सबरीमाला मंदिर को लेकर चार हफ्ते के लिए आया सुप्रीम कोर्ट का आदेश

प्रशासन और दर्शनार्थियों की सुविधा के लिए अलग से क़ानून पेश करे. कोर्ट ने पिछले साल अगस्त में केरल सरकार को सबरीमला मंदिर के लिए नया क़ानून (New Law) लाने के लिए कहा था.

राज्य सरकार सिर्फ सबरीमाला मंदिर (Sabarimala Ayyappa Temple) के लिए कानून लाने के बजाय इस क्षेत्र के कई अन्य मंदिरों (Other Temples) के लिए भी कानून लेकर आई थी लेकिन कोर्ट ने अब इस पर ऐतराज जताते हुए सिर्फ सबरीमाला के लिए कानून तैयार करने की बात कही है.
राज्य सरकार सबरीमाला के साथ अन्य मंदिरों के लिए भी लेकर आना चाहती थी संयुक्त कानून
हालांकि राज्य सरकार ने त्रावणकोर-कोचीन रिलीजियस इंस्टिट्यूशन एक्ट (Travancore-Cochin Hindu Religious Institutions Amendment Act, 2018) का ड्राफ्ट पेश किया. क्योंकि सरकार सबरीमाला और बाकी मंदिरों के लिए संयुक्त रूप से क़ानून लाना चाह रही थी. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस पर ऐतराज जाहिर किया.
कोर्ट ने कहा- ‘सबरीमाला मंदिर (Sabarimala Ayyappa Temple) के लिए अलग से क़ानून होना चाहिए.’ कोर्ट ने सरकार को क़ानून लाने के लिए अगले साल जनवरी के तीसरे हफ्ते तक का वक़्त दिया है.
सरकार के त्रावणकोर-कोचीन रिलीजियस इंस्टिट्यूशन एक्ट में क्या था खास?
त्रावणकोर-कोचीन रिलीजियस इंस्टिट्यूशन एक्ट में राज्य सरकार (State Government) द्वारा लाए गए संशोधन के मुताबिक मंदिर सलाहकार समिति में महिलाओं के लिए एक-तिहाई कोटा आरक्षित किये जाने का प्रावधान है.
सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि पैनल में महिलाओं (Women) को जगह किस आधार पर दी जा रही है, जबकि अभी 7 जजों की बेंच को धार्मिक परंपराओं से जुड़े बड़े संवैधानिक पहलुओं पर विचार करना है.





