विदेशी संकेत इस बार तय शेयर बाजार की चाल, यहाँ रखें नजर

इस हफ्ते भारतीय शेयर बाजार की चाल जारी होने वाले प्रमुख आर्थिक आंकड़ों और देश की प्रमुख कंपनियों के पिछले वित्त वर्ष की चौथी तिमाही के नतीजों से तय होगी. हालांकि साप्ताह के आरंभ में तेजी का सिलसिला जारी रहने की संभावना है. सोमवार को शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 131.37 अंक (0.34%) तेज होकर 38,993.60 के स्‍तर पर खुला जबकि निफ्टी 38.40 अंक (0.33%) मजबूत होकर  11,704.35 पर खुला. कुछ ही मिनटों में सेंसेक्‍स की बढ़त 39 हजार के आंकड़े को पार कर गई.

पिछले हफ्ते के अंतिम कारोबारी दिन शुक्रवार को सेंसेक्‍स  177.51 अंक या 0.49 फीसदी की तेजी के साथ 38,862.23 अंक पर रहा. वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 67.95 अंक यानी 0.59 फीसदी की बढ़त के साथ 11,665.95 अंक पर रहा.  

पिछले हफ्ते के अंत में अमेरिका में गैर-कृषि क्षेत्र में नौकरियों में इजाफा होने के आंकड़े आने के बाद बाजार में तेजी देखने को मिली, जिसका असर इस सप्ताह भारतीय बाजार पर दिख सकता है. हालांकि घरेलू बाजार की दिशा तय करने में डॉलर के मुकाबले रुपये की चाल और अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के भाव भी भूमिका निभाएगा. पिछले सप्ताह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के भाव में तेजी देखने को मिली. समाचार एजेंसी आईएएनएस के मुताबिक अमेरिकी श्रम विभाग ने कहा है कि मार्च महीने में गैर-कृषि क्षेत्र की नौकरियों में 1,96,000 का इजाफा हुआ. इस आंकड़े के जारी होने पर अमेरिकी शेयर बाजारों में तेजी देखने को मिली.

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इसके अलावा, देश के चुनावी माहौल का भी शेयर बाजार पर असर देखने को मिल सकता है. देश में लोकसभा चुनाव और चार राज्यों के विधानसभा चुनाव के लिए सात चरणों में होने वाले मतदान के पहले चरण में 11 अप्रैल को मतदान होगा. बाजार की नजर विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों और देसी संस्थागत निवेशकों के निवेश रुझानों पर भी होगी, जिससे बाजार की चाल तय होगी.

आएंगे प्रमुख आंकड़े

सप्ताह के आखिर में शुक्रवार को देश के औद्योगिक उत्पादन के आंकड़े जारी हो सकते हैं. इसके अलावा महंगाई दर के भी आंकड़े शुक्रवार को ही जारी होने की संभावना है. देश की प्रमुख कंपनियां इन्फोसिस और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज भी वित्त वर्ष 2018-19 की आखिरी तिमाही के अपने नतीजे घोषित कर सकती हैं.

उधर, यूरोपियन सेंट्रल बैंक ब्याज दर निर्धारण को लेकर अपना फैसला बुधवार को जारी कर सकता है. ब्रेक्सिट को लेकर बनी असमंजस की स्थिति का भी दुनियाभर के शेयर बाजारों पर असर देखने को मिल सकता है, जिससे भारतीय शेयर बाजार भी प्रभावित होगा.

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