हादसों को न्योता दे रही हैं जर्जर भवनों पर लगी भारी भरकम होर्डिंग्स

विधानसभा और अशोक मार्ग पर जर्जर छज्जों पर लगे हैं स्ट्रक्चर
मानकों को किया दरकिनार, निगम प्रशासन हाथ पर हाथ धरे बैठा
मोटी कमाई के लिए दुर्घटनाओं की आशंका को किया जा रहा नजरअंदाज
लखनऊ। राजधानी में जर्जर भवनों पर भारी-भरकम होर्डिंग्स लगाने का खेल बन्द नहीं हो रहा है। प्रचार एजेसियां मोटी कमाई के चक्कर में ऐसे भवनों के छज्जों और छतों पर भी भारी भरकम स्ट्रक्चर लगा रहीं हैं, जो पूरी तरह जर्जर हो चुके हैं। यही नहीं शहर की दशकों पुरानी बिल्डिंगों पर भी बड़े-बड़े विज्ञापन स्ट्रक्चर लगे हुए हैं। ये कभी भी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकते हैं। लेकिन सबकुछ जानते-बूझते निगम प्रशासन हाथ पर हाथ धरे बैठा है।
नगर निगम के प्रावधान के मुताबिक जर्जर भवनों पर होर्डिंग लगाने की अनुमति नहीं है। किसी भी भवन पर होर्डिंग लगाने से पहले प्रचार एजेंसियों को प्रार्थना पत्र के साथ इंजीनियर की रिपोर्ट भी पेश करनी पड़ती है। इस प्रक्रिया को पूरा करने के बाद ही निगम की ओर से स्ट्रक्चर लगाने की अनुमति मिलती है। वहीं हकीकत यह है कि शहर में तमाम होर्डिंग बिना रिपोर्ट के लगी हुई हैं। निगम की फाइलों में कई होर्डिंग्स के लिए जरूरी स्ट्रक्चरल इंजीनियर की रिपोर्ट नहीं लगी है। बतातें चले कि पिछले वर्ष आंधी-तूफान में एक दर्जन होर्डिंग्स गिर गई थीं। इसकी चपेट में आकर कुछ लोग चोटिल भी हो गए थे। एक होर्डिंग यूनिपोल बालू अड्डे के पास गिरी थी। इसके नीचे एक कार दब गई थी। उस समय तत्कालीन अपर नगर आयुक्त विशाल भारद्वाज ने जिम्मेदारों के पेंच कसे थे। जिसके बाद नगर निगम के अफसरों की नींद टूटी थी। तब निगम ने उन भवन स्वामियों को नोटिस भेजा था जिन्होंने बिना इंजीनियर की रिपोर्ट लगाए होर्डिंग लगा रखी थी। उस समय कुल 650 भवन स्वामियों को नोटिस जारी किया गया था। लेकिन बाद में मामला ठंडा पड़ गया। हजरतगंज चौराहा, अशोक मार्ग और विधानसभा मार्ग पर तमाम इमारतें जर्जर हो चुकी हैं।
यहां के आधा दर्जन जर्जर भवनों पर भारी भरकम होर्डिंग्स लगी हुईं हैं। इन भवनों के छज्जों पर होर्डिंग लगी हुई हैं जबकि इनके छज्जे जर्जर अवस्था में हैं। इमारत में जगह-जगह से प्लास्टर गिर चुका है। कई जगह से सरिया भी दिखने लगी है। दीवारों में दरारें पड़ गई हैं। लेकिन निगम के अफसरों को न तो ऐसे जर्जर भवन दिखाई देते हैं न इन पर लगी होर्डिंग ही नजर आती है। आलम यह है कि अगर इन भवनों पर लगी होर्डिंग गिर जाए तो सडक़ पर निकले वाले लोगों की जान जोखिम में पड़ सकती है। इस मामले को लेकर प्रचार प्रभारी अशोक सिंह का कहना है कि एलडीए को स्ट्रेक्चर हटाने के लिए पत्र भेजा गया था। अगर स्ट्रक्चर पर विज्ञापन लगा है तो उसकी जिम्मेदारी नगर निगम की होगी। जिन एजेंसी के द्वारा स्ट्रक्चरल इंजीनियर की रिपोर्ट नहीं जमा की गई है उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
रिपोर्ट नहीं देने पर क्या हैं प्रावधान
स्ट्रक्चरल इंजीनियर की रिपोर्ट नहीं देने के सवाल पर विभागीय अफसरों का कहना है कि जर्जर भवनों पर होर्डिंग्स लगाने वाली प्रचार एजेंसियों को काली सूची में डाले जाने का प्रावधान है। इस मामले में आईपीसी की धारा 133 के तहत नोटिस जारी किया जाता है।
निगम की ओर से जर्जर भवन की सूची तैयार की गई है अगर ऐसे भवनों पर होर्डिंग स्ट्रक्चर लगे हैं तो यह गलत है। इसके अलावा हम किसी भी भवन को जर्जर नहीं कह सकते। होर्डिंग लगाने के लिए स्ट्रक्चरल इंजीनियर की रिपोर्ट जरूरी है। अगर रिपोर्ट नहीं लगी है तो संबंधित व्यक्ति पर कार्रवाई की जाएगी।
-पीके श्रीवास्तव अपर नगर आयुक्त





