12वीं पास फलाहारी बाबा ने 30 पहले छोड़ा था घर, मां-पिता के देहांत में नहीं भी नहीं गया
अलवर/कौशांबी. फलाहारी बाबा की गिरफ्तारी के बाद नए तथ्य सामने आए हैं। बाबा मशीनों को संभालने के बजाए मंत्र संभालने में लग गए और वे सभी मंत्र अब बाबा पर ही उल्टे पड़ गए। दरअसल फलाहारी बाबा के पास आईटीआई की डिग्री है। फलाहारी बाबा अपने माता-पिता की मौत के बाद भी उनसे मिलने गांव नहीं गए। कौशांबी के डकशरीरा (महेवाघाट) गांव के रहने वाले बाबा के बारे में सोश्यल मीडिया, अखबारों व चैनलों में खबरें आने के बाद लोगों का उनके घर पर आना-जाना शुरू हो गया है। बाबा कौशांबी के यमुना किनारे महेवाघाट थाना के डकशरीरा गांव के रहने वाले हैं। बाबा का पूरा नाम शिवपूजन गौतम मिश्रा है। उनके छोटे भाई राजनारायण मिश्रा हैं। इनका कहना है कि बाबा को झूठे मामले में फंसाया गया है।

बाबा खुद 12वीं पास, बनाते थे आईपीएस, आईएएस और जज…
फलाहारी बाबा ने अपना घर 30 पहले ही छोड़ दिया था। बाबा खुद 12वीं हैं, लेकिन आईएएस, आईपीएस और जज बनाने का दावा करते हुए खुद सलाखों के पीछे चले गए। बाबा इंटरमीडिएट तक पढ़े हैं और और उन्होंने आईटीआई भी किया है। घर से निकल जाने के कई दिनों बाद उन्हीं के गांव के लोगों ने बताया था कि वह कुंभ मेले में हैं और संत बन गए हैं। इसके बाद जब लोग गए तो बाबा से मिले। अक्सर गांव के लोग उनसे कुंभ में ही मिलते थे।
शिव पूजन ऐसे बना बाबा
– डकशरीरा में बाबा का घर आज भी कच्चा छप्पर का बना हुआ है। यहां लोगों की सुबह से शाम तक भीड़ बनी रहती है। इनके पिता का नाम राम शिव पूजन था। इंटरमीडिएट की पढ़ाई करने के बाद परिवारजनों ने इनकी शादी भी तय कर दी। इनकी एक बेटी भी है।
– इनका मन पूजा-पाठ और सामाजिक कार्य में लगा रहता था। रामायण और अन्य ग्रंथों का घर में अध्ययन किया करते थे। अचानक एक दिन बिना बताए हुए वह घर से निकल गए सालों बाद पता लगा इलाहाबाद नैनी इंस्टिट्यूट से आईटीआई में डिप्लोमा प्राप्त किया।
– इसके बाद वह संत का रूप धारण करके इलाहाबाद अर्धकुंभ में 1 महीने का कल्पवास भी किया। जब गांव के लोग इलाहाबाद स्नान के लिए गए तो शिवपूजन मिश्रा से लोग मिले तो उन्होंने पहचानने से इंकार कर दिया। इस समय गांव वालों को मालूम पड़ा कि शिव पूजन मिश्रा अब बाबा बन चुके हैं। तब से उन्होंने परिवार व गांव वालों से नाते रिश्ते तोड़ दिए।
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मां-पिता की देहांत में नहीं गया था बाबा
ताज्जुब की बात यह है कि माता-पिता की सेवा करने का पाठ पढ़ाने वाले फलाहारी खुद की मां स्वर्गीय सरस्वती देवी और पिता स्वर्गीय राम शिव की मृत्यु होने पर भी नहीं गए। इनके छोटे भाई रामनारायण अपने परिवार के साथ गांव में ही रहते हैं खेतीबाड़ी करते हैं। इनकी पत्नी का नाम निर्मला है व एक बेटी माया है, जिसकी शादी बाबा ने ही की है।





