संतरों का शहर नागपुर: क्या आपको पता है इसके ‘ऑरेंज सिटी’ बनने की असली कहानी?

हमारे देश के ज्यादातर शहर अपने ऐतिहासिक किलों, प्राचीन परंपराओं या मसालों के बाजारों के लिए जाने जाते हैं, लेकिन भारत में एक शहर ऐसा भी है जिसकी पूरी पहचान एक खास फल से जुड़ी है। जब भी आप कोई चटक रंग वाला, रस से भरा और खट्टा-मीठा संतरा खाते हैं, तो बहुत हद तक संभव है कि उसका सफर इसी शहर की मंडियों से शुरू हुआ हो।
जी हां, हम बात कर रहे हैं महाराष्ट्र के नागपुर की,जो सिर्फ एक शहर नहीं, बल्कि देश भर में संतरों की सप्लाई का सबसे बड़ा केंद्र है। आइए जानते हैं कि इस शहर के संतरों में ऐसा क्या खास है जिसने इसे ‘ऑरेंज सिटी’ का रुतबा दिला दिया।
200 सालों का सफर और भोंसले राजघराने की देन
नागपुर में संतरों की महक आज की नहीं है, इसका इतिहास लगभग 200 साल पुराना है। माना जाता है कि यहां संतरों की खेती की शुरुआत भोंसले राजवंश के दौर में हुई थी।
किसी भी बेहतरीन फल के पीछे वहां के मौसम और मिट्टी का सबसे बड़ा हाथ होता है। नागपुर की ‘रेगुर मिट्टी’ और सर्दियों में दिन-रात के तापमान में होने वाला भारी उतार-चढ़ाव, संतरों की खेती के लिए एक ऐसा माहौल तैयार करता है जिसकी नकल दुनिया का कोई और हिस्सा नहीं कर सकता।
‘जीआई टैग’ और नागपुरी संतरों की खासियत
नागपुर के संतरे इतने बेमिसाल हैं कि उन्हें भारत सरकार की तरफ से GI टैग मिला हुआ है। इसका सीधा-सा मतलब यह है कि किसी और जगह उगे संतरे को ‘नागपुर ऑरेंज’ के नाम से नहीं बेचा जा सकता। आइए जानते हैं इन संतरों की कुछ खास बातें, जो इन्हें दुनिया भर में मशहूर बनाती हैं:
इन संतरों का छिलका बहुत पतला होता है, जिसके कारण इनमें जूस की मात्रा बाकी संतरों के मुकाबले कहीं ज्यादा होती है।
इनका स्वाद बेहतरीन खट्टा-मीठा होता है। साथ ही, ये जल्दी खराब नहीं होते, जो इन्हें देश भर में भेजने के लिए एकदम सही बनाता है।
अपने आकर्षक चटक रंग के अलावा, ये संतरे विटामिन-सी और एंटीऑक्सीडेंट्स से पूरी तरह भरे होते हैं।
भारत की ‘ऑरेंज कैपिटल’ और उसका बाजार
नागपुर देश में संतरों की खेती, उनके बंटवारे और व्यापार का सबसे बड़ा ‘हब’ है। शहर की बड़ी-बड़ी मंडियां, कोल्ड-स्टोरेज की सुविधाएं और एक्सपोर्ट का मजबूत नेटवर्क यह तय करते हैं कि यह रसीला फल देश के कोने-कोने तक पहुंचे। इसी बड़े सप्लाई नेटवर्क के कारण इसे ‘ऑरेंज कैपिटल’ भी कहा जाता है।
नागपुर की अर्थव्यवस्था और संस्कृति, दोनों ही इस फल के इर्द-गिर्द घूमती है। शहर के बाहर फैले बड़े-बड़े बागान और हर दिन टनों संतरों का व्यापार करने वाले बाजार, हजारों किसानों और व्यापारियों के परिवारों की रोजी-रोटी चलाते हैं। शहरवासियों का इस फल के प्रति प्यार और गर्व इतना गहरा है कि वे इसका जश्न मनाने के लिए विशेष तौर पर ‘नागपुर ऑरेंज फेस्टिवल’ का आयोजन करते हैं।





