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140 साल से 80 लाख राम नाम हर साल लिखता है इंदौर, 30 साल में लिख दिए 24 करोड़

इंदौर। शहर के पश्चिम क्षेत्र में स्थित छत्रीबाग रामद्वारा 140 साल से श्रीराम नाम का अलख जगा रहा है। गत 30 वर्षों से यहां हर साल करीब एक हजार राम नाम की पुस्तकों का वितरण किया जाता है। अब तक 30 हजार पुस्तकों का वितरण किया जा चुका है। प्रत्येक पुस्तक में 40 पेज और हर पेज पर 200 बार राम नाम लिखा जाता है। अर्थात एक पुस्तक में लाल स्याही से 8 हजार नाम लिखने की व्यवस्था है। इस तरह भक्तों द्वारा प्रति वर्ष लगभग 80 लाख राम नाम लिखे जा रहे हैं। 30 सालों में अब तक करीब 24 करोड़ राम नाम लिखे जा चुके हैं।

140 साल से 80 लाख राम नाम हर साल लिखता है इंदौर, 30 साल में लिख दिए 24 करोड़पहले इन पुस्तकों को नर्मदा नदी में प्रवाहित किया जाता था, लेकिन अब राजस्थान के शाहपुर स्थित मुख्य स्थान पर भेजा जाने लगा है। ट्रस्ट के रामसहाय विजयवर्गीय बताते हैं कि 150 बाय 200 फीट में फैले रामद्वारा में प्रतिदिन सुबह रामधुन गूंजती है। वाणीजी का सामूहिक पाठ किया जाता है। चैत्र और शारदीय नवरात्रि में रामचरित मानस का पाठ होता है।

फैक्ट फाइल

– 1 हजार पुस्तकों का वितरण हर साल

– 40 पेज की एक पुस्तक

– 8 हजार बार श्रीराम नाम लिख सकते हैं एक पुस्तक में

– 80 लाख नाम प्रति वर्ष लिखे जा रहे

एक हजार रामचरित मानस और 50 हस्तलिखित ग्रंथ

रामस्नेही संप्रदाय के संतों द्वारा हस्तलिखित 50 से अधिक ग्रंथ यहां उपलब्ध हैं, जिनका अध्ययन किया जा सकता है। एक हजार से अधिक रामचरित मानस की पुस्तकें भी हैं जो श्रद्धालुओं को पाठ करने के लिए उपलब्ध कराई जाती हैं। रामस्नेही संप्रदाय में राम नाम को ब्रह्म माना गया है – देवेंद्र मुछाल, ट्रस्टी रामद्वारा छत्रीबाग

ऐसे हुआ रामस्नेही संप्रदाय का प्रवेश

– 140 साल पहले सन् 1878 में स्यौरामदास महाराज का आगमन दुल्हेराम महाराज के साथ शहर में हुआ था। उस दौरान यहां घनघोर जंगल था। वे वृक्ष के नीचे बैठकर सदा भजन करते थे। केवल भिक्षा लेने नगर में आते थे।

– 1947 में स्यौरामदास महाराज ने पंच भौतिक शरीर को त्याग दिया। इसके बाद 1947 में राजाराम महाराज ने झोपड़ीनुमा मोहन विलास बनाया जो आज रामद्वारा छत्रीबाग के रूप में पहचाना जाता है।

– रामद्वारा छत्रीबाग में मुनि स्वरूपराम, मुनि जुगतराम और संत लक्षयाराम के समि स्थल बने हैं।

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