सरकार ने जारी की हब एंड स्पोक मॉडल पर अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए एसओपी

नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने यात्रियों के लिए घरेलू हवाई अड्डों से अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी को आसान बनाने के लिए हब और स्पोक एविएशन मॉडल को लागू करने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी की है।
सूत्रों के अनुसार, एअर इंडिया एक जून से वाराणसी एयरपोर्ट से इस मॉडल पर आधारित ट्रायल शुरू कर सकती है। यात्री वाराणसी से दिल्ली के लिए उड़ान भरेंगे और फिर वहां से लंदन के लिए दूसरी उड़ान लेंगे।
हब एंड स्पोक माडल उन यात्रियों को आसान कनेक्टिविटी देगा जो स्पोक यानी छोटे व क्षेत्रीय एयरपोर्ट से किसी हब यानी बड़े एयरपोर्ट के जरिये अंतरराष्ट्रीय गंतव्यों को जा रहे हैं।
इस मॉडल के तहत यात्रियों के लिए घरेलू से अंतरराष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय से घरेलू यात्रा को अधिक आसान बनाया जाएगा। इसमें इमिग्रेशन प्रक्रियाएं और सामान का ट्रांसफर शामिल है।
27 अप्रैल को जारी इस एसओपी ने कहा गया है, ”यात्रियों का इमिग्रेशन व कस्टम क्लीयरेंस पहली उड़ान के शुरुआती एयरपोर्ट और आखिरी उड़ान के गंतव्य वाले एयरपोर्ट पर किया जाएगा, जबकि हब एयरपोर्ट पर सामान का ट्रांसफर एयरसाइड में होगा।”
एसओपी के अनुसार, हब एंड स्पोक उड़ानों के अंतरराष्ट्रीय चरण में यात्रा करने वाले भारतीय नागरिकों के लिए डिजीयात्रा में रजिस्ट्रेशन कराना आवश्यक होगा। हब एंड स्पोक उड़ानों के घरेलू से अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए वेब चेक-इन और ई-बोर्डिंग पास की सुविधा उपलब्ध नहीं होगी।
हब एंड स्पोक उड़ानों का इस्तेमाल करने वाले यात्रियों को दो बोर्डिंग पास मिलेंगे, जिन पर ‘आइ’ और ‘डी’ के निशान होंगे, ताकि अंतरराष्ट्रीय और घरेलू यात्रियों की पहचान व उन्हें अलग करना आसान हो सके।
अन्य आवश्यकताओं के अलावा एयरलाइनों को हब एंड स्पोक एयरपोर्टों पर खास नोडल अधिकारी नियुक्त करने होंगे और इसकी जानकारी इमिग्रेशन अधिकारियों को देनी होगी।
नोडल अधिकारी की मुख्य जिम्मेदारी यात्रियों को आपस में मिलने से रोकना और उनकी पहचान की पुष्टि करना होगी। एसओपी में ऑपरेशनल ढांचा, तालमेल के तरीके और इसमें शामिल अलग-अलग एजेंसियों की जिम्मेदारियों के बारे में विस्तार से बताया गया है।
मंत्रालय के अनुसार, हब एंड स्पोक मॉडल से यात्रियों के आसान ट्रांसफर में मदद मिलने, टर्नअराउंड का समय कम होने, घरेलू व अंतरराष्ट्रीय सेक्टरों के बीच नेटवर्क कनेक्टिविटी बेहतर होने और यात्रियों के अनुभव में सुधार होने की उम्मीद है।
एअर इंडिया का कहना है कि यह माडल एयरलाइनों को विमानों का बेहतर इस्तेमाल करने में मदद करेगा। एअर इंडिया के सीईओ व एमडी कैंपबेल विल्सन ने कहा कि यह मॉडल न केवल कनेक्टिविटी को मजबूत करेगा, बल्कि पूरे देश में विकसित हुए हवाई अड्डों के बुनियादी ढांचे का बेहतर इस्तेमाल भी सुनिश्चित करेगा।





