स्पीकर का चुनाव भाजपा के लिए कम चुनौतीपूर्ण नहीं

दिनेश निगम ‘त्यागी
कांग्रेस की कमलनाथ सरकार को बेदखल कर सत्ता में आई भाजपा की शिवराज सरकार के लिए विधानसभा के नए स्पीकर की भूमिका महत्वपूर्ण होने वाली है। भाजपा सरकार का भविष्य 24 विधानसभा सीटों के लिए होने वाले उप चुनाव के नतीजों पर निर्भर होगा। ऐसे में सबकी नजर इस बात पर है कि विधानसभा का स्पीकर किसे चुना जाता है। बता दें, कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में विधानसभा अध्यक्ष रहे एनपी प्रजापति एवं उपाध्यक्ष हिना कांवरे इस्तीफा दे चुके हैं। शिवराज सिंह सरकार के विश्वासमत हासिल करने के दौरान प्रोटेम स्पीकर नियुक्त किए गए जगदीश देवड़ा आसंदी पर थे। मौजूदा माहौल में विधानसभा स्पीकर के लिए भाजपा के पांच दिग्गजों के नाम चर्चा में हैं। खास बात यह है कि इन सभी की प्राथमिकता मंत्री बनने में है, स्पीकर में नहीं। इसलिए स्पीकर का चुनाव भाजपा के लिए मंत्रिमंडल गठन से कम चुनौतीपूर्ण नहीं होगा। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान स्पीकर की आड़ में अपने रास्ते के एक – आध कांटे को भी दूर करना चाहेंगे।
शर्मा एवं देवड़ा का दावा सबसे मजबूत
विधानसभा स्पीकर के लिए भाजपा के दो वरिष्ठ विधायकों सीतासरन शर्मा एवं जगदीश देवड़ा का दावा सबसे मजबूत है। शर्मा विधानसभा अध्यक्ष रह चुके हैं और देवड़ा इस समय प्रोटेम स्पीकर हैं। खबर है, शर्मा की इच्छा इस बार विधानसभा स्पीकर बनने की नहीं है। वे मंत्रिमंडल में जगह चाहते हैं। इस मंशा से वे पार्टी को अवगत करा चुके हैं। यदि सीताशरन शर्मा मंत्री बनते हैं तो स्पीकर के लिए सबसे उपयुक्त नाम जगदीश देवड़ा का माना जा रहा है। वे पार्टी के प्रतिबद्ध नेता हैं। भाजपा ने उन्हें जब जो जवाबदारी सौंपी, पूरी ईमानदारी से निभाई है। इसलिए सीताशरन के इंकार पर जगदीश देवड़ा को फुल टाइम स्पीकर बनाया जा सकता है।
नरोत्तम मिश्रा कई मायने में फिट
भाजपा के दिग्गज नरोत्तम मिश्रा को विधानसभा स्पीकर के लिए कई मायने में फिट माना जा रहा है। कमलनाथ सरकार को गिराकर भाजपा सरकार लाने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही है। वे मुख्यमंत्री पद के दावेदार थे। बाजी शिवराज मार ले गए। अब उन्हें उप मुख्यमंत्री बनाए जाने की चर्चा है। सवाल यह है कि आखिर, चंबल-ग्वालियर अंचल से कितने मंत्री बनेंगे। सिंधिया समर्थक चार- पांच बागी पूर्व मंत्रियों का मंत्री बनना तय है। यशोधराराजे सिंधिया भी मंत्री बनेंगी। ऐसे में एक अंचल से ज्यादा मंत्री बनने पर सवाल उठ सकते हैं। इसे थामने और नरोत्तम को संतुष्ट करने के उद्देश्य से उन्हें विधानसभा स्पीकर की जवाबदारी सौंपी जा सकती है। वे कानून-कायदों के जानकार हैं। विपरीत परिस्थिति में भी बाजी भाजपा की ओर मोड़ने का माद्दा रखते हैं। वर्तमान राजनीतिक हालात में भाजपा को नरोत्तम जैसे स्पीकर की ही जरूरत है। यदि ऐसा हुआ तो मुख्यमंत्री का एक दावेदार भी स्वत: रेस से बाहर हो जाएगा।
