‘शर्टलेस’ प्रदर्शन पर आर-पार: प्रियंका गांधी ने यूथ कांग्रेस को बताया निडर सिपाही

कांग्रेस महासचिव और वायनाड सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने बुधवार को ‘इंडिया-एआई इम्पैक्ट समिट’ (India-AI Impact Summit) के दौरान यूथ कांग्रेस द्वारा किए गए ‘शर्टलेस’ (अर्धनग्न) प्रदर्शन पर पुलिसिया कार्रवाई की कड़े शब्दों में निंदा की है। प्रियंका गांधी ने इस कार्रवाई को “अत्यंत निंदनीय और शर्मनाक” करार देते हुए कहा कि पूरी कांग्रेस पार्टी अपने “निडर सिपाहियों” के साथ मजबूती से खड़ी है।
क्या था पूरा मामला?
बीती 20 फरवरी को दिल्ली के भारत मंडपम में अंतरराष्ट्रीय एआई शिखर सम्मेलन (AI Summit) का आयोजन हो रहा था। इस दौरान यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने अपनी शर्ट उतारकर सरकार विरोधी और प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ नारे लिखी टी-शर्ट्स प्रदर्शित की थीं। इस घटना से वैश्विक स्तर के इस कार्यक्रम में व्यवधान पड़ा था, जिसका उद्देश्य आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में भारत की प्रगति को दुनिया के सामने रखना था।
दिल्ली पुलिस की सख्त कार्रवाई
दिल्ली पुलिस ने इस मामले को अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की छवि खराब करने की एक “गहरी साजिश” बताया है। इस सिलसिले में यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष उदय भानु चिब सहित कई कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने मामले में दंगा भड़काने जैसी गंभीर धाराएं भी जोड़ी हैं।
प्रियंका गांधी का पलटवार
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए प्रियंका गांधी ने लिखा “सत्य के लिए शांतिपूर्ण और अहिंसक प्रतिरोध हमारी गौरवशाली विरासत है, जो हमें महात्मा गांधी और करोड़ों भारतीयों से मिली है। 140 करोड़ भारतीयों के हित में उस सरकार और प्रधानमंत्री के खिलाफ आवाज उठाना जरूरी है, जो वैश्विक दबाव के आगे झुककर भारत के हितों से समझौता करते हैं।” उन्होंने आगे कहा कि जनता की आवाज उठाने वाले युवा साथियों के खिलाफ कार्रवाई करना लोकतंत्र के लिए घातक है।
चौतरफा घिरी कांग्रेस: सहयोगियों ने भी झाड़ा पल्ला
दिलचस्प बात यह है कि इस ‘शर्टलेस’ प्रदर्शन ने न केवल भाजपा और एनडीए को हमलावर होने का मौका दिया है, बल्कि विपक्षी ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन के भीतर भी दरार पैदा कर दी है। समाजवादी पार्टी (SP) और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) जैसे कांग्रेस के प्रमुख सहयोगियों ने भी इस तरीके से विरोध प्रदर्शन करने की आलोचना की है। इसके अलावा 270 से अधिक सेवानिवृत्त अधिकारियों और न्यायाधीशों ने एक संयुक्त बयान जारी कर इस घटना को “राष्ट्रीय गरिमा के साथ विश्वासघात” और सार्वजनिक व्यवस्था पर हमला करार दिया है।
विरोध का अधिकार बनाम देश की प्रतिष्ठा
16 से 20 फरवरी तक चले इस शिखर सम्मेलन में दुनिया भर के दिग्गजों ने हिस्सा लिया था। अब इस घटना ने एक नई बहस को जन्म दे दिया है, क्या विरोध प्रदर्शन का अधिकार देश की अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा से ऊपर हो सकता है? जहाँ कांग्रेस इसे तानाशाही के खिलाफ आवाज बता रही है, वहीं आलोचक इसे राष्ट्रीय अपमान मान रहे हैं।





