हर महिला को पता होनी चाहिए अपनी ये 3 ‘लक्ष्मण रेखा’, नहीं तो लोग उठा सकते हैं फायदा

8 मार्च को हर साल International Women’s Day मनाया जाता है। बचपन से ही हमारे समाज में लड़कियों को एक खास ट्रेनिंग दी जाती है- “सबको खुश रखो”, “बड़ों की बात मान लो” और “थोड़ा समझौता करना सीखो।” इस ‘अच्छी लड़की’ बनने की रेस में महिलाएं अक्सर हर बात पर ‘हां’ कहना सीख जाती हैं। नतीजा यह होता है कि वो अंदर ही अंदर घुटती रहती हैं, लेकिन किसी को बुरा न लग जाए, इसलिए चुप रहती हैं।
लेकिन सच तो यह है कि हर बात पर ‘हां’ कहना आपकी महानता नहीं है। अगर कोई चीज आपको अंदर से तकलीफ दे रही है, तो मुस्कुराकर और मजबूती से ‘ना’ कहना कोई बदतमीजी नहीं, बल्कि आपकी सेल्फ-रिस्पेक्ट है।
रिश्तों में और परिवार की उम्मीदों पर
चाहे बात मायके की हो या ससुराल की, एक महिला से हमेशा ‘सुपरवुमन’ बनने की उम्मीद की जाती है। “अरे, तुम नहीं करोगी तो कौन करेगा?” इस एक इमोशनल लाइन के जाल में फंसकर महिलाएं अपनी थकान, बीमारी और पर्सनल टाइम को भी भूल जाती हैं। अगर आप थक गई हैं, अगर आपको आराम की जरूरत है, या अगर कोई आपकी अच्छाई का फायदा उठा रहा है- तो वहां ‘ना’ कहना सीखें। आपका जन्म सिर्फ दूसरों की जरूरतें पूरी करने के लिए नहीं हुआ है, आपको खुद से प्यार करने का भी पूरा हक है।
वर्कप्लेस में बिना मतलब के दबाव पर
काम की जगह पर भी अक्सर महिलाएं अपनी क्षमता से ज्यादा काम ले लेती हैं। उन्हें लगता है कि अगर उन्होंने बॉस या किसी कलीग को मना किया, तो शायद उनकी इमेज खराब हो जाएगी, लेकिन याद रखिए, अगर आप हर एक्स्ट्रा काम और दूसरों की जिम्मेदारियों के लिए भी ‘हां’ कहेंगी, तो लोग आपका फायदा उठाने लगेंगे। अपनी ड्यूटी पूरी ईमानदारी से करें, लेकिन जो काम आपके दायरे में नहीं आता या जिससे आपका पर्सनल समय खराब हो रहा है, उसे प्यार से लेकिन सख्ती के साथ ‘ना’ कहें।
पर्सनल स्पेस और बॉडी कमेंट्स पर
“थोड़ी पतली हो जाओ,” “शादी कब कर रही हो?”, “बच्चा कब करोगी?”, “तुम्हें ऐसे कपड़े नहीं पहनने चाहिए”- हमारे समाज में लोगों को महिलाओं की पर्सनल लाइफ में फ्री की सलाह देने की बहुत बुरी आदत है। ऐसी बातों को चुपचाप सुनकर मुस्कुराने का वक्त अब चला गया है। अगर किसी की बात आपको चुभती है या आपके पर्सनल स्पेस में दखल देती है, तो उन्हें वहीं टोक दें। अपनी जिंदगी के फैसले और अपनी बॉडी को लेकर आपको किसी को कोई सफाई देने की जरूरत नहीं है।
शुरुआत में ‘ना’ कहना थोड़ा मुश्किल लग सकता है। हो सकता है कुछ लोग नाराज हो जाएं या आपको ‘घमंडी’ कह दें, लेकिन यकीन मानिए, धीरे-धीरे उन्हें समझ आ जाएगा कि आपकी भी एक बाउंड्री है जिसे पार करने की इजाजत किसी को नहीं है।





