अभी अभी: हुआ बड़ा ऐलान राजनीति में उतरेंगे रजनीकांत, बनायेंगे अपनी नई पार्टी, हिल गई देश की सभी पार्टिया

रजनीकांत, ऐसी शख्सियत जिसे भारत ही नहीं पूरी दुनिया जानती है, पहचानती है. रजनीकांत वैसे तो भारत के नामचीन व्यक्तियों में से एक हैं लेकिन तमिलनाडु में उनका करिश्मा ही कुछ और है. उन्हें लोग थलाइवा के नाम सेजानते हैं. इसका मतलब होता है राजा. लेकिन अगर रजा खुद कहे कि अब मैं जनता की सेवा करना चाहता हूँ, मुझे मौका दें, तब?
रजनीकांत ने खुद ऐलान किया था कि वो सितंबर और अक्टूबर के महीने में अपने ख़ास लोगों से मिलेंगे और भविष्य की प्लानिंग करेंगे. अब इसका मतलब ये है कि रजनीकांत अब रील लाइफ में नहीं बल्कि रियल लाइफ में हीरो बनना चाहते हैं. माना जा रहा है कि इस साल दिलवाली में तमिलनाडु को एक नया एमजीआर जैसा करिश्मा देखने को मिल सकता है.
ये साड़ी बातें ऐसे ही नहीं चल रही हैं. दरअसल, रजनीकांत ने खुद अप्रत्यक्ष रूप से इस बात का ऐलान किया था कि वो अपने लोगों को साथ जोड़ेंगे. रजनीकांत के दोस्त और आरएसएस के स्वदेशी जागरण मंच से जुड़े स्वामीनाथन गुरुमूर्ति ने भी इस बात के सन्देश दिए थे कि रजनी कुछ समय में अपनों को बेहतर तरीके से जोड़ने का प्रयास करेंगे. इसके लिए वो जल्द ही बड़ा कदम भी उठाने वाले हैं.
रजनीकांत उस प्रयास में लग चुके हैं और अपने ख़ास लोगों से उन्होंने मुलाकात भी शुरू कर दी है. वैसे मौजूदा समय में देखा जाये तो तमिलनाडु को सच में एक रजा की जरूरत भी है. ऐसा इसलिए क्योंकि करुणानिधि की अब उम्र हो चली है. जयललिता की मृत्यु हो चुकी है. ऐसे में अब राज्य को आगे कौन संभालेगा ये किसी को नहीं पता. रजनीकांत से बेहतर इंसान तमिलनाडु के लिए कोई हो भी नहीं सकता.
भाजपा के भरसक प्रयास के बाद भी रजनीकांत उनके साथ नहीं गए. माना जा रहा है कि भाजपा उन्हें सीएम पद देने को तैयार थी लेकिन उन्होंने मना कर दिया. अब ऐसा इसलिए उन्होंने किया क्योंकि रजनीकांत अपनी खुद की पार्टी बनायेंगे. रजनीकांत के लिए राजनीती में घुसने का इससे अच्छा मौका भी शायद अब न मिले. विपक्ष के नाम पर उनके सामने कोई मजबूत चेहरा नहीं रह गया है.
रजनीकांत को एमजीआर से भी जोड़ कर देखा जा रहा है. एमजीआर ऐसे शख्सियस थे, जिन्हें तमिलनाडु के लोगों ने सर आंखों पर बिठा रखा था. वो तमिल सिनेमा के सुपरस्टार थे और पौराणिक चरित्रों को निभाकर जनता के बीच ‘मक्कल थिलागम’ की उपाधि पा चुके थे. मक्कल थिलागम का मतलब होता है ‘आम लोगों का राजा’. और जब डीएमके ने उन्हें पार्टी से निकाला, तो उस समय कांग्रेस के बेहद शानदार नेता कामराज ने उन्हें पार्टी में न लेकर डीएमके को सत्ता से हटाने का प्लान बनाया.
एमजीआर ने 1972 में अलग पार्टी बनाई और अगले चुनाव में भारी जीत दर्ज की. इस दौरान वो पार्टी की मजबूती के लिए काम करते रहे और पार्टी की1977 में जीत के बाद से 1987 में अपनी मौत के समय तक लगातार 10 सालों तक मुख्यमंत्री रहे. अब देखना ये है कि क्या रजनीकांत आम लोगों के ‘थलाइवा’ बनने के लिए तैयार होते भी हैं? अगर वो तैयार होते हैं, तो उनकी तैयारियां और उनके साथियों के बारे में भी जानना दिलचस्प रहेगा.





