सीरिया और अफगानिस्तान से अमेरिकी सेना की वापसी का दुनिया पर होगा असर

अमेरिकी राष्ट्रपति ने हाल ही में घोषणा की थी कि सीरिया और अफगानिस्तान से अमेरिकी सेना की वापसी की जाएगी। सीरिया में 2,000 अमेरिकी सैनिक तैनात हैं। अनुमान है कि 60 से 100 दिनों के भीतर उन्हें वापस अमेरिका बुला लिया जाएगा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक ट्वीट कर दावा किया कि अमेरिका ने सीरिया में इस्लामिक स्टेट को हरा दिया है। मगर, आईएस अभी खत्म नहीं हुआ है, उसकी बस कमर टूटी है। अमेरिकी सेना के हटने के बाद वे फिर से एक जुट होने की कोशिश करेंगे। आईएस के कब्जे से रक्का और मोसुल ही मुक्त हुए हैं। वह पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।
भारत की बढ़ेगी चिंता
उधर, अफगानिस्तान से अमेरिकी फौजों की वापसी के बाद वहां क्या होगा। करीब 7000 अमेरिकी सैनिक अफगानिस्तान से निकलने वाले हैं, जिससे तालिबान और पाकिस्तान खुश हैं। मगर, अमेरिका के फैसले से भारत की चिंता बढ़ सकती है। जिहादी संगठन अफगानिस्तान से अमेरिकी फौज की वापसी को इस्लाम की जीत करार देते हुए पूरी दुनिया में निजाम-ए-मुस्तफा की तरफ एक बड़ा कदम बताएंगे। इससे दुनियाभर में जहां भी इस्लाम के नाम पर आतंकवाद जारी है, वहां आतंकी और उनके समर्थकों का मनोबल बढ़ेगा। बताते चलें कि तालिबान एक बार फिर से अफगानिस्तान में सिर उठा रहा है।
खत्म नहीं हुआ है आईएस
बताते चलें कि इस्लामिक स्टेट कुछ समय पहले तक इराक और सीरिया में एक बड़ी ताकत के रूप में उभरा था। दुनियाभर से धर्मांध जिहादी उसकी विचारधारा से प्रभावित होकर सीरिया मे जमा हो रहे थे। अमेरिकी कार्रवाई के बाद उनकी कमर टूटी है, लेकिन अभी उसका पूरी तरह से सफाया नहीं हुआ है। अमेरिकी रक्षा मंत्री जेम्स मैटिस सहित कुछ सैन्य और रक्षा सलाहकारों ने कोशिश की थी कि राष्ट्रपति ट्रंप को मना लिया जाए कि वे अमेरिकी सेना को वापस न बुलाएं। सेना की वापसी से कुर्द लड़ाकों का मनोबल टूटेगा और अमेरिका की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठेंगे।
अमेरिकी सेना ने किया ‘अनुचित’ ट्वीट, फिर मांगी माफी
तुर्की और कुर्द लड़ाकों का नया संघर्ष हो सकता है शुरू
हालांकि, ऐसा नहीं हुआ और नाराज मैटिस ने पद से इस्तीफा दे दिया है। असल में आईएस के खिलाफ लड़ाई अब भी अंत से बहुत दूर है। अमेरिकी सरकार का ही अनुमान है कि सीरिया में अब भी करीब 30,000 आईएस के लड़ाके हैं और वहां हिंसा के संकेत भी मिल रहे हैं। साल 2011 में इराक से अमेरिकी सेना की वापसी के बाद भी देखा गया था कि शांति बहाली से पहले वापस लौटने से किस तरह के खतरे सामने आते हैं।
अमेरिकी सेना की सीरिया से वापसी का सबसे ज्यादा असर कुर्द लड़ाकों पर होगा। तुर्की की सेना उनके लिए खतरा बन जाएगी। अंकारा कुर्दिश वर्कर्स पार्टी (पीकेके) से संबंधों के चलते कुर्दों को तुर्की आतंकवादी मानता है। सीरिया के कुर्द पड़ोसी इराक की तरह उत्तर में अपना एक स्वायत्त क्षेत्र बनाना चाहते हैं, जबकि तुर्की इसका विरोध करता है। नाटो में अमेरिका का सहयोगी तुर्की बार बार कुर्दों को मिले अमेरिकी समर्थन का विरोध कर चुका है। हाल ही तुर्क राष्ट्रपति रेचप तैयब एर्दोवान ने कुर्द लड़ाकों के खिलाफ सीमा पार हमला करने का एलान भी किया। अमेरिकी सेना की वापसी से यहां एक नया संघर्ष खड़ा हो सकता है।





