संगरूर के भगवानपुरा में बोरवाेल में गिरे दाे साल के बच्‍चे को बचाने की कोशिश जारी…..

जिले के सुनाम के नजदीकी गांव भगवानपुरा में 140 फीट गहरे दस वर्ष पुराने बोरवेल में 65 घंटे से फंसे दो वर्षीय बच्चे फतेहवीर सिंह को बाहर निकालने का संघर्ष जारी है। बच्‍चे को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए एनडीआरएफ,सेना की असॉल्ट इंजीनियरिंग रेजीमेंट की टुकड़ी जुटी हुई है। पूरा ऑपरेशन कुछ बाधाओं के बावजूद जारी है और अब थोड़ी देर का इंतजार रह गया है। मौके पर मेडिकल टीमें भी तैनात हैं। अब खोदाई का काम हाथ से किया जा रहा है।

खुदाई करने वाले डेरा प्रेमी की सेहत बिगड़ी, मेडिकल टीम सुस्त, हल्का हंगामा

बच्‍चे को बचाने के लिए वीरवार सायं से रैसिक्यू ऑपरेशन लगातार जारी है। यह ऑपेरशन शनिवार को पूरी रात जारी रही और रविवार सुबह भी खुदाई व पाइप डालने का काम चल रहा है। रविवार सुबह पौने सात बजे टनल की खुदाई कर रहे ग्रीन एस वेलफेयर फोर्स के सदस्य जग्गा सिंह की हालत अचानक गर्मी लगने की वजह से खराब हो गई। उलटियां, दस्त व बेचैनी के कारण जग्गा सिंह को जल्दी से टनल से बाहर निकाला गया, जिस कारण कुछ देर हंगामा हुआ। मेडिकल टीम बेशक मौके पर तैनात है, लेकिन इस घटना के दौरान डाक्टर देरी से पहुंचे 15 मिनट की देरी के बाद मेडिकल सुविधा दी गई, जिसके बाद मामला शांत हुआ। लेकिन इसी दौरान खुदाई का काम बंद रहा। करीब साढ़े सात बजे खुदाई का काम फिर से आरंभ किया गया।

रात साढ़े तीन बजे नीचे उतरी एनडीआरएफ की टीम

13वीं पाइप लाइन टनल में डालने के दौरान एनडीआरएफ की टीम के सदस्य टनल में उतरे व टनल का जायजा लिया। कुछ फीट तक और खुदाई करते हुए 13वीं पाइप डालने का काम शुरू किया। पाइप डाली गई व पौने दो घंटे के बाद पाइप को फिर से बाहर निकाल दिया गया। पाइप ठीक से सैट न होने के कारण उसे बाहर निकाला गया कार्य करता रहा, लेकिन रफ्तार बेहद धीमी रही। सुबह सवा पांच बजे से काम बंद हुआ व सवा छह बजे फिर खुदाई आरंभ की। पैने सात बजे डेरा प्रेमी की सेहत खराब हो पर फिर काम रुक गया। इसके बाद अब काम जारी है।

डीएमसी से एंबुलेंस व वैंटिलेटर लेकर रात को पहुंची एंबलेंस

फतेहवीर को रात तीन बजे बाहर निकालने का लक्ष्य निर्धारित किया था, लेकिन काम की रफ्तार काफी धीमी होने के कारण अब तक सफलता नहीं मिली है। सुबह पौने चार बजे डीएमसी से एंबुलेंस व वेंटिलेटर सुविधा से लैस एंबुलेंस को मौके पर तैनात किया गया। प्रशासन का कहना है कि फतेहवीर को बोरवेल से निकालते ही एंबुलेंस की मदद से डीएमसी ले जाया जाएगा।

