शिक्षक दिवस पर वेबिनार आयोजित, वक्ताओं ने राधाकृष्णन को बताया निष्काम कर्मयोगी

प्रयागराज। भारत की प्राचीन गौरवशाली दार्शनिक परम्परा को पाश्चात्य शैली में परिभाषित करने का साहस और क्षमता डॉ राधाकृष्णन में थी, जिसे उन्होंने साबित करके दिखाया । राधाकृष्णन ने दुनिया को बताया कि मानवता के समक्ष सार्वभौम एकता प्राप्त करने का सर्वोत्तम साधन भारतीय धर्म -दर्शन है। उन्होंने शिक्षा को निरंतर सीखने की ऐसी प्रक्रिया बताया है जो व्यक्ति को ज्ञान और कौशल दोनों प्रदान करती है ,तथा इनका जीवन में उपयोग करने का मार्ग प्रशस्त करती है ।

यह वक्तव्य आर्य कन्या पोस्ट ग्रैजुएट कॉलेज की प्राचार्य डॉ रमा सिंह ने शनिवार को शिक्षक दिवस के अवसर पर समदरिया स्कूल आँफ स्पेशल एजुकेशन दादूंपुर द्वारा आयोजित ‘इंपॉर्टेंस ऑफ डाँ राधाकृष्णन इन करेन्ट पर्सपेक्टिव’ विषयक वेबिनार में बतौर मुख्य अतिथि दिया। उन्होंने कहा कि राष्ट्र-समाज को शिक्षित करने कमी जिम्मेदारी शिक्षक बखूबी निभा रहे हैं।
अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ मणिशंकर द्विवेदी ने आदर्श और उत्कृष्ट शिक्षक के रूप में डॉ राधाकृष्णन की व्याख्या की। उन्होंने कहा कि दर्शन जैसे गम्भीर विषय को सरल और रोचक बना देना यह उनकी प्रतिभा का कमाल था। विशिष्ट वक्ता के रूप में पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज ,भीटा के प्राचार्य डाँ अंबिका पाण्डेय ने उनकी कृतियों की चर्चा करते हुए उन्हें निष्काम कर्मयोगी की संज्ञा दी । उन्होंने कहा कि भारतीय धर्म और दर्शन पर विविध ग्रन्थों की सर्जना करके डाँ राधाकृष्णन ने विश्व के समक्ष भारत की गौरवशाली परम्परा को चरितार्थ किया है। पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज ,मेजा के प्राचार्य डॉ मधुकराचार्य त्रिपाठी ने कहा कि डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन का आदर्श जीवन भारतीयों के लिए स्रोत ही नहीं अपितु संपूर्ण मानवता के लिए प्रेरणा स्रोत है ।
कार्यक्रम का शुभारम्भ संस्थान के निदेशक डॉ मणिशंकर द्विवेदी ने डॉ राधाकृष्णन के चित्र पर माल्यार्पण व दीप प्रज्ज्वलन से किया ।प्रधानाचार्य मंजू आनन्द ने सभी अतिथियों का स्वागत किया। कार्यक्रम का संचालन नीतू सिंह तथा आभार ज्ञापन रुचिता केसरवानी ने किया। इस अवसर पर डॉ बबली द्विवेदी, शिखा मिश्रा, सुमन सिंह, सरला गौतम, यासमीन अंजुम, उषा प्रजापति, जैनुल अब्बास सहित बड़ी संख्या में छात्र व अभिभावक ऑनलाइन शामिल रहे।
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