सूबे के मुख्य सचिव राजेंद्र कुमार तिवारी के महोबा स्थित पैतृक घर के आसपास गंदगी का आलम….

कस्बा ही नहीं पूरे जिले में गया प्रसाद तिवारी जी को बच्चा-बच्चा जानता हैं, इतना ही नहीं लोग अपने बच्चों को उनके बच्चों जैसा बनने की नसीहत देते हैं। आखिर दे भी क्यों ना, उनके घर में तीन बेटे, बहू व भतीजे समेत पांच आइएएस हैं। अब अंदाजा लगाइए कि जिस गली-मोहल्ले से पांच आइएएस हों तो वहां रहने वाले लोग सीना तानकर चलते होंगे। इतना ही नहीं इनमें से जब एक सूबे का मुख्य सचिव हो तो लाजमी है आपके जेहन में मोहल्ले की तस्वीर चमचमाती सड़कें, सीमेंटेड गलियां, साफ-सफाई और रोजाना चूने का छिड़काव वाली होगी। लेकिन, हकीकत बिल्कुल इसके उलट है, ‘सरकार’ के महोबा स्थित पैतृक घर जाएंगे तो आपका सामना गलियों में घूमते-लोटते सूअरों से होगा। बेशक गलियां सीमेंटेड बनी हैं लेकिन, नालियां गंदगी से बजबजा रही हैं। अफसोस भी और थोड़ी पीड़ा भी कि आखिर हर सरकारी आदेश का पालन कराने वाले मुखिया की गली का यह हाल है तो बाकी का क्या होगा?

घर के पांच लोग आइएएस

महोबा के मोहल्ला मलकपुरा में रहने वाले गया प्रसाद तिवारी राजकीय इंटर कॉलेज से सेवानिवृत्त हैं। उनके बड़े बेटे देवेंद्र कुमार तिवारी झारखंड सरकार में मुख्य सचिव हैं। दूसरे बेटे राजेंद्र कुमार तिवारी उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव हैं तो तीसरे नंबर के बेटे धीरेंद्र तिवारी पंजाब में सचिव हैं। बड़ी बहू अलका तिवारी प्रधानमंत्री कार्यालय में सचिव हैं और भतीजे रवींद्र कुमार गुजरात में आइआरएस हैं। खास यह भी कि इसी मोहल्ले की गली में इंदौर से सेवानिवृत्त एडीएम सचींद्र मिश्र व कस्टम अधिकारी सोमेंद्र कुमार भी रहते हैं।

मलकपुरा में हैं मुख्य सचिव का पैतृक आवास

सूबे के मुख्य सचिव राजेंद्र कुमार तिवारी का महोबा के मलकपुरा मोहल्ले में पैतृक आवास है। मुख्य सड़क से करीब 150 मीटर अंदर दूसरी गली में बने घर में पिता गया प्रसाद तिवारी व माता सावित्री देवी रहती हैं। इस घर के तकरीबन सभी सदस्य शीर्ष प्रशासनिक पदों पर हैं। सो, दूसरे अफसरों का भी आना-जाना लगा रहता है। प्रदेश में सबसे महत्वपूर्ण कुर्सी पर आसीन होने के साथ स्थानीय प्रशासन के लिए यह मोहल्ला वीआइपी ही है। मकान के अगल-बगल की तीन गलियों में तीन कर्मचारी भी लगा दिए गए थे। आसपास रहने वाले करीब पांच सौ लोगों को दिन बहुरने की आस जगी। शुरुआती दिनों में तत्परता दिखी, लेकिन कुछ दिन बाद लापरवाही शुरू हो गई। अब कर्मचारी सुबह सफाई कर चले जाते हैं। इसके बाद दिनभर घरों से निकलने वाला कूड़ा पड़ा रहता है। गलियों में घूमने वाले सूअर यहीं लोटते हैं, इस कूड़े को रास्ते में फैलाते हैं। यही कूड़ा नालियों में जाता है।

आए थे मंडलायुक्त

चित्रकूटधाम मंडल के कमिश्नर शरद कुमार सिंह हफ्तेभर पहले विकास कार्यों की समीक्षा के बहाने महोबा आए तो मलकपुरा मोहल्ले में भी आए थे। मुख्य सचिव के घर पहुंचकर उनके पिता से आशीर्वाद भी लिया था। इस दौरान मोहल्ले में कोई अव्यवस्था नजर नहीं आई थी।

जिम्मेदारों के ये बोल

बेशक सूअरों की समस्या पूरे शहर में हैं, लेकिन मलकपुरा में भी यह परेशानी है, मुझे कतई जानकारी नहीं है। मंडलायुक्त के साथ गया था, तो ऐसा कुछ नजर नहीं आया। अब सूअरों पर पाबंदी लगाकर, समस्याएं दूर कराएंगे। -अवधेश कुमार तिवारी, डीएम

सूअरों से बड़ी समस्या है। अब गली में सूअर घूमते दिखे तो कार्रवाई करेंगे। बोर्ड बैठक में प्रस्ताव पास कराकर सुअर पालकों के लिए शहर से बाहर भूमि आवंटित कराएंगे।– लाल चंद्र सरोज, अधिशासी अधिकारी नगर पालिका

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