हिंसा के मुहाने पर दक्षिण सूडान: संयुक्त राष्ट्र ने दी कड़ी चेतावनी

संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी है कि दक्षिण सूडान राजनीतिक गतिरोध और बढ़ती हिंसा के कारण खतरनाक कगार पर पहुंच गया है। सरकार और विपक्ष बड़े टकराव की तैयारी में हैं। जोंगलेई राज्य में हिंसा, बमबारी और विस्थापन बढ़ा है। 2018 का शांति समझौता ही एकमात्र रास्ता बताया गया है।

दक्षिण सूडान में बढ़ते राजनीतिक टकराव और हिंसा को लेकर संयुक्त राष्ट्र ने गंभीर चेतावनी जारी की है। संयुक्त राष्ट्र के शांति अभियानों के प्रमुख ने कहा है कि देश खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। सरकार और विपक्ष के बीच बढ़ते अविश्वास और टकराव से हालात तेजी से बिगड़ रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हस्तक्षेप कर दोनों पक्षों को फिर से बातचीत की मेज पर लाने की अपील की है।

संयुक्त राष्ट्र के शांति अभियानों के अवर महासचिव जीन-पियरे लाक्रोआ ने सुरक्षा परिषद को बताया कि राजनीतिक गतिरोध अब सीधे हिंसा में बदल रहा है। उन्होंने कहा कि दोनों पक्ष खुद को आत्मरक्षा में कार्रवाई करने वाला बता रहे हैं, लेकिन साथ ही बड़े पैमाने पर लड़ाई की तैयारी भी कर रहे हैं। उन्होंने साफ कहा कि अगर जल्द संवाद शुरू नहीं हुआ तो हालात और खतरनाक हो सकते हैं।

गृहयुद्ध की पृष्ठभूमि और अधूरा शांति समझौता
दक्षिण सूडान ने वर्ष 2011 में सूडान से अलग होकर आजादी पाई थी। लेकिन दिसंबर 2013 में जातीय आधार पर गृहयुद्ध छिड़ गया। राष्ट्रपति साल्वा कीर के समर्थक गुट और रीक मचार के समर्थक गुट आमने-सामने आ गए। इस संघर्ष में चार लाख से ज्यादा लोगों की मौत हुई। वर्ष 2018 में शांति समझौता हुआ और राष्ट्रीय एकता सरकार बनी, जिसमें कीर राष्ट्रपति और मचार उपराष्ट्रपति बने। लेकिन समझौते का पूरा पालन अब तक नहीं हो पाया है।

हालिया तनाव और राजद्रोह के आरोप
मार्च 2025 में तनाव बड़े स्तर पर बढ़ा जब एक नुएर मिलिशिया ने सेना के एक ठिकाने पर कब्जा कर लिया। इसके बाद सरकार ने रीक मचार और सात अन्य विपक्षी नेताओं पर राजद्रोह, हत्या और आतंकवाद समेत कई गंभीर आरोप लगाए। उपराष्ट्रपति को निलंबित कर दिया गया। राजद्रोह से जुड़ा मुकदमा 2025 के अंत से चल रहा है। इसी बीच लंबे समय से टले राष्ट्रपति चुनाव अब दिसंबर में प्रस्तावित हैं।

जोंगलेई राज्य में हिंसा और मानवीय संकट
संयुक्त राष्ट्र ने राजधानी जुबा के उत्तर-पूर्व में स्थित जोंगलेई राज्य में हाल के हफ्तों में हिंसा बढ़ने पर खास चिंता जताई। वहां बमबारी, भड़काऊ बयान, राहत पहुंचाने में बाधा और बड़े पैमाने पर विस्थापन की खबरें हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार 2.8 लाख से ज्यादा लोग हिंसा के कारण घर छोड़ चुके हैं। देश में हैजा का गंभीर प्रकोप भी फैला है और सितंबर 2024 से अब तक 98 हजार से ज्यादा मामले दर्ज हुए हैं।

शांति मिशन पर फंड संकट का असर
संयुक्त राष्ट्र ने कहा कि फंड की कमी के कारण उसे दक्षिण सूडान में अपने शांति मिशन बल में कटौती करनी पड़ी है। जिन इलाकों में सैनिक घटाए गए हैं वहां नागरिक सुरक्षा गश्त 40 प्रतिशत तक कम हुई है। जहां बेस बंद हुए हैं वहां यह कमी 70 प्रतिशत तक है। मानवीय कर्मियों पर हमले भी बढ़े हैं। वर्ष 2025 में राहत कर्मियों और केंद्रों पर 350 हमले दर्ज हुए, जो पिछले साल से ज्यादा हैं। संयुक्त राष्ट्र ने कहा कि बिना व्यापक सहमति के कोई भी चुनाव विश्वसनीय नहीं माना जाएगा।

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