाल में अगले वर्ष जनवरी तक अवश्यपूर्ण कराना होगा. उन्होंने कहा कि नवीन भवन के समस्त ब्लाकों का कार्य आगामी जून, 2016 तक पूर्ण करा लिया जाये. उन्होंने बताया कि नवीन सचिवालय भवन में सात तल होंगे, परन्तु बी-ब्लाक पांच तल का होगा, जिसके पाचवें तल पर मुख्यमंत्री कार्यालय होगा.

लखनऊ मेट्रो की कमान ई श्रीधरन को सौपने के पीछे भी इसकी समयबद्धता सुनिश्चित करना एक बड़ा कारण था. मेट्रो के लिए श्रीधरन का जूनून किसी से छिपा नहीं है. अखिलेश मेट्रो का पहला चरण अक्टूबर 2016 तक पूरा करना चाहते हैं. श्रीधरन ने इसका आश्वाशन भी दिया है और जिस तेजी से मेट्रो का काम चल रहा है उससे यह लक्ष्य पूरा होने में कोई कठिनाई भी नहीं दिख रही है.

इसी तरह लखनऊ आगरा एक्प्रेसवे भी है. सीएम को पता है कि यदि यह समय से पूरा नहीं हुआ तो विपक्ष इसे मुद्दा बनाएगा और उनकी खिल्ली उड़ाई जाएगी. इसलिए वे आये दिन इसकी प्रगति जाँ
चने खुद ही पहुच जा रहे हैं. अखिलेश को पता है कि एक्सप्रेस वे के किनारे की जमीनों को ले करा मायावती सरकार पर कई आरोप लगे थे और किसानो के आन्दोलनों ने माया सरकार को कमजोर भी किया था. इसलिए भूमि अधिग्रहण के मामलो को अखिलेश ने बखूबी बिना विवाद के निपटाया और एक्सप्रेस वे के किनारे मंडिया बनाने की योजना दे कर किसानो का समर्थन भी हासिल किया. आगरा अखिलेश का प्रिय शहर है और लखनऊ से आगरा के कीच कन्नौज उनकी पत्नी डिम्पल यादव का संसदीय क्षेत्र है. ऐसे में यह एक्सप्रेस वे उनके लिए राजनितिक रूप से भी फायेदेमंद होगा ये अखिलेश को बखूबी पता है. इसलिए वे इस परियोजना में कोई ढिलाई बर्दाश्त करने के लिए तैयार नहीं है.

आईटी को ले कर अखिलेश शुरू से क्रन्तिकारी मूड में रहे हैं. लैपटाप बाँट कर उन्होंने तकनीकि को गाँव तक पहुचने का दावा किया और अब लखनऊ को आई टी सिटी बनाने के लिए उन्होंने आईटी टाईकूँन शिव नादर का साथ लिया है. शिव नादार के निर्देशन में इसकी रूपरेखा बनायीं जा रही है जिससे बड़ी आईटी कंपनियों को आकर्षित किया जा सके.

1090 और डायल 100 के बाद अब अखिलेश की निगाह में हाईटेक पुलिस मुख्यालय है. पुलिस महकमा अखिलेश सरकार की कमजोरी रहा है और ख़राब पुलिसिंग को ले कर उनकी सरकार हमेशा कटघरे में रही है. अब उन्होंने विदेशो की तर्ज पर हाईटेक पुलिस मुख्यालय की कल्पना की है. इसके जरिये वे महकमे को सुधारना चाहते है और पुलिस की सक्रियता बढ़ाना चाहते हैं.

अखिलेश की यह योजनाये आईकोनिक हैं .यह परियोजनाए चर्चा भी बटोरेंगे और समर्थन भी. साथ ही इन परियोजनाओं को भौतिक रूप से भी प्रदर्शित करने में सरकार कामakhilesh-cartoonयाब रहेगी. अपने वोटरों को लुभाने के लिए मायावती ने भी पार्क बनवाए थे मगर वहां पार्क से ज्यादा चर्चा घोटालों की रही. मगर अखिलेश की यह योजनाये जनता को सीधा लाभ देंगी. सरकार के रणनीतिकारों का सोचना है कि इन योजनाओ से लाभ पाने वाले लोग खुद ब खुद इसकी चर्चा करेंगे.

इन सबके अलावा सूबे में बिजली की किल्लत एक बड़ा सवाल रही है. कई छोटी बड़ी परियोजनाओं के जरिये अखिलेश इस सवाल को भी ख़त्म करने की कोशिश में है . वैकल्पिक उर्जा से ले कर परंपरागत उर्जा तक हर रस्ते को वे अपना रहे हैं और अखिलेश का दावा है कि 2016 में वे यूपी को उर्जा प्रदेश में बदल देंगे.

अखिलेश यादव को भी इस बात का इल्म बखूबी है कि यदि इन परियोजनाओं में जरा भी देरी या गड़बड़ हुई तो वे विपक्ष के हमलों को सम्हाल नहीं पाएंगे. ख़राब कानून व्यवस्था और चयन आयोगों में हुई नियुक्तियों ने पहले ही अखिलेश सरकार की इमेज को धक्का लगाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है. उसपर कोर्ट और राजभवन की सक्रियता भी सरकार को अक्सर पिछले पैरों पर खड़े होने के लिए मजबूर कर देती है . ऐसे में विकास की ये परियोजनाए अखिलेश के लिए संजीवनी साबित हो सकती हैं. इससे उन्हें भी मजबूती मिलेगी और प्रदेश को भी.

बहरहाल इस परियोजनाओं को पूरा करने के लिए बनाये गए टारगेट यह तो साफ़ कर दे रहे हैं कि मिशन 2017 की चुनौती से अखिलेश 2016 की उपलब्धियों के सहारे ही निपटने का मन बना चुके हैं.

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