16 फ्रैक्चर, 8 सर्जरी के बाद भी IAS बनीं; जन्म से बोन डिसऑर्डर से पीड़ित थीं

नई दिल्ली.जन्म से ही बोन डिसऑर्डर से पीड़ित उम्मुल खेर ने UPSC सिविल सर्विस एग्जाम में 420वां रैंक हासिल किया है। यह बीमारी हड्डियों को कमजोर बना देती है, जिसकी वजह से गिरने या चोट लगने पर फ्रैक्चर होने का खतरा रहता है। लिहाजा उम्मुल ने 16 फ्रैक्चर का सामना किया और 8 बार सर्जरी कराई। गरीब फैमिली से आने वाली उम्मुल के पिता मूंगफली बेचते थे। लेकिन इतनी मुश्किलों के बाद भी वे आईएएस अफसर बनने का अपना सपना पूरा करने में कामयाबी हुईं।

सुभाष चंद्र बोस की लाइफ से मिली इंस्पिरेशन…
– उम्मुल खेर ने पहली ही कोशिश में सिविल सर्विस एग्जाम पास किया है। उन्होंने बताया, “मैंने जनवरी 2016 में अपनी तैयारियां शुरू की और हर रोज 15 घंटे पढ़ती थी।”
– “जब मैं दूसरी क्लास में थी तो मैंने नेताजी सुभाष चंद्र बोस के बारे में पढ़ा और उनसे बहुत प्रभावित हुई। वह एक सिविल सर्वेंट भी थे। इसलिए मैंने भी तय कर लिया कि मैं भी आईएएस अफसर बनूंगी। आगे की पढ़ाई के लिए मैं अपने परिवार के साथ राजस्थान से दिल्ली आ गई।”
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– बता दें कि यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन (UPSC) ने सिविल सर्विसेस 2016 के एग्जाम के नतीजे 31 मई को घोषित किए थे।
टीचर्स ने काफी सपोर्ट किया
– उम्मुल खेर ने बताया, “सोशल, फाइनेंशियल हर लेवल पर मुझे चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा था। मेरे टीचर्स ने मेरी पोटेंशियल को समझा और हर बार मेरी मदद की। मेरे टीचर्स का सपोर्ट मेरे लिए सबसे बड़ा सहारा बना।”
बच्चों को पढ़ाया, पार्ट टाइम जॉब किया
– उम्मुल खेर ने यह भी बताया कि गरीबी से जूझ रहे अपने परिवार की मदद के लिए उन्होंने बच्चों को पढ़ाया और पार्ट टाइम जॉब भी की। अपनी पूरी स्कूलिंग के दौरान वे बच्चों को ट्यूशन पढ़ाती रहीं।
12वीं में हासिल किए थे 91% मार्क्स
– उम्मुल ने 12वीं क्लास में 91% मार्क्स हासिल किए थे और उसके बाद गार्गी कॉलेज में एडमिशन लिया था। उन्होंने बच्चों को ट्यूशन पढ़ाना जारी रखा ताकि वह अपने कॉलेज का खर्चा उठा सके।
– 2012 में उनका एक्सीडेंट हुआ और उन्हें कुछ वक्त व्हीलचेयर पर भी रहना पड़ा। ग्रेजुएशन के बाद उन्होंने जेएनयू में एडमिशन लिया। जूनियर रिसर्च फेलोशिप (JRF) क्लियर करने के बाद उन्हें हर महीने 25 हजार रुपए मिलते थे।