सीमेंट की बजाए, अब लोहे की पाइप डालने का प्रयास

बोरवेल के साथ खोदे गए टनल में 12 पाइप जहां सफलतापूर्वक शनिवार मध्यरात्रि उपरांत तक डाली जा चुकी थी, वहीं उसके बाद पाइप टिक नहीं पा रही है। 13वीं पाइप को डाला गया था, लेकिन पौने दो घंटे के बाद उसे सही न होने के कारण बाहर निकाल लिया गया। उसके बाद भी प्रयास जारी रहा, लेकिन सफलता हाथ नहीं लगी। लिहाजा अब लोहे की पाइप मंगवाया गया है। लोक निर्माण विभाग की ओर से सामग्री मुहैया करवाई जा रही है। अब सुबह नौ बजे लोहे की पाइप पहुंचने पर लोहे की पाइप को डालने का प्रयास शुरू किया जाएगा। गौर हो कि  रैसिक्यू आपरेशन लगातार जारी है। फतेहवीर को बोरवेल में गिरे 65 घंटे का समय हो गया है।

इससे डेरा सच्चा सौदा की ग्रीन एस वेलफेयर फोर्स ने टनल की खोदाई का काम संभाल लिया था। सब्बल की मदद से खोदाई कर बाल्टी व थैले से मिट्टी को बाहर निकाला जा रहा है। शनिवार रात 11 बजे तक 105 फीट तक टनल की खोदाई कर ली गई थी।

गौरतलब है कि शुक्रवार सुबह के बाद से बच्चे के शरीर में कोई हरकत नजर नहीं है। एनडीआरएफ की टीम ने उसके हाथों को रस्सी के माध्यम से बांध रखा है, ताकि वह और नीचे न गिरे। बच्चे की लोकेशन 120-125 फीट तक बताई जा रही है। खोदाई का काम कर रहे धर्मगढ़ के डेरा प्रेमी गुरजीत सिंह ने बताया कि खोदाई करने व पाइप डालने में दो-ढ़ाई घंटे का समय लगता है। मौके पर तैनात डॉ. मनीश कुमार व डॉ. चमनदीप सिंह ने कहा कि कैमरों की मदद से फतेहवीर पर नजर रखी जा रही है। कोई हरकत महसूस नहीं हुई है, लेकिन हाथों में हल्की सूजन है। शरीर नीला नहीं पड़ा है, जिससे अनुमान है कि फतेहवीर का दिल काम कर रहा है व रक्तसंचार जारी है।

सांसद भगवंत मान शनिवार सुबह मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। बचाव कार्य का जायजा लेने पहुंचे कैबिनेट मंत्री विजयइंद्र ङ्क्षसगला ने बच्चे को निकालने के बाद इलाज का खर्च सरकार द्वारा उठाने का भरोसा दिलाया। कहा कि उच्च चिकित्सकीय सुविधा देने की अगर जरूरत पड़ी, तो एयरलिफ्ट करने के लिए भी सरकार मंजूरी देगी।

दूसरी तरफ बच्चे की कोई हरकत नहीं दिखाई दे रही है, जिससे पूजा-पाठ व दुआओं का दौर भी शुरू हो गया है। मौके पर मेडिकल टीमें तैयार हैं। इससे पहले शुक्रवार सुबह सात बजे पटियाला से सेना की असॉल्ट इंजीनियरिंग रेजीमेंट की टीम भी पहुंची और राहत कार्य की कमान संभाल ली। बोरवेल के साथ चार फीट चौड़ा गड्ढा खोदकर सीमेंट के पाइप लगाकर टनल बनाने का कार्य आरंभ किया।

ऐसे गिरा बच्चा बोरवेल में

फतेहवीर के परिजन खेतों में काम कर रहे थे और वह खेल रहा था। खेलते-खेलते खेत के बीच दस वर्ष पुराने बोरवेल जिसे परिवार वालों ने प्लास्टिक की बोरी से ढका हुआ था के पास जा पहुंचा। अचानक बच्चे का पांव बोर पर आ गया और बोर पर लगी बोरी कमजोर होने के कारण बच्चा सीधा बोल में नीचे चला गया। जब तक बच्चे के परिजन उसे बचाने के लिए भागे व गहराई तक जा चुका था।

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