गोपाल भार्गव के नाम की भी अटकलें
विधानसभा स्पीकर के लिए नेता प्रतिपक्ष रहे गोपाल भार्गव के नाम की भी अटकलें हैं। भार्गव वरिष्ठ विधायक व भाजपा के कद्दावर नेता हैं। नरोत्तम की तरह भार्गव भी मुख्यमंत्री पद के दावेदार थे। उन्होंने नेता प्रतिपक्ष का पद छोड़ा लेकिन मुख्यमंत्री नहीं बन सके। वे उप मुख्यमंत्री पद के दावेदार भी हैं। भार्गव के मामले में भी मंत्रिमंडल में जगह को लेकर समीकरण गड़बड़ा रहे हैं। सिंधिया समर्थक गोविंद सिंह राजपूत के भाजपा में आने के बाद एक ही जिले सागर से तीन बड़े नेता मंत्री बनने की कतार में हैं। बागी गोविंद राजपूत का मंत्री बनना तय है। पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह भी मंत्री बनेंगे। वे शिवराज सिंह के सबसे नजदीक हैं। तीसरे गोपाल भार्गव मंत्री नहीं बनेंगे, यह कोई सोच नहीं सकता। यहां भी वही सवाल, एक ही जिले सागर से तीन मंत्री कैसे बनाए जा सकते हैं। इसकी तोड़ के लिए विधानसभा स्पीकर के लिए गोपाल का नाम चलाया गया है। भार्गव मुख्यमंत्री पद के योग्य थे, उप मुख्यमंत्री पद के लायक हैं और विधानसभा स्पीकर के लिए भी पूरी पात्रता रखते हैं। यदि वे स्पीकर बनने राजी होते हैं तो भी शिवराज की राह का एक कांटा दूर हो जाएगा।
विंध्य अंचल से आया केदार शुक्ल का नाम
विधानसभा चुनाव में भाजपा को सबसे ज्यादा सफलता कहीं मिली तो वह विंध्य अंचल था। इस नाते सरकार में हिस्सेदारी के लिए इस क्षेत्र का दावा सबसे मजबूत है। यहां से सबसे ज्यादा मंत्री बन सकते हैं। स्पीकर का पद भी इस अंचल की झोली में जा सकता है। सीधी से विधायक केदारनाथ शुक्ल वरिष्ठ हैं और कानून के जानकार भी। हर बार मंत्री एवं विधानसभा स्पीकर पद के लिए दावेदार रहे हैं। पर भाग्य ने साथ नहीं दिया। एक बार फिर उनके नाम की चर्चा है। बागियों के कारण भाजपा कोटे से इस बार कम मंत्री बनेंगे। ऐसे में शुक्ल को विधानसभा स्पीकर की जवाबदारी सौंपी जा सकती है। ऐसा सीधी जिले में पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह का असर कम करने के उद्देश्य से भी किया जा सकता है। अजय सिंह पहले विधानसभा और इसके बाद लोकसभा का चुनाव हार चुके हैं। कांग्रेस के वे कद्दावर नेता ही। उनकी अपनी बड़ी लाबी है। भाजपा की कोशिश उन्हें फिर न उभरने देने की होगी। केदारनाथ शुक्ल सीधी से हैं जो अजय सिंह का ग्रह जिला है। इसलिए शुक्ल मंत्री बनेंगे, यदि मंत्रिमंडल में जगह न मिली तो विधानसभा स्पीकर बनाया जा सकता है। वैसे भी इस अंचल से मंत्री पद के दावेदारों की कमी नहीं है।

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