रोहतक में भी हुआ था दिल्ली की ‘निर्भया’ जैसा गैंगरेप केस, आरोपियों को हुई फांसी

6 साल पहले दिल्ली में हुआ ‘निर्भया’ जैसा रेप केस हरियाणा के रोहतक में भी नेपाली युवती के साथ हुआ था। दोनों में 4 समानताएं और दो अंतर पाए गए। दोनों में ही आरोपियों को फांसी की सजा हुई।
दिल्ली में 16 दिसंबर 2012 को निर्भया से गैंगरेप हुआ। 13 दिनों तक अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच जूझती रही और 29 दिसंबर 2012 को निर्भया की सिंगापुर में मौत हो गई। 3 जनवरी 2013 को कोर्ट में चालान पेश किया गया और 7 जनवरी को ट्रायल शुरू हुआ। छह आरोपी थे। 11 मार्च 2013 राम सिंह नामक मुख्य आरोपी ने तिहाड़ जेल में आत्महत्या कर ली। 14 सितम्बर 2013 को इस मामले के लिये विशेष तौर पर गठित त्वरित अदालत ने चारों वयस्क दोषियों को फांसी की सजा सुनाई। 7 अक्टूबर, 2013 को दोषियों में से विनय शर्मा और अक्षय ठाकुर ने सजा के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में अपील की। 13 मार्च, 2014 को दिल्ली हाईकोर्ट ने चारों आरोपियों की फांसी की सजा को बरकरार रखने का फैसला सुनाया। दोषी सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए और 4 अप्रैल 2016 उनकी फांसी की सजा पर रोक लग गई। सुप्रीम कोर्ट ने 11 जुलाई 2016 को केस तीन जजों की बेंच को भेजा। केस में मदद के लिए दो एमिकस क्यूरी नियुक्त किए गए। 9 जुलाई, 2018 को दोषियों की ओर से दाखिल की गई पुनर्विचार याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज करते हुए मौत की सजा को बरकरार रखा।
रोहतक में ही नेपाली मूल की 28 वर्षीय मानसिक रूप से अस्वस्थ महिला के साथ गैंगरेप हुआ था। फरवरी 2015 में हुई यह घटना इतनी वीभत्स थी कि इसकी गूंज देश भर में पहुंच गई। महिला के साथ बलात्कार कर उसके शरीर को जलाने की कोशिश की गई। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में कहा गया कि महिला के शरीर के कई अंग भी रेप के बाद निकाले गए। 1 फरवरी 2015 को नेपाली युवती घर से गायब हुई। 4 फरवरी को नग्न अवस्था में उसका शव मिला। 21 जुलाई 2015 को पुलिस ने कोर्ट में चार्जशीट पेश की। 3 सितंबर पुलिस ने दो महीने बाद कोर्ट में सप्लीमेंटरी चालान पेश किया। 15 अक्तूबर पहली गवाही हुई। लगातार 9 दिनों तक गवाहियों का दौर चला। 30 नवंबर 2015 को गवाही पूरी। 1 से 7 दिसंबर तक आरोपियों के 313 के बयान दर्ज किए गए। मामले में 21 दिसंबर 2015 को आरोपियों को फांसी की सजा सुनाई गई थी।
समानताएं
चाहे दिल्ली रेप केस हो या रोहतक रेप केस। दोनों मामलों में मुख्य समानता यही थी कि वारदातों को बेहद घिनौने तरीके से अंजाम दिया गया था। रेप के बाद आरोपी इतनी बेदर्दी से पीड़िताओं के साथ पेश आए, ये सोचकर भी दिल दहल जाता है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से दोनों की ये पुष्टि हुई। दूसरी, दिल्ली रेप केस में एक नाबालिग समेत 6 लोगों पर युवती से रेप और हत्या के आरोप लगे। रोहतक में एक नाबालिग समेत 9 लोगों पर रेप और हत्या के आरोप लगे। दोनों मामलों में एक आरोपी नाबालिग है। दिल्ली केस का नाबालिग बरी हो चुका है। उसका केस जुवेनाइल कोर्ट में चला था। रोहतक रेप केस में भी नाबालिग आरोपी का केस कोर्ट में है।
फास्ट ट्रैक कोर्ट ने दिल्ली रेप केस में पांच लोगों पर हत्या, गैंगरेप और मामलों में आरोप तय किए। इनमें से 11 मार्च 2013 को आरोपियों में से एक राम सिंह ने तिहाड़ जेल में फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली। रोहतक केस के एक आरोपी ने भी जहर निगलकर जान दी। दिल्ली रेप केस के चारों आरोपियों (नाबालिग को छोड़कर) को फांसी की सजा सुनाई गई थी। नाबालिग आरोपी को 31 अगस्त 2013 को तीन साल की सजा मिली थी। 14 सितम्बर 2013 को इस मामले के लिये विशेष तौर पर गठित त्वरित अदालत ने चारों वयस्क दोषियों को फांसी की सजा सुनाई। रोहतक रेप केस के सभी आरोपियों (नाबालिग को छोड़कर) को फांसी की सजा सुनाई गई है। मामले में 21 दिसंबर 2015 को आरोपियों को फांसी की सजा सुनाई गई थी।
मुख्य अंतर
दिल्ली रेप केस में फास्ट ट्रेक कोर्ट में आरोपियों को करीब 6 महीने बाद दोषी करार देकर सजा सुनाई थी, जबकि इसके मुकाबले में रोहतक रेप केस में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश सीमा सिंघल की अदालत ने 3 महीने से भी कम समय से आरोपियों को दोषी करार दे दिया। पीड़ित पक्ष के वकील प्रदीप मलिक ने बताया कि यह फैसला अपने आप में नजीर है। आजतक किसी मामले में इतनी जल्द सजा नहीं सुनाई गई। दिल्ली रेप केस के आरोप में 7 लोगों को नामजद किया गया था, जबकि रोहतक रेप केस में इससे भी ज्यादा आरोपी शामिल थे। मामले में 9 लोगों को आरोपी बनाया गया। दिल्ली रेपकेस सामने आने के बाद देशभर में प्रदर्शन हुए, जबकि रोहतक रेप सामने आने के बाद हरियाणाभर में प्रदर्शन हुए।





