सही साबित हुई CM योगी की आशंका, मंत्रियों को पहले ही दी थी चेतावनी

तीन निजी सचिवों के स्टिंग ऑपरेशन से मंत्रियों के दफ्तरों में उनके स्टाफ के कारनामों को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की आशंका सही साबित हुई है। मुख्यमंत्री ने सरकार बनने के तुरंत बाद ही मंत्रियों को इससे आगाह कर दिया था। बीच-बीच में वह मंत्रियों को चेताते रहे कि स्टाफ में परिचितों, रिश्तेदारों व दागियों से दूरी बनाकर रखें। निजी सचिवों की गतिविधियों पर नजर रखें। उन्होंने तो सिफारिशी पत्र लिखने और सिफारिश के लिए टेलीफोन करने में भी एहतियात बरतने की सलाह दी थी।
करीब महीना भर पहले मुख्यमंत्री ने लोकभवन में राज्यमंत्रियों व स्वतंत्र प्रभार वाले राज्यमंत्रियों की बैठक बुलाकर सिफारिश करने, पत्र लिखने और टेलीफोन करने तक में खास एहतियात बरतने के निर्देश दिए थे। कहा कि टेलीफोन पर कच्ची-पक्की बात न करें। उन्होंने इशारों ही इशारों में समझा दिया था कि किस तरह कुछ मंत्रियों के दफ्तरों से उनकी मंशा के अनुरूप काम नहीं होने की शिकायतें आ रही हैं।
यदि मंत्रियों ने उनकी सलाह मानी होती तो यह स्थिति पैदा नहीं होती। कई मंत्रियों के निजी सचिव बेअंदाज हो गए। मंत्री उन पर अंकुश नहीं लगा पाए। उनके पद व प्रतिष्ठा का दुरुपयोग किया जाने लगा। भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की डीलिंग करते हुए निजी सचिवों का कैमरों में कैद होना दर्शाता है कि मंत्रियों ने सीएम योगी की हिदायतों व सलाहों को गंभीरता से नहीं लिया।





