हाई कॉर्टिसोल से बढ़ जाता है, डायबिटीज और हाई ब्‍लड प्रेशर का खतरा

हमारे शरीर में कई तरह के हार्मोन बनते हैं। इन्हीं में से एक बहुत ही जरूरी हार्मोन है कॉर्टिसोल (Cortisol)। ये हार्मोन हमारी रोजाना की ज‍िंदगी और सेहत से जुड़ा हुआ है। कॉर्टिसोल का लेवल सही बना रहे तो ये शरीर के कई कामों में मदद करता है। जैसे एनर्जी का सही इस्‍तेमाल करना, इम्‍युन‍िटी मजबूत बनाए रखना। यही वजह है कि इसे शरीर के लिए जरूरी हार्मोन माना जाता है।

ऐसे में अगर कॉर्टिसोल का लेवल बिगड़ जाए तो हमारे शरीर में कई तरह के बदलाव देखने को म‍िलते हैं। इसलिए इसके बारे में जानकारी रखना बहुत जरूरी है। आज हम आपको अपने इस लेख में बताएंगे क‍ि काॅर्टिसोल क्‍या है और इसका लेवल हाई होने के पीछे क्‍या कारण है और इसे नेचुरली कैसे मेंटेन क‍िया जा सकता है। आइए जानते हैं व‍िस्‍तार से –

कॉर्टिसोल (Cortisol) क्या है?
क्‍लीवलैंड क्‍लीन‍िक के मुताब‍िक, कॉर्टिसोल एक स्टेरॉयड हार्मोन है, जिसे आपकी किडनी के ऊपर मौजूद एड्रिनल ग्‍लैंड बनाती हैं। ये हार्मोन शरीर के कई कामों में मदद करता है और खासतौर पर तनाव (Stress) से निपटने में अहम भूमिका निभाता है। कॉर्टिसोल को अक्सर स्ट्रेस हार्मोन कहा जाता है, लेकिन इसका काम सिर्फ तनाव तक सीमित नहीं है। ये लगभग हर अंग और ट‍िशू को को प्रभावित करता है।

ये हैं कोर्टिसोल के काम
शरीर में ग्लूकोज (शुगर) को एनर्जी के लिए इस्तेमाल करना
सूजन कम करना
ब्लड प्रेशर कंट्रोल करना
स्‍लील साइक‍िल संभालना

कॉर्टिसोल और तनाव
जब आप तनाव में होते हैं, चाहे वो अचानक (acute), लंबे समय तक (chronic) या बहुत गंभीर (traumatic) हो तो शरीर कॉर्टिसोल रिलीज करता है। ये आपको सतर्क रखता है और एनर्जी के लिए लिवर से ग्लूकोज रिलीज करवाता है।

कॉर्टिसोल शरीर पर कैसे असर करता है?
तनाव का नियंत्रण- फाइट ऑर फ्लाइट हार्मोन (जैसे एड्रेनालिन) के बाद कॉर्टिसोल निकलता है ताकि आप ज्यादा देर तक सतर्क रह सकें।
मेटाबॉलिज्‍म और ब्लड शुगर- ये तय करता है कि शरीर एनर्जी के लिए ग्लूकोज का कैसे इस्‍तेमाल करेगा। ये इंसुलिन को कम और ग्लूकागन को बढ़ाता है।
सूजन कम करना- थोड़े समय के लिए ये इम्युनिटी को मजबूत करता है, लेकिन लंबे समय तक कॉर्टिसोल ज्‍यादा रहने पर सूजन और इम्यून सिस्टम कमजोर हो सकता है।
ब्लड प्रेशर- ज्यादा कॉर्टिसोल से हाई ब्लड प्रेशर और कम लेवल से लो ब्लड प्रेशर हो सकता है।
स्‍लीप साइक‍िल- सुबह के समय कॉर्टिसोल सबसे ज्यादा होता है और रात को सबसे कम। इससे स्लीप-साइकिल कंट्रोल होती है।

कॉर्टिसोल क्‍याें हाई हो जाता है?
लंबे समय तक कॉर्टिसोल बढ़ने को कुशिंग सिंड्रोम (Cushing syndrome) कहते हैं। इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं-
लंबे समय तक corticosteroid दवाएं (जैसे prednisone) लेना
पिट्यूटरी ग्‍लैंड के ACTH बनाने वाले ट्यूमर
एड्रिनल ग्‍लैंड में ट्यूमर

हाई कॉर्टिसोल के लक्षण
चेहरे और पेट पर फैट जमना
कंधों के बीच फैट जमना
पेट पर चौड़े, बैंगनी स्ट्रेच मार्क्स होना
मसल्‍स में कमजोरी
ब्लड शुगर बढ़ना (टाइप 2 डायबिटीज तक जा सकता है)
हाई ब्लड प्रेशर
महिलाओं में ज्यादा बाल आना (Hirsutism)
हड्डियां कमजोर होना और आसानी से टूटना (Osteoporosis)

कॉर्टिसोल का लेवल मेंटेन करने के 5 नेचुरल तरीके
रोजाना 30 मिनट एक्सरसाइज करें। इससे मूढ अच्‍छा होता है और तनाव कम करने में मदद म‍िलती है।
रोजाना सात से आठ घंटे की अच्‍छी नींद जरूरी है। सोने का समय तय रखें, स्क्रीन और कैफीन से बचें।
साबुत अनाज, फल, सब्जि‍यां, प्रोटीन और हेल्दी फैट्स लें।
डार्क चॉकलेट, बेरीज और ओमेगा-3 से भरपूर मछलि‍यां फायदेमंद हैं।
चार से पांच लीटर पानी पिएं।
मेडिटेशन, योग, गहरी सांस लेने का अभ्यास करें। इससे तनाव कम होता है और कॉर्टिसोल का लेवल मेंटेन रहता है।
हंसने, गाने, डांस करने और हॉबीज पर ध्‍यान देने से तनाव कम होता है और इम्यून सिस्टम मजबूत होता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button