हमले के बाद भी नहीं टूटा हौसला: ऑफबीट पर्यटन स्थलों की चाबी से चालू हुई पर्यटन की गाड़ी

पहलगाम हमले और भारत-पाक तनाव के बाद जम्मू-कश्मीर में पर्यटन प्रभावित हुआ, लेकिन अब पर्यटक ऑफबीट स्थलों की ओर रुख कर रहे हैं। पर्यटन विभाग इन कम प्रसिद्ध लेकिन खूबसूरत जगहों को प्रमोट कर सेक्टर को दोबारा संजीवनी देने में जुटा है।
पहलगाम अटैक के बाद भारत-पाक तनाव ने जम्मू-कश्मीर में टूरिज्म सेक्टर को खासी चोट पहुंचाई है। अब धीरे-धीरे पर्यटक प्रदेश में आने शुरू हो गए हैं, लेकिन अब वे ऑफबीट पर्यटन स्थलों का रुख कर रहे हैं। ये वे जगहें हैं, जो बहुत जानी-मानी नहीं। यहां बाहरी सैलानी कम आते हैं, लेकिन स्थानीय पर्यटकों की चहल-पहल से पर्यटन से जुड़े लोगों के चेहरों पर राहत देखी जा सकती है।
इसे देखते हुए पर्यटन विभाग का फोकस अब इन पर्यटक स्थलों को प्रमोट करने पर है।अगर प्रदेश के ऑफबीट पर्यटन स्थलों की बात करें तो जम्मू संभाग में बटोत से करीब 30 किलोमीटर दूर पटनीटॉप एक खूबसूरत पर्यटन स्थल है।
यह पहले से ही पर्यटकों का पसंदीदा रहा है। पहलगाम अटैक के बाद यहां से पर्यटकों ने मुंह मोड़ लिया था, लेकिन अब यहां पर्यटकों की चहल-पहल दिखने लगी है। खास तौर पर छुट्टियों में यहां पर्यटक अच्छी संख्या में पहुंच रहे हैं।
ऑफबीट डेस्टिनेशन की ओर बढ़ा सैलानियों का रुझान
सनासर झील, नत्था टॉप व बगलिहार डैम का रुख कर रहेइसके साथ ही स्थानीय सैलानी बटोत के नजदीक सनासर झील, नत्था टॉप और बगलिहार डैम का भी रुख कर रहे हैं। असिस्टेंट डायरेक्टर टूरिज्म (बटोत) आरिफ लोन बताते हैं कि ये वे साइटें हैं, जो ऑफ बीट हैं और पर्यटकों को खासी भा रही हैं। वे कहते हैं कि पहलगाम अटैक और भारत-पक तनाव का असर भी यहां पड़ा, लेकिन हालात सामान्य होने के साथ-साथ ही सैलानी आने लगे हैं।
राजोरी के ऑफबीट स्थलों पर दिखने लगी श्रद्धालुओं की चहल-पहल
राजोरी का भी यही हाल है। यहां के ऑफ बीट डेस्टिनेशंस पर सैलानी आ रहे हैं। यहां शहादरा शरीफ श्राइन, दूधाधारी मंदिर, जिसे दूधाधारी बफार्नी आश्रम के नाम से भी जाना जाता है, में श्रद्धालुओं की खासी आमद है। विभाग की ओर से इन्हें प्रमोट भी किया जा रहा है।
डोडा जिले में भद्रवाह को मिनी कश्मीर कहा जाता है। हालांकि यहां अभी पहले जैसी बात नहीं, लेकिन पर्यटक आ जरूर रहे हैं। भद्रवाह डेवलपमेंट अथॉरिटी की हेल्प डेस्क पर तैनात अशोक बताते हैं कि इसमें धीरे-धीरे इजाफा होगा।
दूधपथरी और दकसुम जैसे ऑफबीट डेस्टिनेशंस बने नई उम्मीद का केंद्र
कश्मीर की बात करें तो पहलगाम अटैक के बाद 48 पर्यटन स्थलों को बंद कर दिया गया था। यहां भी अब जो टूरिस्ट ग्रुप आ रहे हैं, उन्हें यहां की ऑफबीट डेस्टिनेशंस पर ले जाया जा रहा है। इसमें खास तौर पर श्रीनगर से कुछ दूरी पर स्थित दूधपथरी, पीर पंजाल रेंज पर दकसुम शामिल हैं। यहां अभी बहुत जगह जाने की इजाजत नहीं। लेकिन सीमित पर्यटन स्थलों पर पर्यटक जा रहे हैं।
राजोरी में एक माह में एक लाखपूरे राजोरी जिले की बात करें तो यहां की साइट्स पर महीने भर में आने वाले पर्यटकों का आंकड़ा सामान्य रूप से एक लाख से अधिक है। गर्मी की छुट्टियां होेने पर ये ग्राफ निश्चित रूप से और ऊपर जाएगा। मुजम्मिल हसन, असिस्टेंट डायरेक्टर टूरिज्म (राजोरी)
पहलगाम में भी दिखने लगे पर्यटकपहलगाम में 22 अप्रैल को 26 पर्यटकों की हत्या के बाद यहां पर्यटन बिल्कुल ठप हो गया था। अब तस्वीर का रंग कुछ बदलता दिख रहा है। असिस्टेंट डायरेक्टर टूरिज्म पहलगाम जाहिद आजाद के मुताबिक धीरे-धीरे पर्यटक दिखने लगे हैं।





